कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ४८ / ६५ № 48 of 65 रचना ४८ / ६५
५ जुलाई २०१४ 5 July 2014 ५ जुलाई २०१४

सार छंद-छन्न पकैया,उड़े रंग के बादल saar chand-chann pakaiyaa,ude rang ke baadal सार छंद-छन्न पकैया,उड़े रंग के बादल

छन्न पकैया, छन्न पकैया, उड़े रंग के बादल।

पीत, गुलाबी, लाल हुआ है, वसुंधरा का आँचल।

छन्न पकैया, छन्न पकैया, यह ऋतु सबको भाई।

भँवरों की मनुहार देखकर, कली-कली इतराई।

छन्न पकैया, छन्न पकैया, गुमीं घटाएँ तम की।

देख रही है जलती होली, जाग रात पूनम की।

छन्न पकैया, छन्न पकैया, वन पलाश फिर दहके।

रंग सुनहरा देख गगन में, उड़ते पाखी बहके।

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chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, ude rang ke baadal

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peet, gulaabee, laal huaa hai, wasundharaa kaa aanchal

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chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, yah riitu sabako bhaaee

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bhanvaron kee manuhaar dekhakar, kalee-kalee itaraaee

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chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, gumeen ghataaen tam kee

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dekh rahee hai jalatee holee, jaag raat poonam kee

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chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, wan palaash phir dahake

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rang sunaharaa dekh gagan men, udate paakhee bahake

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छन्न पकैया, छन्न पकैया, उड़े रंग के बादल।

पीत, गुलाबी, लाल हुआ है, वसुंधरा का आँचल।

छन्न पकैया, छन्न पकैया, यह ऋतु सबको भाई।

भँवरों की मनुहार देखकर, कली-कली इतराई।

छन्न पकैया, छन्न पकैया, गुमीं घटाएँ तम की।

देख रही है जलती होली, जाग रात पूनम की।

छन्न पकैया, छन्न पकैया, वन पलाश फिर दहके।

रंग सुनहरा देख गगन में, उड़ते पाखी बहके।

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कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗