कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ३५ / ६३ № 35 of 63 रचना ३५ / ६३
१० जून २०१३ 10 June 2013 १० जून २०१३

चली सुहानी सैर को, लो कागज़ की नाव chalee suhaanee sair ko, lo kaagaz kee naaw चली सुहानी सैर को, लो कागज़ की नाव

बच्चों ने मिलकर किया, बूँदों का घेराव।

चली सुहानी सैर को, लो

कागज़ की नाव।

लो कागज की नाव, संग

गूँजी किलकारी

जल थल हुए समान, खिल

उठी धरती सारी।

मौसम का उल्लास, छा

गया सबके दिल पर

बूँदों का घेराव, किया

बच्चों ने मिलकर।

पहली बारिश दे गई, तन मन को आनंद।

चाय पकौड़ी साथ में, शाम हो गई छंद।

शाम हो गई छंद, गीत रातों ने गाया।

बूँदों ने भरपूर, मेघ मल्हार सुनाया।

bachchon ne milakar kiyaa, boondon kaa gheraaw

·

chalee suhaanee sair ko, lo

kaagaz kee naaw

·

lo kaagaj kee naaw, sang

goonjee kilakaaree

·

jal thal hue samaan, khil

uthee dharatee saaree

·

mausam kaa ullaas, chaa

gayaa sabake dil par

·

boondon kaa gheraaw, kiyaa

bachchon ne milakar

·

pahalee baarish de gaee, tan man ko aanand

·

chaay pakaudee saath men, shaam ho gaee chand

·

shaam ho gaee chand, geet raaton ne gaayaa

·

boondon ne bharapoor, megh malhaar sunaayaa

बच्चों ने मिलकर किया, बूँदों का घेराव।

चली सुहानी सैर को, लो

कागज़ की नाव।

लो कागज की नाव, संग

गूँजी किलकारी

जल थल हुए समान, खिल

उठी धरती सारी।

मौसम का उल्लास, छा

गया सबके दिल पर

बूँदों का घेराव, किया

बच्चों ने मिलकर।

पहली बारिश दे गई, तन मन को आनंद।

चाय पकौड़ी साथ में, शाम हो गई छंद।

शाम हो गई छंद, गीत रातों ने गाया।

बूँदों ने भरपूर, मेघ मल्हार सुनाया।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗