कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५१ / ६७ № 51 of 67 रचना ५१ / ६७
१० जुलाई २०१४ 10 July 2014 १० जुलाई २०१४

मंगल-वर्षा ज्यों गिरी mangal-warshaa jyon giree मंगल-वर्षा ज्यों गिरी

मंगल-वर्षा ज्यों गिरी, मुदित हुआ

संसार।

॥

जन-जन मन की तल्खियाँ, बहा ले गई

धार।

॥

भीगी भीगी शाम से, हर्षित तन,मन,रोम।

॥

इन्द्र धनुष सहसा दिखा, सजा रंग से

व्योम।

॥

आँख मिचौनी सूर्य की, देख बादलों

संग।

॥

खेल रचाकर हो रही, कुदरत खुद

ही दंग।

॥

बौछारों की बाढ़ से, जल-थल हुए

समान।

॥

जल स्रोतों ने पग बढ़ा, छुए नए

सोपान।

॥

शिखरों को छूने बढ़े, बादल बाँह

पसार।

mangal-warshaa jyon giree, mudit huaa

sansaar

·

jan-jan man kee talkhiyaan, bahaa le gaee

dhaar

·

bheegee bheegee shaam se, harshit tan,man,rom

·

indr dhanush sahasaa dikhaa, sajaa rang se

wyom

·

aankh michaunee soory kee, dekh baadalon

sang

·

khel rachaakar ho rahee, kudarat khud

hee dang

·

bauchaaron kee baaढ़ se, jal-thal hue

samaan

·

jal sroton ne pag bढ़aa, chue nae

sopaan

·

shikharon ko choone bढ़e, baadal baanh

pasaar

मंगल-वर्षा ज्यों गिरी, मुदित हुआ

संसार।

॥

जन-जन मन की तल्खियाँ, बहा ले गई

धार।

॥

भीगी भीगी शाम से, हर्षित तन,मन,रोम।

॥

इन्द्र धनुष सहसा दिखा, सजा रंग से

व्योम।

॥

आँख मिचौनी सूर्य की, देख बादलों

संग।

॥

खेल रचाकर हो रही, कुदरत खुद

ही दंग।

॥

बौछारों की बाढ़ से, जल-थल हुए

समान।

॥

जल स्रोतों ने पग बढ़ा, छुए नए

सोपान।

॥

शिखरों को छूने बढ़े, बादल बाँह

पसार।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗