कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १८ / १६४ № 18 of 164 रचना १८ / १६४
२९ मई २०१३ 29 May 2013 २९ मई २०१३

सूर्य देवा! soory dewaa! सूर्य देवा!

सूर्य देवा!

॥

लाँघना कुछ सोचकर

॥

इस गाँव की चौखट।

॥

बढ़ रहे

॥

तेवर तुम्हारे

॥

सिर चढ़े वैसाख में।

॥

भू हुई बंजर

॥

चला जल भाप बन आकाश में।

॥

देव! है स्वागत तुम्हारा

॥

ध्यान हो लेकिन हमारा

॥

बाँध लेना! प्रथम अपनी

आग सी किरणों की

बिखरी लट।

॥

मौन हैं

॥

प्यासे दुधारू

॥

खूँटियों से द्वंद है।

॥

हलक सूखे हैं

॥

नज़र में याचना की गंध है।

soory dewaa!

·

laanghanaa kuch sochakar

·

is gaanv kee chaukhat

·

bढ़ rahe

·

tewar tumhaare

·

sir chढ़e waisaakh men

·

bhoo huee banjar

·

chalaa jal bhaap ban aakaash men

·

dew! hai svaagat tumhaaraa

·

dhyaan ho lekin hamaaraa

·

baandh lenaa! pratham apanee

aag see kiranon kee

bikharee lat

·

maun hain

·

pyaase dudhaaroo

·

khoontiyon se dvand hai

·

halak sookhe hain

·

nazar men yaachanaa kee gandh hai

सूर्य देवा!

॥

लाँघना कुछ सोचकर

॥

इस गाँव की चौखट।

॥

बढ़ रहे

॥

तेवर तुम्हारे

॥

सिर चढ़े वैसाख में।

॥

भू हुई बंजर

॥

चला जल भाप बन आकाश में।

॥

देव! है स्वागत तुम्हारा

॥

ध्यान हो लेकिन हमारा

॥

बाँध लेना! प्रथम अपनी

आग सी किरणों की

बिखरी लट।

॥

मौन हैं

॥

प्यासे दुधारू

॥

खूँटियों से द्वंद है।

॥

हलक सूखे हैं

॥

नज़र में याचना की गंध है।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗