कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १३५ / १६४ № 135 of 164 रचना १३५ / १६४
११ नवम्बर २०१९ 11 November 2019 ११ नवम्बर २०१९

आओ मित्रो पेड़ बचाएँ aao mitro ped bachaaen आओ मित्रो पेड़ बचाएँ

वन-वन को अतिक्रमण खा रहा

फैल रहीं विषयुक्त हवाएँ।

है उदास, सहमा सा मौसम

आओ मित्रों पेड़ बचाएँ।

॥

काँप रहे हैं बरगद पीपल

अमलतास का टूटा है बल।

गुलमोहर की बाहें बेदम-

होकर ढूँढ रही हैं संबल।

॥

हम इनको दुलराएँ चलकर

आँसू पोंछें धैर्य बँधाएँ।

॥

करें इस तरह कुछ तैयारी

पास न पहुँचे इनके आरी।

कातिल नज़र पड़े जो इनपर

बन जाएँ तलवार दुधारी।

॥

करके रक्षित इन्हें आज हम

पर्यावरण विशुद्ध बनाएँ।

॥

वन करते लाखों का पोषण

रोकें अब हम उनका शोषण

जन-जन-मन के भाव जगाकर

एक मंत्र दें, पौधारोपण।

॥

अभी समय है मिलकर मित्रों

हरियाली से धरा सजाएँ

wan-wan ko atikraman khaa rahaa

phail raheen wishayukt hawaaen

hai udaas, sahamaa saa mausam

aao mitron ped bachaaen

·

kaanp rahe hain baragad peepal

amalataas kaa tootaa hai bal

gulamohar kee baahen bedam-

hokar dhoondh rahee hain sanbal

·

ham inako dularaaen chalakar

aansoo ponchen dhairy bandhaaen

·

karen is tarah kuch taiyaaree

paas n pahunche inake aaree

kaatil nazar pade jo inapar

ban jaaen talawaar dudhaaree

·

karake rakshit inhen aaj ham

paryaawaran wishuddh banaaen

·

wan karate laakhon kaa poshan

roken ab ham unakaa shoshan

jan-jan-man ke bhaaw jagaakar

ek mantr den, paudhaaropan

·

abhee samay hai milakar mitron

hariyaalee se dharaa sajaaen

वन-वन को अतिक्रमण खा रहा

फैल रहीं विषयुक्त हवाएँ।

है उदास, सहमा सा मौसम

आओ मित्रों पेड़ बचाएँ।

॥

काँप रहे हैं बरगद पीपल

अमलतास का टूटा है बल।

गुलमोहर की बाहें बेदम-

होकर ढूँढ रही हैं संबल।

॥

हम इनको दुलराएँ चलकर

आँसू पोंछें धैर्य बँधाएँ।

॥

करें इस तरह कुछ तैयारी

पास न पहुँचे इनके आरी।

कातिल नज़र पड़े जो इनपर

बन जाएँ तलवार दुधारी।

॥

करके रक्षित इन्हें आज हम

पर्यावरण विशुद्ध बनाएँ।

॥

वन करते लाखों का पोषण

रोकें अब हम उनका शोषण

जन-जन-मन के भाव जगाकर

एक मंत्र दें, पौधारोपण।

॥

अभी समय है मिलकर मित्रों

हरियाली से धरा सजाएँ

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗