कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५४ / १६४ № 154 of 164 रचना १५४ / १६४
१७ दिसम्बर २०१९ 17 December 2019 १७ दिसम्बर २०१९

नए साल ने कहा नमस्ते nae saal ne kahaa namaste नए साल ने कहा नमस्ते

नए

साल ने कहा नमस्ते

॥

बजी

भुवन में चैन

॥

बाँसुरी।

॥

बना

क्रूर कोहरा हमजोली

॥

जाग

उठा जगती का कण-कण

॥

नवांकुरों

ने पलकें खोलीं

॥

पुष्प-पुष्प

में हुआ परागण

॥

सूरज

आया हँसते-हँसते

॥

बाँटी

भर-भर धूप-

॥

अंजुरी।

॥

पुरवा, द्वार दुआ ले आई

॥

टलीं

बलाएँ क्रूर-काल की

॥

सजल-नयन

कर विदा विगत को

॥

सजी

सवारी नए साल की

॥

बढ़े

खल-कदम भी शुभ रस्ते

॥

छोड़

सनातन वृत्ति

॥

आसुरी।

॥

खेत

और खलिहानों

nae

saal ne kahaa namaste

·

bajee

bhuwan men chain

·

baansuree

·

banaa

kroor koharaa hamajolee

·

jaag

uthaa jagatee kaa kan-kan

·

nawaankuron

ne palaken kholeen

·

pushp-pushp

men huaa paraagan

·

sooraj

aayaa hansate-hansate

·

baantee

bhar-bhar dhoop-

·

anjuree

·

purawaa, dvaar duaa le aaee

·

taleen

balaaen kroor-kaal kee

·

sajal-nayan

kar widaa wigat ko

·

sajee

sawaaree nae saal kee

·

bढ़e

khal-kadam bhee shubh raste

·

chod

sanaatan wriitti

·

aasuree

·

khet

aur khalihaanon

नए

साल ने कहा नमस्ते

॥

बजी

भुवन में चैन

॥

बाँसुरी।

॥

बना

क्रूर कोहरा हमजोली

॥

जाग

उठा जगती का कण-कण

॥

नवांकुरों

ने पलकें खोलीं

॥

पुष्प-पुष्प

में हुआ परागण

॥

सूरज

आया हँसते-हँसते

॥

बाँटी

भर-भर धूप-

॥

अंजुरी।

॥

पुरवा, द्वार दुआ ले आई

॥

टलीं

बलाएँ क्रूर-काल की

॥

सजल-नयन

कर विदा विगत को

॥

सजी

सवारी नए साल की

॥

बढ़े

खल-कदम भी शुभ रस्ते

॥

छोड़

सनातन वृत्ति

॥

आसुरी।

॥

खेत

और खलिहानों

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗