कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५३ / १६४ № 153 of 164 रचना १५३ / १६४
१७ दिसम्बर २०१९ 17 December 2019 १७ दिसम्बर २०१९

बरस बीता कह गया baras beetaa kah gayaa बरस बीता कह गया

विदा होकर जाते-जाते

॥

बरस बीता कह गया।

॥

नवल तुम वो पूर्ण करना

॥

जो नहीं मुझसे हुआ।

॥

गगन बेशक छुआ लेकिन

॥

देश अनदेखा किया।

॥

लोग रोटी माँगते थे

॥

चाँद लाकर दे दिया।

॥

बूँद रक्षण कर न पाया

॥

अमिय घट घटता गया।

॥

होश आया जब समय ने

॥

हाथ पकड़ा चल कहा।

॥

जंग

तुम अब छेडना

॥

इस

देश के जंजाल से

॥

हों न दीवारें प्रताड़ित

widaa hokar jaate-jaate

·

baras beetaa kah gayaa

·

nawal tum wo poorn karanaa

·

jo naheen mujhase huaa

·

gagan beshak chuaa lekin

·

desh anadekhaa kiyaa

·

log rotee maangate the

·

chaand laakar de diyaa

·

boond rakshan kar n paayaa

·

amiy ghat ghatataa gayaa

·

hosh aayaa jab samay ne

·

haath pakadaa chal kahaa

·

jang

tum ab chedanaa

·

is

desh ke janjaal se

·

hon n deewaaren prataadit

विदा होकर जाते-जाते

॥

बरस बीता कह गया।

॥

नवल तुम वो पूर्ण करना

॥

जो नहीं मुझसे हुआ।

॥

गगन बेशक छुआ लेकिन

॥

देश अनदेखा किया।

॥

लोग रोटी माँगते थे

॥

चाँद लाकर दे दिया।

॥

बूँद रक्षण कर न पाया

॥

अमिय घट घटता गया।

॥

होश आया जब समय ने

॥

हाथ पकड़ा चल कहा।

॥

जंग

तुम अब छेडना

॥

इस

देश के जंजाल से

॥

हों न दीवारें प्रताड़ित

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗