कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २५ / ६७ № 25 of 67 रचना २५ / ६७
१४ अगस्त २०१३ 14 August 2013 १४ अगस्त २०१३

बूँद-बूँद अनमोल boond-boond anamol बूँद-बूँद अनमोल

जल बरबाद न कीजिये, जानें इसका मोल।

॥

सोच समझ नल खोलिए, बूँद-बूँद अनमोल।

॥

क्या रह सकते हम कभी, बिन पानी दिन एक?

॥

खुद से उत्तर माँगिए, करके प्रश्न अनेक।

॥

बादल रूठे जब हुआ, पानी अंतर्ध्यान।

॥

बूँदों की खातिर किए, यज्ञ, हवन, तप, दान।

॥

जल बिन रूखे भोज्य हैं, जल बिन कैसा राज।

॥

रक्षण एक उपाय ही, समाधान है आज।

॥

जल के

jal barabaad n keejiye, jaanen isakaa mol

·

soch samajh nal kholie, boond-boond anamol

·

kyaa rah sakate ham kabhee, bin paanee din ek?

·

khud se uttar maangie, karake prashn anek

·

baadal roothe jab huaa, paanee antardhyaan

·

boondon kee khaatir kie, yajn, hawan, tap, daan

·

jal bin rookhe bhojy hain, jal bin kaisaa raaj

·

rakshan ek upaay hee, samaadhaan hai aaj

·

jal ke

जल बरबाद न कीजिये, जानें इसका मोल।

॥

सोच समझ नल खोलिए, बूँद-बूँद अनमोल।

॥

क्या रह सकते हम कभी, बिन पानी दिन एक?

॥

खुद से उत्तर माँगिए, करके प्रश्न अनेक।

॥

बादल रूठे जब हुआ, पानी अंतर्ध्यान।

॥

बूँदों की खातिर किए, यज्ञ, हवन, तप, दान।

॥

जल बिन रूखे भोज्य हैं, जल बिन कैसा राज।

॥

रक्षण एक उपाय ही, समाधान है आज।

॥

जल के

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗