कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ११८ / १६३ № 118 of 163 रचना ११८ / १६३
१३ जनवरी २०१६ 13 January 2016 १३ जनवरी २०१६

शत-शत वंदन सूर्य तुम्हारा shat-shat wandan soory tumhaaraa शत-शत वंदन सूर्य तुम्हारा

परिवर्तन का हुआ

इशारा

शत-शत वंदन सूर्य!

तुम्हारा।

उतरी ज्यों किरणों

की डोली

भरी आस से भू की

झोली

गतिय हो चली जीवन

धारा

शत-शत वंदन सूर्य!

तुम्हारा।

जोश जगाते हो जन-जन

में

होश तुम्हीं से हर

आँगन में

मीठा हो जाता जल

खारा

शत-शत वंदन, सूर्य!

तुम्हारा।

कर्म तुम्हारा चलते

रहना

धर्म तुम्हारा जलते

रहना

तुमसे जीवनमय जग

सारा

शत-शत वंदन, सूर्य!

तुम्हारा।

जब

pariwartan kaa huaa

ishaaraa

·

shat-shat wandan soory!

·

tumhaaraa

·

utaree jyon kiranon

kee dolee

·

bharee aas se bhoo kee

jholee

·

gatiy ho chalee jeewan

dhaaraa

·

shat-shat wandan soory!

·

tumhaaraa

·

josh jagaate ho jan-jan

men

·

hosh tumheen se har

aangan men

·

meethaa ho jaataa jal

khaaraa

·

shat-shat wandan, soory!

·

tumhaaraa

·

karm tumhaaraa chalate

rahanaa

·

dharm tumhaaraa jalate

rahanaa

·

tumase jeewanamay jag

saaraa

·

shat-shat wandan, soory!

·

tumhaaraa

·

jab

परिवर्तन का हुआ

इशारा

शत-शत वंदन सूर्य!

तुम्हारा।

उतरी ज्यों किरणों

की डोली

भरी आस से भू की

झोली

गतिय हो चली जीवन

धारा

शत-शत वंदन सूर्य!

तुम्हारा।

जोश जगाते हो जन-जन

में

होश तुम्हीं से हर

आँगन में

मीठा हो जाता जल

खारा

शत-शत वंदन, सूर्य!

तुम्हारा।

कर्म तुम्हारा चलते

रहना

धर्म तुम्हारा जलते

रहना

तुमसे जीवनमय जग

सारा

शत-शत वंदन, सूर्य!

तुम्हारा।

जब

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗