एक सूरज सृष्टि में ek sooraj sriishti men एक सूरज सृष्टि में
एक सूरज सृष्टि में
नव प्राण भरता है सदा
तन मनस से रोग सारे
दूर रखता है सदा।
एक धरती गोद में
हर जीव को अपनी धरे
एकही आकाश उनपर
छाँव करता है सदा
अनगिनत फूलों का होता
धाम गुलशन एक ही
एक तरु कई पाखियों का
नीड़ बुनता है सदा
कोटि जन के नीर से
तर कंठ करती इक नदी
एक सागर में जलज
संसार बसता है सदा।
एक अकेला साज़ बजकर
बाँधता अनगिन धुनें
इक समर्पित मन हजारों
छंद रचता है सदा।
एक सज्जन यदि बढ़ाए
शुभ कदम सद राह पर
कारवाँ फिर सैकड़ों का
साथ बढ़ता है सदा।
आप हैं जग में अकेले
‘कल्पना’ मत सोचिए
जो अकेला रब उसी के
संग रहता है सदा।
ek sooraj sriishti men
naw praan bharataa hai sadaa
tan manas se rog saare
door rakhataa hai sadaa
ek dharatee god men
har jeew ko apanee dhare
ekahee aakaash unapar
chaanv karataa hai sadaa
anaginat phoolon kaa hotaa
dhaam gulashan ek hee
ek taru kaee paakhiyon kaa
need bunataa hai sadaa
koti jan ke neer se
tar kanth karatee ik nadee
ek saagar men jalaj
sansaar basataa hai sadaa
ek akelaa saaz bajakar
baandhataa anagin dhunen
ik samarpit man hajaaron
chand rachataa hai sadaa
ek sajjan yadi bढ़aae
shubh kadam sad raah par
kaarawaan phir saikadon kaa
saath bढ़taa hai sadaa
aap hain jag men akele
‘kalpanaa’ mat sochie
jo akelaa rab usee ke
sang rahataa hai sadaa
एक सूरज सृष्टि में
नव प्राण भरता है सदा
तन मनस से रोग सारे
दूर रखता है सदा।
एक धरती गोद में
हर जीव को अपनी धरे
एकही आकाश उनपर
छाँव करता है सदा
अनगिनत फूलों का होता
धाम गुलशन एक ही
एक तरु कई पाखियों का
नीड़ बुनता है सदा
कोटि जन के नीर से
तर कंठ करती इक नदी
एक सागर में जलज
संसार बसता है सदा।
एक अकेला साज़ बजकर
बाँधता अनगिन धुनें
इक समर्पित मन हजारों
छंद रचता है सदा।
एक सज्जन यदि बढ़ाए
शुभ कदम सद राह पर
कारवाँ फिर सैकड़ों का
साथ बढ़ता है सदा।
आप हैं जग में अकेले
‘कल्पना’ मत सोचिए
जो अकेला रब उसी के
संग रहता है सदा।