कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १९ / १६४ № 19 of 164 रचना १९ / १६४
२ जून २०१३ 2 June 2013 २ जून २०१३

सखि, नीम तले sakhi, neem tale सखि, नीम तले

सखि,चैत्र

गया अब ताप बढ़ा।

॥

धरती चटकी सिर सूर्य चढ़ा।

॥

ऋतु के सब रंग

हुए गहरे।

॥

जल स्रोत घटे जन जीव डरे।

॥

फिर भी मन में इक आस पले।

चल पाँव धरें सखि, नीम तले।

॥

इस मौसम में हर पेड़ झड़ा।

॥

पर,

मीत यही अपवाद खड़ा।

॥

खिलता रहता फल फूल भरा।

॥

लगता मन मोहक श्वेत हरा।

॥

भर दोपहरी नित छाँव मिले।

चल झूल झुलें सखि, नीम तले।

॥

यह पेड़ बड़ा सुखकारक है।

॥

यह पूजित है

sakhi,chaitr

gayaa ab taap bढ़aa

·

dharatee chatakee sir soory chढ़aa

·

riitu ke sab rang

hue gahare

·

jal srot ghate jan jeew dare

·

phir bhee man men ik aas pale

chal paanv dharen sakhi, neem tale

·

is mausam men har ped jhadaa

·

par,

meet yahee apawaad khadaa

·

khilataa rahataa phal phool bharaa

·

lagataa man mohak shvet haraa

·

bhar dopaharee nit chaanv mile

chal jhool jhulen sakhi, neem tale

·

yah ped badaa sukhakaarak hai

·

yah poojit hai

सखि,चैत्र

गया अब ताप बढ़ा।

॥

धरती चटकी सिर सूर्य चढ़ा।

॥

ऋतु के सब रंग

हुए गहरे।

॥

जल स्रोत घटे जन जीव डरे।

॥

फिर भी मन में इक आस पले।

चल पाँव धरें सखि, नीम तले।

॥

इस मौसम में हर पेड़ झड़ा।

॥

पर,

मीत यही अपवाद खड़ा।

॥

खिलता रहता फल फूल भरा।

॥

लगता मन मोहक श्वेत हरा।

॥

भर दोपहरी नित छाँव मिले।

चल झूल झुलें सखि, नीम तले।

॥

यह पेड़ बड़ा सुखकारक है।

॥

यह पूजित है

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗