कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ५० / २०४ № 50 of 204 रचना ५० / २०४
२२ जुलाई २०१४ 22 July 2014 २२ जुलाई २०१४

साथ तुम हो saath tum ho साथ तुम हो

हो चला हर दिन मधुरतम, साथ तुम हो।

जा छिपा थक हारकर गम, साथ तुम हो।

मृदु हुई हैं शूल सी चुभती हवाएँ,

रस भरा है सारा आलम,

साथ तुम हो।

खिल उठीं देखो अचानक बंद कलियाँ,

कर रही सत्कार शबनम,

साथ तुम हो।

फिर उगा सूरज सुनहरा ज़िंदगी में,

गत हुआ कुहरे का मौसम, साथ तुम हो।

बन चुके थे नैन नीरद जो हमारे,

अब कभी होंगे न वे नम, साथ तुम हो।

बाद मुद्दत चाँद पूनम का दिखा है,

सिर झुका कर है खड़ा तम, साथ तुम हो।

दीप फिर ऐसा जला बुझते हृदय में,

तोड़ देंगी आँधियाँ दम, साथ तुम हो।

इस जगत के बोझ बनते बंधनों से,

‘कल्पना’ अब क्यों डरें हम, साथ तुम हो।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

ho chalaa har din madhuratam, saath tum ho

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jaa chipaa thak haarakar gam, saath tum ho

·

mriidu huee hain shool see chubhatee hawaaen,

·

ras bharaa hai saaraa aalam,

saath tum ho

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khil utheen dekho achaanak band kaliyaan,

·

kar rahee satkaar shabanam,

saath tum ho

·

phir ugaa sooraj sunaharaa zindagee men,

·

gat huaa kuhare kaa mausam, saath tum ho

·

ban chuke the nain neerad jo hamaare,

·

ab kabhee honge n we nam, saath tum ho

·

baad muddat chaand poonam kaa dikhaa hai,

·

sir jhukaa kar hai khadaa tam, saath tum ho

·

deep phir aisaa jalaa bujhate hriiday men,

·

tod dengee aandhiyaan dam, saath tum ho

·

is jagat ke bojh banate bandhanon se,

·

‘kalpanaa’ ab kyon daren ham, saath tum ho

·

-kalpanaa raamaanee

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protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

हो चला हर दिन मधुरतम, साथ तुम हो।

जा छिपा थक हारकर गम, साथ तुम हो।

मृदु हुई हैं शूल सी चुभती हवाएँ,

रस भरा है सारा आलम,

साथ तुम हो।

खिल उठीं देखो अचानक बंद कलियाँ,

कर रही सत्कार शबनम,

साथ तुम हो।

फिर उगा सूरज सुनहरा ज़िंदगी में,

गत हुआ कुहरे का मौसम, साथ तुम हो।

बन चुके थे नैन नीरद जो हमारे,

अब कभी होंगे न वे नम, साथ तुम हो।

बाद मुद्दत चाँद पूनम का दिखा है,

सिर झुका कर है खड़ा तम, साथ तुम हो।

दीप फिर ऐसा जला बुझते हृदय में,

तोड़ देंगी आँधियाँ दम, साथ तुम हो।

इस जगत के बोझ बनते बंधनों से,

‘कल्पना’ अब क्यों डरें हम, साथ तुम हो।

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗