कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ११४ / २०४ № 114 of 204 रचना ११४ / २०४
७ जनवरी २०१६ 7 January 2016 ७ जनवरी २०१६

जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी jab talak hai dam, kalam chalatee rahegee जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी

जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी

दर्द

दुखियों का गज़ल कहती रहेगी

साज़िशें

लाखों रचे चाहे समंदर

सिर

उठा सरिता मगर बहती रहेगी

जानती

अब नरपिशाचों से निपटना

बेधड़क

बेटी सफर करती रहेगी

बन्दिशों

की बाढ़ हो या सिर कलम हों

प्रेम

की पुरवा सदा बहती रहेगी

क्या

टिकेगी वो कभी सरकार, बोलो

जन-हितों

पर लात जो धरती रहेगी?

रोक

पाएगी क्या सूरज का निकलना

रात

को ढलना ही है, ढलती रहेगी

गम

के बाद आएँगे खुशियों के भी मौसम

‘कल्पना’ यों ज़िन्दगी कटती रहेगी

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

jab talak hai dam, kalam chalatee rahegee

·

dard

dukhiyon kaa gazal kahatee rahegee

·

saazishen

laakhon rache chaahe samandar

·

sir

uthaa saritaa magar bahatee rahegee

·

jaanatee

ab narapishaachon se nipatanaa

·

bedhadak

betee saphar karatee rahegee

·

bandishon

kee baaढ़ ho yaa sir kalam hon

·

prem

kee purawaa sadaa bahatee rahegee

·

kyaa

tikegee wo kabhee sarakaar, bolo

·

jan-hiton

par laat jo dharatee rahegee?

·

rok

paaegee kyaa sooraj kaa nikalanaa

·

raat

ko dhalanaa hee hai, dhalatee rahegee

·

gam

ke baad aaenge khushiyon ke bhee mausam

·

‘kalpanaa’ yon zindagee katatee rahegee

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी

दर्द

दुखियों का गज़ल कहती रहेगी

साज़िशें

लाखों रचे चाहे समंदर

सिर

उठा सरिता मगर बहती रहेगी

जानती

अब नरपिशाचों से निपटना

बेधड़क

बेटी सफर करती रहेगी

बन्दिशों

की बाढ़ हो या सिर कलम हों

प्रेम

की पुरवा सदा बहती रहेगी

क्या

टिकेगी वो कभी सरकार, बोलो

जन-हितों

पर लात जो धरती रहेगी?

रोक

पाएगी क्या सूरज का निकलना

रात

को ढलना ही है, ढलती रहेगी

गम

के बाद आएँगे खुशियों के भी मौसम

‘कल्पना’ यों ज़िन्दगी कटती रहेगी

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗