सखि, नीम तले sakhi, neem tale सखि, नीम तले
सखि,चैत्र
गया अब ताप बढ़ा।
धरती चटकी सिर सूर्य चढ़ा।
ऋतु के सब रंग
हुए गहरे।
जल स्रोत घटे जन जीव डरे।
फिर भी मन में इक आस पले।
चल पाँव धरें सखि, नीम तले।
इस मौसम में हर पेड़ झड़ा।
पर,
मीत यही अपवाद खड़ा।
खिलता रहता फल फूल भरा।
लगता मन मोहक श्वेत हरा।
भर दोपहरी नित छाँव मिले।
चल झूल झुलें सखि, नीम तले।
यह पेड़ बड़ा सुखकारक है।
यह पूजित है
sakhi,chaitr
gayaa ab taap bढ़aa
dharatee chatakee sir soory chढ़aa
riitu ke sab rang
hue gahare
jal srot ghate jan jeew dare
phir bhee man men ik aas pale
chal paanv dharen sakhi, neem tale
is mausam men har ped jhadaa
par,
meet yahee apawaad khadaa
khilataa rahataa phal phool bharaa
lagataa man mohak shvet haraa
bhar dopaharee nit chaanv mile
chal jhool jhulen sakhi, neem tale
yah ped badaa sukhakaarak hai
yah poojit hai
सखि,चैत्र
गया अब ताप बढ़ा।
धरती चटकी सिर सूर्य चढ़ा।
ऋतु के सब रंग
हुए गहरे।
जल स्रोत घटे जन जीव डरे।
फिर भी मन में इक आस पले।
चल पाँव धरें सखि, नीम तले।
इस मौसम में हर पेड़ झड़ा।
पर,
मीत यही अपवाद खड़ा।
खिलता रहता फल फूल भरा।
लगता मन मोहक श्वेत हरा।
भर दोपहरी नित छाँव मिले।
चल झूल झुलें सखि, नीम तले।
यह पेड़ बड़ा सुखकारक है।
यह पूजित है