कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२१ / १६३ № 121 of 163 रचना १२१ / १६३
७ अप्रैल २०१६ 7 April 2016 ७ अप्रैल २०१६

कुहुक रही होगी कोयलिया kuhuk rahee hogee koyaliyaa कुहुक रही होगी कोयलिया

सुनो

सलोनी!

कहो

सुनयना!

अंबुआ

पर हैं फूटे कल्ले

छोड़ो

मिर्च, ओखली, मूसल

ओढ़

दुपट्टा डालो चप्पल

मुखड़े

को दर्पण दिखला दो

पोंछ

पसीना बहता कलकल

दरवाजे

पर

जड़

दो ताला

उड़काकर

खिड़की के पल्ले

पेड़ों

चढ़ी खुमारी होगी

डाल-डाल

तन भारी होगी

अमराई

के पोर-पोर पर

बौरों

की फुलकारी होगी

कुहुक

रही

होगी

कोयलिया

चूस

आम, रस भरे मुटल्ले

मौसम

कुछ मदमाता होगा

गुन-गुन

गीत सुनाता

suno

salonee!

·

kaho

sunayanaa!

·

anbuaa

par hain phoote kalle

·

chodo

mirch, okhalee, moosal

·

oढ़

dupattaa daalo chappal

·

mukhade

ko darpan dikhalaa do

·

ponch

paseenaa bahataa kalakal

·

darawaaje

par

·

jad

do taalaa

·

udakaakar

khidakee ke palle

·

pedon

chढ़ee khumaaree hogee

·

daal-daal

tan bhaaree hogee

·

amaraaee

ke por-por par

·

bauron

kee phulakaaree hogee

·

kuhuk

rahee

·

hogee

koyaliyaa

·

choos

aam, ras bhare mutalle

·

mausam

kuch madamaataa hogaa

·

gun-gun

geet sunaataa

सुनो

सलोनी!

कहो

सुनयना!

अंबुआ

पर हैं फूटे कल्ले

छोड़ो

मिर्च, ओखली, मूसल

ओढ़

दुपट्टा डालो चप्पल

मुखड़े

को दर्पण दिखला दो

पोंछ

पसीना बहता कलकल

दरवाजे

पर

जड़

दो ताला

उड़काकर

खिड़की के पल्ले

पेड़ों

चढ़ी खुमारी होगी

डाल-डाल

तन भारी होगी

अमराई

के पोर-पोर पर

बौरों

की फुलकारी होगी

कुहुक

रही

होगी

कोयलिया

चूस

आम, रस भरे मुटल्ले

मौसम

कुछ मदमाता होगा

गुन-गुन

गीत सुनाता

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗