मंगल-वर्षा ज्यों गिरी mangal-warshaa jyon giree मंगल-वर्षा ज्यों गिरी
मंगल-वर्षा ज्यों गिरी, मुदित हुआ
संसार।
जन-जन मन की तल्खियाँ, बहा ले गई
धार।
भीगी भीगी शाम से, हर्षित तन,मन,रोम।
इन्द्र धनुष सहसा दिखा, सजा रंग से
व्योम।
आँख मिचौनी सूर्य की, देख बादलों
संग।
खेल रचाकर हो रही, कुदरत खुद
ही दंग।
बौछारों की बाढ़ से, जल-थल हुए
समान।
जल स्रोतों ने पग बढ़ा, छुए नए
सोपान।
शिखरों को छूने बढ़े, बादल बाँह
पसार।
mangal-warshaa jyon giree, mudit huaa
sansaar
jan-jan man kee talkhiyaan, bahaa le gaee
dhaar
bheegee bheegee shaam se, harshit tan,man,rom
indr dhanush sahasaa dikhaa, sajaa rang se
wyom
aankh michaunee soory kee, dekh baadalon
sang
khel rachaakar ho rahee, kudarat khud
hee dang
bauchaaron kee baaढ़ se, jal-thal hue
samaan
jal sroton ne pag bढ़aa, chue nae
sopaan
shikharon ko choone bढ़e, baadal baanh
pasaar
मंगल-वर्षा ज्यों गिरी, मुदित हुआ
संसार।
जन-जन मन की तल्खियाँ, बहा ले गई
धार।
भीगी भीगी शाम से, हर्षित तन,मन,रोम।
इन्द्र धनुष सहसा दिखा, सजा रंग से
व्योम।
आँख मिचौनी सूर्य की, देख बादलों
संग।
खेल रचाकर हो रही, कुदरत खुद
ही दंग।
बौछारों की बाढ़ से, जल-थल हुए
समान।
जल स्रोतों ने पग बढ़ा, छुए नए
सोपान।
शिखरों को छूने बढ़े, बादल बाँह
पसार।