कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ३३ / ६३ № 33 of 63 रचना ३३ / ६३
९ जून २०१३ 9 June 2013 ९ जून २०१३

ऋतु परिवर्तन अटल है riitu pariwartan atal hai ऋतु परिवर्तन अटल है

ऋतु परिवर्तन अटल हैं, शीत बढ़े या ताप।

जैसे भी बदलाव हों, बदल जाइए आप।

बदल जाइए आप, अगर मौसम गर्मी का।

खाना खाएँ अल्प, बढ़े सेवन पानी का।

ऋतु बोले जो बात, बना लें वैसा ही मन

शीत बढ़े या ताप, अटल हैं ऋतु परिवर्तन।

नभचर, थलचर, जीव सब, गर्मी से हैरान।

सड़कों के सीने फटे, हाँफ रहे मैदान।

हाँफ रहे मैदान, जलाशय प्यासे सारे

फूल पात उद्यान, बिना जल बाजी हारे।

अपनाएँ वो रीत, कंठ

riitu pariwartan atal hain, sheet bढ़e yaa taap

jaise bhee badalaaw hon, badal jaaie aap

badal jaaie aap, agar mausam garmee kaa

khaanaa khaaen alp, bढ़e sewan paanee kaa

riitu bole jo baat, banaa len waisaa hee man

sheet bढ़e yaa taap, atal hain riitu pariwartan

·

nabhachar, thalachar, jeew sab, garmee se hairaan

sadakon ke seene phate, haanph rahe maidaan

haanph rahe maidaan, jalaashay pyaase saare

phool paat udyaan, binaa jal baajee haare

apanaaen wo reet, kanth

ऋतु परिवर्तन अटल हैं, शीत बढ़े या ताप।

जैसे भी बदलाव हों, बदल जाइए आप।

बदल जाइए आप, अगर मौसम गर्मी का।

खाना खाएँ अल्प, बढ़े सेवन पानी का।

ऋतु बोले जो बात, बना लें वैसा ही मन

शीत बढ़े या ताप, अटल हैं ऋतु परिवर्तन।

नभचर, थलचर, जीव सब, गर्मी से हैरान।

सड़कों के सीने फटे, हाँफ रहे मैदान।

हाँफ रहे मैदान, जलाशय प्यासे सारे

फूल पात उद्यान, बिना जल बाजी हारे।

अपनाएँ वो रीत, कंठ

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗