बरस बीता कह गया baras beetaa kah gayaa बरस बीता कह गया
विदा होकर जाते-जाते
बरस बीता कह गया।
नवल तुम वो पूर्ण करना
जो नहीं मुझसे हुआ।
गगन बेशक छुआ लेकिन
देश अनदेखा किया।
लोग रोटी माँगते थे
चाँद लाकर दे दिया।
बूँद रक्षण कर न पाया
अमिय घट घटता गया।
होश आया जब समय ने
हाथ पकड़ा चल कहा।
जंग
तुम अब छेडना
इस
देश के जंजाल से
हों न दीवारें प्रताड़ित
widaa hokar jaate-jaate
baras beetaa kah gayaa
nawal tum wo poorn karanaa
jo naheen mujhase huaa
gagan beshak chuaa lekin
desh anadekhaa kiyaa
log rotee maangate the
chaand laakar de diyaa
boond rakshan kar n paayaa
amiy ghat ghatataa gayaa
hosh aayaa jab samay ne
haath pakadaa chal kahaa
jang
tum ab chedanaa
is
desh ke janjaal se
hon n deewaaren prataadit
विदा होकर जाते-जाते
बरस बीता कह गया।
नवल तुम वो पूर्ण करना
जो नहीं मुझसे हुआ।
गगन बेशक छुआ लेकिन
देश अनदेखा किया।
लोग रोटी माँगते थे
चाँद लाकर दे दिया।
बूँद रक्षण कर न पाया
अमिय घट घटता गया।
होश आया जब समय ने
हाथ पकड़ा चल कहा।
जंग
तुम अब छेडना
इस
देश के जंजाल से
हों न दीवारें प्रताड़ित