कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना २१ / १६४ № 21 of 164 रचना २१ / १६४
४ अगस्त २०१३ 4 August 2013 ४ अगस्त २०१३

उत्तर यहीं अड़ा है uttar yaheen adaa hai उत्तर यहीं अड़ा है

पावस का इस बार देश पर,

॥

प्यार बहुत उमड़ा है।

॥

लेकिन क्या सुख संचय होगा?

॥

संशय नाग

॥

खड़ा है।

॥

मक्कारी,

गद्दारी, लालच

॥

शासन के कलपुर्ज़े।

॥

बूँद-बूँद को चट कर देंगे

॥

घन बरसे या गरजे।

॥

भरे सकल जल-स्रोत लबालब

॥

सागर ज्वार चढ़ा है।

॥

मगर उसे नल नहलाएगा?

॥

चिंतित मलिन

॥

घड़ा है।

॥

बन मशीन मानव ने भू के

॥

रोम-रोम को वेधा।

॥

क्यों कुदरत

paawas kaa is baar desh par,

·

pyaar bahut umadaa hai

·

lekin kyaa sukh sanchay hogaa?

·

sanshay naag

·

khadaa hai

·

makkaaree,

gaddaaree, laalach

·

shaasan ke kalapurze

·

boond-boond ko chat kar denge

·

ghan barase yaa garaje

·

bhare sakal jal-srot labaalab

·

saagar jvaar chढ़aa hai

·

magar use nal nahalaaegaa?

·

chintit malin

·

ghadaa hai

·

ban masheen maanaw ne bhoo ke

·

rom-rom ko wedhaa

·

kyon kudarat

पावस का इस बार देश पर,

॥

प्यार बहुत उमड़ा है।

॥

लेकिन क्या सुख संचय होगा?

॥

संशय नाग

॥

खड़ा है।

॥

मक्कारी,

गद्दारी, लालच

॥

शासन के कलपुर्ज़े।

॥

बूँद-बूँद को चट कर देंगे

॥

घन बरसे या गरजे।

॥

भरे सकल जल-स्रोत लबालब

॥

सागर ज्वार चढ़ा है।

॥

मगर उसे नल नहलाएगा?

॥

चिंतित मलिन

॥

घड़ा है।

॥

बन मशीन मानव ने भू के

॥

रोम-रोम को वेधा।

॥

क्यों कुदरत

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗