कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५३ / १६३ № 153 of 163 रचना १५३ / १६३
१७ दिसम्बर २०१९ 17 December 2019 १७ दिसम्बर २०१९

नए साल ने कहा नमस्ते nae saal ne kahaa namaste नए साल ने कहा नमस्ते

नए

साल ने कहा नमस्ते

बजी

भुवन में चैन

बाँसुरी।

बना

क्रूर कोहरा हमजोली

जाग

उठा जगती का कण-कण

नवांकुरों

ने पलकें खोलीं

पुष्प-पुष्प

में हुआ परागण

सूरज

आया हँसते-हँसते

बाँटी

भर-भर धूप-

अंजुरी।

पुरवा, द्वार दुआ ले आई

टलीं

बलाएँ क्रूर-काल की

सजल-नयन

कर विदा विगत को

सजी

सवारी नए साल की

बढ़े

खल-कदम भी शुभ रस्ते

छोड़

सनातन वृत्ति

आसुरी।

खेत

और खलिहानों

nae

saal ne kahaa namaste

·

bajee

bhuwan men chain

·

baansuree

·

banaa

kroor koharaa hamajolee

·

jaag

uthaa jagatee kaa kan-kan

·

nawaankuron

ne palaken kholeen

·

pushp-pushp

men huaa paraagan

·

sooraj

aayaa hansate-hansate

·

baantee

bhar-bhar dhoop-

·

anjuree

·

purawaa, dvaar duaa le aaee

·

taleen

balaaen kroor-kaal kee

·

sajal-nayan

kar widaa wigat ko

·

sajee

sawaaree nae saal kee

·

bढ़e

khal-kadam bhee shubh raste

·

chod

sanaatan wriitti

·

aasuree

·

khet

aur khalihaanon

नए

साल ने कहा नमस्ते

बजी

भुवन में चैन

बाँसुरी।

बना

क्रूर कोहरा हमजोली

जाग

उठा जगती का कण-कण

नवांकुरों

ने पलकें खोलीं

पुष्प-पुष्प

में हुआ परागण

सूरज

आया हँसते-हँसते

बाँटी

भर-भर धूप-

अंजुरी।

पुरवा, द्वार दुआ ले आई

टलीं

बलाएँ क्रूर-काल की

सजल-नयन

कर विदा विगत को

सजी

सवारी नए साल की

बढ़े

खल-कदम भी शुभ रस्ते

छोड़

सनातन वृत्ति

आसुरी।

खेत

और खलिहानों

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗