कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १९ / १६३ № 19 of 163 रचना १९ / १६३
२ जून २०१३ 2 June 2013 २ जून २०१३

सखि, नीम तले sakhi, neem tale सखि, नीम तले

सखि,चैत्र

गया अब ताप बढ़ा।

धरती चटकी सिर सूर्य चढ़ा।

ऋतु के सब रंग

हुए गहरे।

जल स्रोत घटे जन जीव डरे।

फिर भी मन में इक आस पले।

चल पाँव धरें सखि, नीम तले।

इस मौसम में हर पेड़ झड़ा।

पर,

मीत यही अपवाद खड़ा।

खिलता रहता फल फूल भरा।

लगता मन मोहक श्वेत हरा।

भर दोपहरी नित छाँव मिले।

चल झूल झुलें सखि, नीम तले।

यह पेड़ बड़ा सुखकारक है।

यह पूजित है

sakhi,chaitr

gayaa ab taap bढ़aa

·

dharatee chatakee sir soory chढ़aa

·

riitu ke sab rang

hue gahare

·

jal srot ghate jan jeew dare

·

phir bhee man men ik aas pale

chal paanv dharen sakhi, neem tale

·

is mausam men har ped jhadaa

·

par,

meet yahee apawaad khadaa

·

khilataa rahataa phal phool bharaa

·

lagataa man mohak shvet haraa

·

bhar dopaharee nit chaanv mile

chal jhool jhulen sakhi, neem tale

·

yah ped badaa sukhakaarak hai

·

yah poojit hai

सखि,चैत्र

गया अब ताप बढ़ा।

धरती चटकी सिर सूर्य चढ़ा।

ऋतु के सब रंग

हुए गहरे।

जल स्रोत घटे जन जीव डरे।

फिर भी मन में इक आस पले।

चल पाँव धरें सखि, नीम तले।

इस मौसम में हर पेड़ झड़ा।

पर,

मीत यही अपवाद खड़ा।

खिलता रहता फल फूल भरा।

लगता मन मोहक श्वेत हरा।

भर दोपहरी नित छाँव मिले।

चल झूल झुलें सखि, नीम तले।

यह पेड़ बड़ा सुखकारक है।

यह पूजित है

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗