बेला महके belaa mahake बेला महके
नर्म हुए दिन, रातें मधुरिम
बागों जब से
बेला महके।
मालिन सारे काज छोड़कर
चुनने फूल चली दीवानी।
आखिर इन अपनों ने ही तो
सींचा बचपन और जवानी।
नज़रें नूर, वदन नूरानी
मचल रहे हैं भाव
हृदय के।
इन फूलों ने गजरे गूँथे
देवों के हित हार बनाए।
लाख गुलाबों को गुमान हो
पर मुझको बेला ही भाए।
रूप-रंग श्वेताभ, गंध मृदु
क्यों न कलम मेरी
फिर बहके।
जब बहार बेला पर छाती
डालों कली-कली मुस्काती।
क्रूर पसीने से निजात दे
प्रणय, मिलन के गीत सुनाती।
खुशबू देकर ले जाती है
पीर भरे पल पवन
विरह के।
narm hue din, raaten madhurim
baagon jab se
belaa mahake
maalin saare kaaj chodakar
chunane phool chalee deewaanee
aakhir in apanon ne hee to
seenchaa bachapan aur jawaanee
nazaren noor, wadan nooraanee
machal rahe hain bhaaw
hriiday ke
in phoolon ne gajare goonthe
dewon ke hit haar banaae
laakh gulaabon ko gumaan ho
par mujhako belaa hee bhaae
roop-rang shvetaabh, gandh mriidu
kyon n kalam meree
phir bahake
jab bahaar belaa par chaatee
daalon kalee-kalee muskaatee
kroor paseene se nijaat de
pranay, milan ke geet sunaatee
khushaboo dekar le jaatee hai
peer bhare pal pawan
wirah ke
नर्म हुए दिन, रातें मधुरिम
बागों जब से
बेला महके।
मालिन सारे काज छोड़कर
चुनने फूल चली दीवानी।
आखिर इन अपनों ने ही तो
सींचा बचपन और जवानी।
नज़रें नूर, वदन नूरानी
मचल रहे हैं भाव
हृदय के।
इन फूलों ने गजरे गूँथे
देवों के हित हार बनाए।
लाख गुलाबों को गुमान हो
पर मुझको बेला ही भाए।
रूप-रंग श्वेताभ, गंध मृदु
क्यों न कलम मेरी
फिर बहके।
जब बहार बेला पर छाती
डालों कली-कली मुस्काती।
क्रूर पसीने से निजात दे
प्रणय, मिलन के गीत सुनाती।
खुशबू देकर ले जाती है
पीर भरे पल पवन
विरह के।