भोर का तारा bhor kaa taaraa भोर का तारा
अल सुबह देखा था मैंने भोर का तारा।
वह फ़लक पर था अकेला फूल सा तारा।
झाँक खिड़की से निहारा प्यार से मुझको
मौन मन कुछ कर इशारा बढ़ गया तारा।
छोड़ आलस, त्याग बिस्तर जब पुनः देखा
अब वहाँ से हट गया था मनचला तारा।
जल्दी-जल्दी, मैं उतरकर आ गई पथ पर
मुस्कुराकर साथ मेरे चल पड़ा तारा।
ज्यों सलोनी सूर्य किरणें छा गईं नभ में
आसमाँ के अंक में छिपने लगा तारा।
रह गई विस्मित उसे मैं देखकर ढलते
मौन होकर रह गया था चुलबुला तारा।
काश! हर प्रातः दिखे सूनी सी खिड़की से
दे सदा ऊर्जस्विता जीवन भरा तारा।
al subah dekhaa thaa mainne bhor kaa taaraa
wah falak par thaa akelaa phool saa taaraa
jhaank khidakee se nihaaraa pyaar se mujhako
maun man kuch kar ishaaraa bढ़ gayaa taaraa
chod aalas, tyaag bistar jab punah dekhaa
ab wahaan se hat gayaa thaa manachalaa taaraa
jaldee-jaldee, main utarakar aa gaee path par
muskuraakar saath mere chal padaa taaraa
jyon salonee soory kiranen chaa gaeen nabh men
aasamaan ke ank men chipane lagaa taaraa
rah gaee wismit use main dekhakar dhalate
maun hokar rah gayaa thaa chulabulaa taaraa
kaash! har praatah dikhe soonee see khidakee se
de sadaa oorjasvitaa jeewan bharaa taaraa
अल सुबह देखा था मैंने भोर का तारा।
वह फ़लक पर था अकेला फूल सा तारा।
झाँक खिड़की से निहारा प्यार से मुझको
मौन मन कुछ कर इशारा बढ़ गया तारा।
छोड़ आलस, त्याग बिस्तर जब पुनः देखा
अब वहाँ से हट गया था मनचला तारा।
जल्दी-जल्दी, मैं उतरकर आ गई पथ पर
मुस्कुराकर साथ मेरे चल पड़ा तारा।
ज्यों सलोनी सूर्य किरणें छा गईं नभ में
आसमाँ के अंक में छिपने लगा तारा।
रह गई विस्मित उसे मैं देखकर ढलते
मौन होकर रह गया था चुलबुला तारा।
काश! हर प्रातः दिखे सूनी सी खिड़की से
दे सदा ऊर्जस्विता जीवन भरा तारा।