कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ११ / १६४ № 11 of 164 रचना ११ / १६४
३ जनवरी २०१३ 3 January 2013 ३ जनवरी २०१३

नए साल के स्वागत में nae saal ke svaagat men नए साल के स्वागत में

नए साल के स्वागत में फिर,

॥

फिर से सौ सौ द्वार खुले।

॥

आया शीत चुनरिया ओढ़े,

॥

कोहरे के आलिंगन में।

॥

देश विदेश बंधे हैं सारे,

॥

एक जगह इक बंधन में।

॥

स्नेह ज्योत के दीपक लेकर,

॥

निकल पड़े सब रात ढले।

॥

शोर शराबे की महफिल में,

॥

डूब गई है दिशा दिशा।

॥

सूरज कैसे मुंह दिखलाए,

॥

जीती उससे आज निशा।

॥

बना रहे उत्साह हमेशा,

॥

यही दीप हर रात जले।

nae saal ke svaagat men phir,

·

phir se sau sau dvaar khule

·

aayaa sheet chunariyaa oढ़e,

·

kohare ke aalingan men

·

desh widesh bandhe hain saare,

·

ek jagah ik bandhan men

·

sneh jyot ke deepak lekar,

·

nikal pade sab raat dhale

·

shor sharaabe kee mahaphil men,

·

doob gaee hai dishaa dishaa

·

sooraj kaise munh dikhalaae,

·

jeetee usase aaj nishaa

·

banaa rahe utsaah hameshaa,

·

yahee deep har raat jale

नए साल के स्वागत में फिर,

॥

फिर से सौ सौ द्वार खुले।

॥

आया शीत चुनरिया ओढ़े,

॥

कोहरे के आलिंगन में।

॥

देश विदेश बंधे हैं सारे,

॥

एक जगह इक बंधन में।

॥

स्नेह ज्योत के दीपक लेकर,

॥

निकल पड़े सब रात ढले।

॥

शोर शराबे की महफिल में,

॥

डूब गई है दिशा दिशा।

॥

सूरज कैसे मुंह दिखलाए,

॥

जीती उससे आज निशा।

॥

बना रहे उत्साह हमेशा,

॥

यही दीप हर रात जले।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗