कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ५१ / २०५ № 51 of 205 रचना ५१ / २०५
२२ जुलाई २०१४ 22 July 2014 २२ जुलाई २०१४

साथ तुम हो saath tum ho साथ तुम हो

हो चला हर दिन मधुरतम, साथ तुम हो।

॥

जा छिपा थक हारकर गम, साथ तुम हो।

॥

मृदु हुई हैं शूल सी चुभती हवाएँ,

॥

रस भरा है सारा आलम,

साथ तुम हो।

॥

खिल उठीं देखो अचानक बंद कलियाँ,

॥

कर रही सत्कार शबनम,

साथ तुम हो।

॥

फिर उगा सूरज सुनहरा ज़िंदगी में,

॥

गत हुआ कुहरे का मौसम, साथ तुम हो।

॥

बन चुके थे नैन नीरद जो हमारे,

॥

अब कभी होंगे न वे नम, साथ तुम हो।

॥

बाद मुद्दत चाँद पूनम का दिखा है,

॥

सिर झुका कर है खड़ा तम, साथ तुम हो।

॥

दीप फिर ऐसा जला बुझते हृदय में,

॥

तोड़ देंगी आँधियाँ दम, साथ तुम हो।

॥

इस जगत के बोझ बनते बंधनों से,

॥

‘कल्पना’ अब क्यों डरें हम, साथ तुम हो।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

ho chalaa har din madhuratam, saath tum ho

·

jaa chipaa thak haarakar gam, saath tum ho

·

mriidu huee hain shool see chubhatee hawaaen,

·

ras bharaa hai saaraa aalam,

saath tum ho

·

khil utheen dekho achaanak band kaliyaan,

·

kar rahee satkaar shabanam,

saath tum ho

·

phir ugaa sooraj sunaharaa zindagee men,

·

gat huaa kuhare kaa mausam, saath tum ho

·

ban chuke the nain neerad jo hamaare,

·

ab kabhee honge n we nam, saath tum ho

·

baad muddat chaand poonam kaa dikhaa hai,

·

sir jhukaa kar hai khadaa tam, saath tum ho

·

deep phir aisaa jalaa bujhate hriiday men,

·

tod dengee aandhiyaan dam, saath tum ho

·

is jagat ke bojh banate bandhanon se,

·

‘kalpanaa’ ab kyon daren ham, saath tum ho

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

हो चला हर दिन मधुरतम, साथ तुम हो।

॥

जा छिपा थक हारकर गम, साथ तुम हो।

॥

मृदु हुई हैं शूल सी चुभती हवाएँ,

॥

रस भरा है सारा आलम,

साथ तुम हो।

॥

खिल उठीं देखो अचानक बंद कलियाँ,

॥

कर रही सत्कार शबनम,

साथ तुम हो।

॥

फिर उगा सूरज सुनहरा ज़िंदगी में,

॥

गत हुआ कुहरे का मौसम, साथ तुम हो।

॥

बन चुके थे नैन नीरद जो हमारे,

॥

अब कभी होंगे न वे नम, साथ तुम हो।

॥

बाद मुद्दत चाँद पूनम का दिखा है,

॥

सिर झुका कर है खड़ा तम, साथ तुम हो।

॥

दीप फिर ऐसा जला बुझते हृदय में,

॥

तोड़ देंगी आँधियाँ दम, साथ तुम हो।

॥

इस जगत के बोझ बनते बंधनों से,

॥

‘कल्पना’ अब क्यों डरें हम, साथ तुम हो।

॥

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗