कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ४९ / ६७ № 49 of 67 रचना ४९ / ६७
५ जुलाई २०१४ 5 July 2014 ५ जुलाई २०१४

सार छंद-छन्न पकैया,उड़े रंग के बादल saar chand-chann pakaiyaa,ude rang ke baadal सार छंद-छन्न पकैया,उड़े रंग के बादल

छन्न पकैया, छन्न पकैया, उड़े रंग के बादल।

॥

पीत, गुलाबी, लाल हुआ है, वसुंधरा का आँचल।

॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, यह ऋतु सबको भाई।

॥

भँवरों की मनुहार देखकर, कली-कली इतराई।

॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, गुमीं घटाएँ तम की।

॥

देख रही है जलती होली, जाग रात पूनम की।

॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, वन पलाश फिर दहके।

॥

रंग सुनहरा देख गगन में, उड़ते पाखी बहके।

॥

&

chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, ude rang ke baadal

·

peet, gulaabee, laal huaa hai, wasundharaa kaa aanchal

·

chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, yah riitu sabako bhaaee

·

bhanvaron kee manuhaar dekhakar, kalee-kalee itaraaee

·

chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, gumeen ghataaen tam kee

·

dekh rahee hai jalatee holee, jaag raat poonam kee

·

chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, wan palaash phir dahake

·

rang sunaharaa dekh gagan men, udate paakhee bahake

·

&

छन्न पकैया, छन्न पकैया, उड़े रंग के बादल।

॥

पीत, गुलाबी, लाल हुआ है, वसुंधरा का आँचल।

॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, यह ऋतु सबको भाई।

॥

भँवरों की मनुहार देखकर, कली-कली इतराई।

॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, गुमीं घटाएँ तम की।

॥

देख रही है जलती होली, जाग रात पूनम की।

॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, वन पलाश फिर दहके।

॥

रंग सुनहरा देख गगन में, उड़ते पाखी बहके।

॥

&

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗