सार छंद-छन्न पकैया,उड़े रंग के बादल saar chand-chann pakaiyaa,ude rang ke baadal सार छंद-छन्न पकैया,उड़े रंग के बादल
छन्न पकैया, छन्न पकैया, उड़े रंग के बादल।
पीत, गुलाबी, लाल हुआ है, वसुंधरा का आँचल।
छन्न पकैया, छन्न पकैया, यह ऋतु सबको भाई।
भँवरों की मनुहार देखकर, कली-कली इतराई।
छन्न पकैया, छन्न पकैया, गुमीं घटाएँ तम की।
देख रही है जलती होली, जाग रात पूनम की।
छन्न पकैया, छन्न पकैया, वन पलाश फिर दहके।
रंग सुनहरा देख गगन में, उड़ते पाखी बहके।
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chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, ude rang ke baadal
peet, gulaabee, laal huaa hai, wasundharaa kaa aanchal
chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, yah riitu sabako bhaaee
bhanvaron kee manuhaar dekhakar, kalee-kalee itaraaee
chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, gumeen ghataaen tam kee
dekh rahee hai jalatee holee, jaag raat poonam kee
chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, wan palaash phir dahake
rang sunaharaa dekh gagan men, udate paakhee bahake
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छन्न पकैया, छन्न पकैया, उड़े रंग के बादल।
पीत, गुलाबी, लाल हुआ है, वसुंधरा का आँचल।
छन्न पकैया, छन्न पकैया, यह ऋतु सबको भाई।
भँवरों की मनुहार देखकर, कली-कली इतराई।
छन्न पकैया, छन्न पकैया, गुमीं घटाएँ तम की।
देख रही है जलती होली, जाग रात पूनम की।
छन्न पकैया, छन्न पकैया, वन पलाश फिर दहके।
रंग सुनहरा देख गगन में, उड़ते पाखी बहके।
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