कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ८६ / १६४ № 86 of 164 रचना ८६ / १६४
७ दिसम्बर २०१४ 7 December 2014 ७ दिसम्बर २०१४

उत्तर अंतर्ध्यान हो गए uttar antardhyaan ho gae उत्तर अंतर्ध्यान हो गए

उत्तर अंतर्ध्यान हो गए

॥

ढूँढ रहा यह खोजी मन।

॥

आविष्कार हुए बहुतेरे

॥

तीनों लोक खँगाले गए।

॥

कल-पुर्जों से धरा भर गई

॥

भरे न पेट,

निवाले गए।

॥

दीपक तो हर छोर जल रहे

॥

पर किस ओर उजाले गए?

॥

किसने अंजुलि भर हाथों से

॥

किया देश हित का तर्पण?

॥

किसने काटे पर चिड़िया के

॥

डाली डाली पूछ रही।

॥

किसके उदर समाया सोना

॥

क्यों अब तक है भूख वही।

॥

कहाँ गए भंडार धान्य के

uttar antardhyaan ho gae

·

dhoondh rahaa yah khojee man

·

aawishkaar hue bahutere

·

teenon lok khangaale gae

·

kal-purjon se dharaa bhar gaee

·

bhare n pet,

niwaale gae

·

deepak to har chor jal rahe

·

par kis or ujaale gae?

·

kisane anjuli bhar haathon se

·

kiyaa desh hit kaa tarpan?

·

kisane kaate par chidiyaa ke

·

daalee daalee pooch rahee

·

kisake udar samaayaa sonaa

·

kyon ab tak hai bhookh wahee

·

kahaan gae bhandaar dhaany ke

उत्तर अंतर्ध्यान हो गए

॥

ढूँढ रहा यह खोजी मन।

॥

आविष्कार हुए बहुतेरे

॥

तीनों लोक खँगाले गए।

॥

कल-पुर्जों से धरा भर गई

॥

भरे न पेट,

निवाले गए।

॥

दीपक तो हर छोर जल रहे

॥

पर किस ओर उजाले गए?

॥

किसने अंजुलि भर हाथों से

॥

किया देश हित का तर्पण?

॥

किसने काटे पर चिड़िया के

॥

डाली डाली पूछ रही।

॥

किसके उदर समाया सोना

॥

क्यों अब तक है भूख वही।

॥

कहाँ गए भंडार धान्य के

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗