उत्तर अंतर्ध्यान हो गए uttar antardhyaan ho gae उत्तर अंतर्ध्यान हो गए
उत्तर अंतर्ध्यान हो गए
ढूँढ रहा यह खोजी मन।
आविष्कार हुए बहुतेरे
तीनों लोक खँगाले गए।
कल-पुर्जों से धरा भर गई
भरे न पेट,
निवाले गए।
दीपक तो हर छोर जल रहे
पर किस ओर उजाले गए?
किसने अंजुलि भर हाथों से
किया देश हित का तर्पण?
किसने काटे पर चिड़िया के
डाली डाली पूछ रही।
किसके उदर समाया सोना
क्यों अब तक है भूख वही।
कहाँ गए भंडार धान्य के
uttar antardhyaan ho gae
dhoondh rahaa yah khojee man
aawishkaar hue bahutere
teenon lok khangaale gae
kal-purjon se dharaa bhar gaee
bhare n pet,
niwaale gae
deepak to har chor jal rahe
par kis or ujaale gae?
kisane anjuli bhar haathon se
kiyaa desh hit kaa tarpan?
kisane kaate par chidiyaa ke
daalee daalee pooch rahee
kisake udar samaayaa sonaa
kyon ab tak hai bhookh wahee
kahaan gae bhandaar dhaany ke
उत्तर अंतर्ध्यान हो गए
ढूँढ रहा यह खोजी मन।
आविष्कार हुए बहुतेरे
तीनों लोक खँगाले गए।
कल-पुर्जों से धरा भर गई
भरे न पेट,
निवाले गए।
दीपक तो हर छोर जल रहे
पर किस ओर उजाले गए?
किसने अंजुलि भर हाथों से
किया देश हित का तर्पण?
किसने काटे पर चिड़िया के
डाली डाली पूछ रही।
किसके उदर समाया सोना
क्यों अब तक है भूख वही।
कहाँ गए भंडार धान्य के