नए साल के स्वागत में nae saal ke svaagat men नए साल के स्वागत में
नए साल के स्वागत में फिर,
फिर से सौ सौ द्वार खुले।
आया शीत चुनरिया ओढ़े,
कोहरे के आलिंगन में।
देश विदेश बंधे हैं सारे,
एक जगह इक बंधन में।
स्नेह ज्योत के दीपक लेकर,
निकल पड़े सब रात ढले।
शोर शराबे की महफिल में,
डूब गई है दिशा दिशा।
सूरज कैसे मुंह दिखलाए,
जीती उससे आज निशा।
बना रहे उत्साह हमेशा,
यही दीप हर रात जले।
nae saal ke svaagat men phir,
phir se sau sau dvaar khule
aayaa sheet chunariyaa oढ़e,
kohare ke aalingan men
desh widesh bandhe hain saare,
ek jagah ik bandhan men
sneh jyot ke deepak lekar,
nikal pade sab raat dhale
shor sharaabe kee mahaphil men,
doob gaee hai dishaa dishaa
sooraj kaise munh dikhalaae,
jeetee usase aaj nishaa
banaa rahe utsaah hameshaa,
yahee deep har raat jale
नए साल के स्वागत में फिर,
फिर से सौ सौ द्वार खुले।
आया शीत चुनरिया ओढ़े,
कोहरे के आलिंगन में।
देश विदेश बंधे हैं सारे,
एक जगह इक बंधन में।
स्नेह ज्योत के दीपक लेकर,
निकल पड़े सब रात ढले।
शोर शराबे की महफिल में,
डूब गई है दिशा दिशा।
सूरज कैसे मुंह दिखलाए,
जीती उससे आज निशा।
बना रहे उत्साह हमेशा,
यही दीप हर रात जले।