कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना २१ / १६३ № 21 of 163 रचना २१ / १६३
४ अगस्त २०१३ 4 August 2013 ४ अगस्त २०१३

उत्तर यहीं अड़ा है uttar yaheen adaa hai उत्तर यहीं अड़ा है

पावस का इस बार देश पर,

प्यार बहुत उमड़ा है।

लेकिन क्या सुख संचय होगा?

संशय नाग

खड़ा है।

मक्कारी,

गद्दारी, लालच

शासन के कलपुर्ज़े।

बूँद-बूँद को चट कर देंगे

घन बरसे या गरजे।

भरे सकल जल-स्रोत लबालब

सागर ज्वार चढ़ा है।

मगर उसे नल नहलाएगा?

चिंतित मलिन

घड़ा है।

बन मशीन मानव ने भू के

रोम-रोम को वेधा।

क्यों कुदरत

paawas kaa is baar desh par,

·

pyaar bahut umadaa hai

·

lekin kyaa sukh sanchay hogaa?

·

sanshay naag

·

khadaa hai

·

makkaaree,

gaddaaree, laalach

·

shaasan ke kalapurze

·

boond-boond ko chat kar denge

·

ghan barase yaa garaje

·

bhare sakal jal-srot labaalab

·

saagar jvaar chढ़aa hai

·

magar use nal nahalaaegaa?

·

chintit malin

·

ghadaa hai

·

ban masheen maanaw ne bhoo ke

·

rom-rom ko wedhaa

·

kyon kudarat

पावस का इस बार देश पर,

प्यार बहुत उमड़ा है।

लेकिन क्या सुख संचय होगा?

संशय नाग

खड़ा है।

मक्कारी,

गद्दारी, लालच

शासन के कलपुर्ज़े।

बूँद-बूँद को चट कर देंगे

घन बरसे या गरजे।

भरे सकल जल-स्रोत लबालब

सागर ज्वार चढ़ा है।

मगर उसे नल नहलाएगा?

चिंतित मलिन

घड़ा है।

बन मशीन मानव ने भू के

रोम-रोम को वेधा।

क्यों कुदरत

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗