कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना २९ / १६३ № 29 of 163 रचना २९ / १६३
२२ अगस्त २०१३ 22 August 2013 २२ अगस्त २०१३

कहाँ उगाऊँ हरसिंगार kahaan ugaaoon harasingaar कहाँ उगाऊँ हरसिंगार

बचपन में पौधा रोपा था

भीगे भीगे सावन में।बरसों बाद खड़ी हूँ फिर से यादों के उस आँगन में।हरसिंगार कहाता है यहमाँ ने यही बताया थामुरझाएगा,बार बार मतछुओ,यही समझाया था।सुनी अनसुनी कर देती थीसहलाती थी क्षण-क्षण में।नन्हा पौधा बड़ा हो गयाकलियों से गुलजार हुआ।सारा आलम लगा महकनेहर दिन हरसिंगार हुआ।तना हिलाती ढेरों पाती।भर लेती थी दामन में।सोचा करती, भू पर भेजाइसे कौन से दाता ने?श्वेत

bachapan men paudhaa ropaa thaa

bheege bheege saawan menbarason baad khadee hoon phir se yaadon ke us aangan menharasingaar kahaataa hai yahamaan ne yahee bataayaa thaamurajhaaegaa,baar baar matachuo,yahee samajhaayaa thaasunee anasunee kar detee theesahalaatee thee kshan-kshan mennanhaa paudhaa badaa ho gayaakaliyon se gulajaar huaasaaraa aalam lagaa mahakanehar din harasingaar huaatanaa hilaatee dheron paateebhar letee thee daaman mensochaa karatee, bhoo par bhejaaise kaun se daataa ne?shvet

बचपन में पौधा रोपा था

भीगे भीगे सावन में।बरसों बाद खड़ी हूँ फिर से यादों के उस आँगन में।हरसिंगार कहाता है यहमाँ ने यही बताया थामुरझाएगा,बार बार मतछुओ,यही समझाया था।सुनी अनसुनी कर देती थीसहलाती थी क्षण-क्षण में।नन्हा पौधा बड़ा हो गयाकलियों से गुलजार हुआ।सारा आलम लगा महकनेहर दिन हरसिंगार हुआ।तना हिलाती ढेरों पाती।भर लेती थी दामन में।सोचा करती, भू पर भेजाइसे कौन से दाता ने?श्वेत

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗