कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ११ / १६३ № 11 of 163 रचना ११ / १६३
३ जनवरी २०१३ 3 January 2013 ३ जनवरी २०१३

नए साल के स्वागत में nae saal ke svaagat men नए साल के स्वागत में

नए साल के स्वागत में फिर,

फिर से सौ सौ द्वार खुले।

आया शीत चुनरिया ओढ़े,

कोहरे के आलिंगन में।

देश विदेश बंधे हैं सारे,

एक जगह इक बंधन में।

स्नेह ज्योत के दीपक लेकर,

निकल पड़े सब रात ढले।

शोर शराबे की महफिल में,

डूब गई है दिशा दिशा।

सूरज कैसे मुंह दिखलाए,

जीती उससे आज निशा।

बना रहे उत्साह हमेशा,

यही दीप हर रात जले।

nae saal ke svaagat men phir,

·

phir se sau sau dvaar khule

·

aayaa sheet chunariyaa oढ़e,

·

kohare ke aalingan men

·

desh widesh bandhe hain saare,

·

ek jagah ik bandhan men

·

sneh jyot ke deepak lekar,

·

nikal pade sab raat dhale

·

shor sharaabe kee mahaphil men,

·

doob gaee hai dishaa dishaa

·

sooraj kaise munh dikhalaae,

·

jeetee usase aaj nishaa

·

banaa rahe utsaah hameshaa,

·

yahee deep har raat jale

नए साल के स्वागत में फिर,

फिर से सौ सौ द्वार खुले।

आया शीत चुनरिया ओढ़े,

कोहरे के आलिंगन में।

देश विदेश बंधे हैं सारे,

एक जगह इक बंधन में।

स्नेह ज्योत के दीपक लेकर,

निकल पड़े सब रात ढले।

शोर शराबे की महफिल में,

डूब गई है दिशा दिशा।

सूरज कैसे मुंह दिखलाए,

जीती उससे आज निशा।

बना रहे उत्साह हमेशा,

यही दीप हर रात जले।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗