आओ मित्रो पेड़ बचाएँ aao mitro ped bachaaen आओ मित्रो पेड़ बचाएँ
वन-वन को अतिक्रमण खा रहा
फैल रहीं विषयुक्त हवाएँ।
है उदास, सहमा सा मौसम
आओ मित्रों पेड़ बचाएँ।
काँप रहे हैं बरगद पीपल
अमलतास का टूटा है बल।
गुलमोहर की बाहें बेदम-
होकर ढूँढ रही हैं संबल।
हम इनको दुलराएँ चलकर
आँसू पोंछें धैर्य बँधाएँ।
करें इस तरह कुछ तैयारी
पास न पहुँचे इनके आरी।
कातिल नज़र पड़े जो इनपर
बन जाएँ तलवार दुधारी।
करके रक्षित इन्हें आज हम
पर्यावरण विशुद्ध बनाएँ।
वन करते लाखों का पोषण
रोकें अब हम उनका शोषण
जन-जन-मन के भाव जगाकर
एक मंत्र दें, पौधारोपण।
अभी समय है मिलकर मित्रों
हरियाली से धरा सजाएँ
wan-wan ko atikraman khaa rahaa
phail raheen wishayukt hawaaen
hai udaas, sahamaa saa mausam
aao mitron ped bachaaen
kaanp rahe hain baragad peepal
amalataas kaa tootaa hai bal
gulamohar kee baahen bedam-
hokar dhoondh rahee hain sanbal
ham inako dularaaen chalakar
aansoo ponchen dhairy bandhaaen
karen is tarah kuch taiyaaree
paas n pahunche inake aaree
kaatil nazar pade jo inapar
ban jaaen talawaar dudhaaree
karake rakshit inhen aaj ham
paryaawaran wishuddh banaaen
wan karate laakhon kaa poshan
roken ab ham unakaa shoshan
jan-jan-man ke bhaaw jagaakar
ek mantr den, paudhaaropan
abhee samay hai milakar mitron
hariyaalee se dharaa sajaaen
वन-वन को अतिक्रमण खा रहा
फैल रहीं विषयुक्त हवाएँ।
है उदास, सहमा सा मौसम
आओ मित्रों पेड़ बचाएँ।
काँप रहे हैं बरगद पीपल
अमलतास का टूटा है बल।
गुलमोहर की बाहें बेदम-
होकर ढूँढ रही हैं संबल।
हम इनको दुलराएँ चलकर
आँसू पोंछें धैर्य बँधाएँ।
करें इस तरह कुछ तैयारी
पास न पहुँचे इनके आरी।
कातिल नज़र पड़े जो इनपर
बन जाएँ तलवार दुधारी।
करके रक्षित इन्हें आज हम
पर्यावरण विशुद्ध बनाएँ।
वन करते लाखों का पोषण
रोकें अब हम उनका शोषण
जन-जन-मन के भाव जगाकर
एक मंत्र दें, पौधारोपण।
अभी समय है मिलकर मित्रों
हरियाली से धरा सजाएँ