जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी jab talak hai dam, kalam chalatee rahegee जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी
जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी
दर्द
दुखियों का गज़ल कहती रहेगी
साज़िशें
लाखों रचे चाहे समंदर
सिर
उठा सरिता मगर बहती रहेगी
जानती
अब नरपिशाचों से निपटना
बेधड़क
बेटी सफर करती रहेगी
बन्दिशों
की बाढ़ हो या सिर कलम हों
प्रेम
की पुरवा सदा बहती रहेगी
क्या
टिकेगी वो कभी सरकार, बोलो
जन-हितों
पर लात जो धरती रहेगी?
रोक
पाएगी क्या सूरज का निकलना
रात
को ढलना ही है, ढलती रहेगी
गम
के बाद आएँगे खुशियों के भी मौसम
‘कल्पना’ यों ज़िन्दगी कटती रहेगी
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
jab talak hai dam, kalam chalatee rahegee
dard
dukhiyon kaa gazal kahatee rahegee
saazishen
laakhon rache chaahe samandar
sir
uthaa saritaa magar bahatee rahegee
jaanatee
ab narapishaachon se nipatanaa
bedhadak
betee saphar karatee rahegee
bandishon
kee baaढ़ ho yaa sir kalam hon
prem
kee purawaa sadaa bahatee rahegee
kyaa
tikegee wo kabhee sarakaar, bolo
jan-hiton
par laat jo dharatee rahegee?
rok
paaegee kyaa sooraj kaa nikalanaa
raat
ko dhalanaa hee hai, dhalatee rahegee
gam
ke baad aaenge khushiyon ke bhee mausam
‘kalpanaa’ yon zindagee katatee rahegee
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी
दर्द
दुखियों का गज़ल कहती रहेगी
साज़िशें
लाखों रचे चाहे समंदर
सिर
उठा सरिता मगर बहती रहेगी
जानती
अब नरपिशाचों से निपटना
बेधड़क
बेटी सफर करती रहेगी
बन्दिशों
की बाढ़ हो या सिर कलम हों
प्रेम
की पुरवा सदा बहती रहेगी
क्या
टिकेगी वो कभी सरकार, बोलो
जन-हितों
पर लात जो धरती रहेगी?
रोक
पाएगी क्या सूरज का निकलना
रात
को ढलना ही है, ढलती रहेगी
गम
के बाद आएँगे खुशियों के भी मौसम
‘कल्पना’ यों ज़िन्दगी कटती रहेगी
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी