कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १८ / १६३ № 18 of 163 रचना १८ / १६३
२९ मई २०१३ 29 May 2013 २९ मई २०१३

सूर्य देवा! soory dewaa! सूर्य देवा!

सूर्य देवा!

लाँघना कुछ सोचकर

इस गाँव की चौखट।

बढ़ रहे

तेवर तुम्हारे

सिर चढ़े वैसाख में।

भू हुई बंजर

चला जल भाप बन आकाश में।

देव! है स्वागत तुम्हारा

ध्यान हो लेकिन हमारा

बाँध लेना! प्रथम अपनी

आग सी किरणों की

बिखरी लट।

मौन हैं

प्यासे दुधारू

खूँटियों से द्वंद है।

हलक सूखे हैं

नज़र में याचना की गंध है।

soory dewaa!

·

laanghanaa kuch sochakar

·

is gaanv kee chaukhat

·

bढ़ rahe

·

tewar tumhaare

·

sir chढ़e waisaakh men

·

bhoo huee banjar

·

chalaa jal bhaap ban aakaash men

·

dew! hai svaagat tumhaaraa

·

dhyaan ho lekin hamaaraa

·

baandh lenaa! pratham apanee

aag see kiranon kee

bikharee lat

·

maun hain

·

pyaase dudhaaroo

·

khoontiyon se dvand hai

·

halak sookhe hain

·

nazar men yaachanaa kee gandh hai

सूर्य देवा!

लाँघना कुछ सोचकर

इस गाँव की चौखट।

बढ़ रहे

तेवर तुम्हारे

सिर चढ़े वैसाख में।

भू हुई बंजर

चला जल भाप बन आकाश में।

देव! है स्वागत तुम्हारा

ध्यान हो लेकिन हमारा

बाँध लेना! प्रथम अपनी

आग सी किरणों की

बिखरी लट।

मौन हैं

प्यासे दुधारू

खूँटियों से द्वंद है।

हलक सूखे हैं

नज़र में याचना की गंध है।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗