कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२२ / १६४ № 122 of 164 रचना १२२ / १६४
७ अप्रैल २०१६ 7 April 2016 ७ अप्रैल २०१६

कुहुक रही होगी कोयलिया kuhuk rahee hogee koyaliyaa कुहुक रही होगी कोयलिया

सुनो

सलोनी!

॥

कहो

सुनयना!

॥

अंबुआ

पर हैं फूटे कल्ले

॥

छोड़ो

मिर्च, ओखली, मूसल

॥

ओढ़

दुपट्टा डालो चप्पल

॥

मुखड़े

को दर्पण दिखला दो

॥

पोंछ

पसीना बहता कलकल

॥

दरवाजे

पर

॥

जड़

दो ताला

॥

उड़काकर

खिड़की के पल्ले

॥

पेड़ों

चढ़ी खुमारी होगी

॥

डाल-डाल

तन भारी होगी

॥

अमराई

के पोर-पोर पर

॥

बौरों

की फुलकारी होगी

॥

कुहुक

रही

॥

होगी

कोयलिया

॥

चूस

आम, रस भरे मुटल्ले

॥

मौसम

कुछ मदमाता होगा

॥

गुन-गुन

गीत सुनाता

suno

salonee!

·

kaho

sunayanaa!

·

anbuaa

par hain phoote kalle

·

chodo

mirch, okhalee, moosal

·

oढ़

dupattaa daalo chappal

·

mukhade

ko darpan dikhalaa do

·

ponch

paseenaa bahataa kalakal

·

darawaaje

par

·

jad

do taalaa

·

udakaakar

khidakee ke palle

·

pedon

chढ़ee khumaaree hogee

·

daal-daal

tan bhaaree hogee

·

amaraaee

ke por-por par

·

bauron

kee phulakaaree hogee

·

kuhuk

rahee

·

hogee

koyaliyaa

·

choos

aam, ras bhare mutalle

·

mausam

kuch madamaataa hogaa

·

gun-gun

geet sunaataa

सुनो

सलोनी!

॥

कहो

सुनयना!

॥

अंबुआ

पर हैं फूटे कल्ले

॥

छोड़ो

मिर्च, ओखली, मूसल

॥

ओढ़

दुपट्टा डालो चप्पल

॥

मुखड़े

को दर्पण दिखला दो

॥

पोंछ

पसीना बहता कलकल

॥

दरवाजे

पर

॥

जड़

दो ताला

॥

उड़काकर

खिड़की के पल्ले

॥

पेड़ों

चढ़ी खुमारी होगी

॥

डाल-डाल

तन भारी होगी

॥

अमराई

के पोर-पोर पर

॥

बौरों

की फुलकारी होगी

॥

कुहुक

रही

॥

होगी

कोयलिया

॥

चूस

आम, रस भरे मुटल्ले

॥

मौसम

कुछ मदमाता होगा

॥

गुन-गुन

गीत सुनाता

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗