कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १८२ / २०४ № 182 of 204 रचना १८२ / २०४
११ दिसम्बर २०१९ 11 December 2019 ११ दिसम्बर २०१९

एक सूरज सृष्टि में ek sooraj sriishti men एक सूरज सृष्टि में

एक सूरज सृष्टि  में

नव प्राण भरता  है सदा

तन मनस से रोग सारे

दूर रखता  है सदा।

एक धरती गोद में

हर जीव को अपनी धरे

एकही आकाश  उनपर

छाँव करता है सदा

अनगिनत फूलों का होता

धाम गुलशन एक ही

एक तरु कई पाखियों का

नीड़ बुनता है सदा

कोटि जन के नीर से

तर कंठ करती इक नदी

एक सागर में जलज

संसार बसता  है सदा।

एक अकेला साज़ बजकर

बाँधता अनगिन धुनें

इक समर्पित मन हजारों

छंद रचता है सदा।

एक सज्जन यदि बढ़ाए

शुभ कदम सद राह पर

कारवाँ फिर सैकड़ों का

साथ  बढ़ता  है सदा।

आप हैं जग में अकेले

‘कल्पना’ मत सोचिए

जो अकेला रब उसी के

संग रहता है सदा।

ek sooraj sriishti men

naw praan bharataa hai sadaa

tan manas se rog saare

door rakhataa hai sadaa

·

ek dharatee god men

har jeew ko apanee dhare

ekahee aakaash unapar

chaanv karataa hai sadaa

·

anaginat phoolon kaa hotaa

dhaam gulashan ek hee

ek taru kaee paakhiyon kaa

need bunataa hai sadaa

·

koti jan ke neer se

tar kanth karatee ik nadee

ek saagar men jalaj

sansaar basataa hai sadaa

·

ek akelaa saaz bajakar

baandhataa anagin dhunen

ik samarpit man hajaaron

chand rachataa hai sadaa

·

ek sajjan yadi bढ़aae

shubh kadam sad raah par

kaarawaan phir saikadon kaa

saath bढ़taa hai sadaa

·

aap hain jag men akele

‘kalpanaa’ mat sochie

jo akelaa rab usee ke

sang rahataa hai sadaa

एक सूरज सृष्टि  में

नव प्राण भरता  है सदा

तन मनस से रोग सारे

दूर रखता  है सदा।

एक धरती गोद में

हर जीव को अपनी धरे

एकही आकाश  उनपर

छाँव करता है सदा

अनगिनत फूलों का होता

धाम गुलशन एक ही

एक तरु कई पाखियों का

नीड़ बुनता है सदा

कोटि जन के नीर से

तर कंठ करती इक नदी

एक सागर में जलज

संसार बसता  है सदा।

एक अकेला साज़ बजकर

बाँधता अनगिन धुनें

इक समर्पित मन हजारों

छंद रचता है सदा।

एक सज्जन यदि बढ़ाए

शुभ कदम सद राह पर

कारवाँ फिर सैकड़ों का

साथ  बढ़ता  है सदा।

आप हैं जग में अकेले

‘कल्पना’ मत सोचिए

जो अकेला रब उसी के

संग रहता है सदा।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗