कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ४१ / २०४ № 41 of 204 रचना ४१ / २०४
२२ अप्रैल २०१४ 22 April 2014 २२ अप्रैल २०१४

वो अपनापन कहाँ है wo apanaapan kahaan hai वो अपनापन कहाँ है

जिसे पुरखों,

ने सौंपा था, वो अपनापन कहाँ है?

जहाँ सुख बीज,

रोपा था, वो घर आँगन कहाँ है?

सितारे, चाँद, सूरज, आज भी हरते, अँधेरा।

मगर मन का, हरे तम वो, दिया रौशन, कहाँ है?

वही सागर, वही नदियाँ, वही झरनों, की धारा।

करे जो कंठ तर सबके,

वो जल पावन, कहाँ है?

कहाँ पायल, की वो रुनझुन, कहाँ गीतों, की गुनगुन।

कहाँ वो चूड़ियाँ

खोईं, मधुर खनखन, कहाँ है?

सकल उपहार देती हैं,

सभी ऋतुएँ समय पर।

धरा सूखी है क्यों

फिर भी, हरित सावन कहाँ है?

भरे भंडार, भारत के, हुए क्यों, आज खाली।

बढ़ी क्यों भूख

बेकारी, गया वो धन कहाँ है?

अगर कमजोर है शासन, बताएँ कौन दोषी?

जो हल ढूँढे,

सवालों का, सजग वो जन, कहाँ है?

------कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

jise purakhon,

ne saunpaa thaa, wo apanaapan kahaan hai?

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jahaan sukh beej,

ropaa thaa, wo ghar aangan kahaan hai?

·

sitaare, chaand, sooraj, aaj bhee harate, andheraa

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magar man kaa, hare tam wo, diyaa raushan, kahaan hai?

·

wahee saagar, wahee nadiyaan, wahee jharanon, kee dhaaraa

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kare jo kanth tar sabake,

wo jal paawan, kahaan hai?

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kahaan paayal, kee wo runajhun, kahaan geeton, kee gunagun

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kahaan wo choodiyaan

khoeen, madhur khanakhan, kahaan hai?

·

sakal upahaar detee hain,

sabhee riituen samay par

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dharaa sookhee hai kyon

phir bhee, harit saawan kahaan hai?

·

bhare bhandaar, bhaarat ke, hue kyon, aaj khaalee

·

bढ़ee kyon bhookh

bekaaree, gayaa wo dhan kahaan hai?

·

agar kamajor hai shaasan, bataaen kaun doshee?

·

jo hal dhoondhe,

sawaalon kaa, sajag wo jan, kahaan hai?

·

------kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

जिसे पुरखों,

ने सौंपा था, वो अपनापन कहाँ है?

जहाँ सुख बीज,

रोपा था, वो घर आँगन कहाँ है?

सितारे, चाँद, सूरज, आज भी हरते, अँधेरा।

मगर मन का, हरे तम वो, दिया रौशन, कहाँ है?

वही सागर, वही नदियाँ, वही झरनों, की धारा।

करे जो कंठ तर सबके,

वो जल पावन, कहाँ है?

कहाँ पायल, की वो रुनझुन, कहाँ गीतों, की गुनगुन।

कहाँ वो चूड़ियाँ

खोईं, मधुर खनखन, कहाँ है?

सकल उपहार देती हैं,

सभी ऋतुएँ समय पर।

धरा सूखी है क्यों

फिर भी, हरित सावन कहाँ है?

भरे भंडार, भारत के, हुए क्यों, आज खाली।

बढ़ी क्यों भूख

बेकारी, गया वो धन कहाँ है?

अगर कमजोर है शासन, बताएँ कौन दोषी?

जो हल ढूँढे,

सवालों का, सजग वो जन, कहाँ है?

------कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗