कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ११८ / २०४ № 118 of 204 रचना ११८ / २०४
२४ मार्च २०१६ 24 March 2016 २४ मार्च २०१६

भीगा हुआ फागुन सखी bheegaa huaa phaagun sakhee भीगा हुआ फागुन सखी

रंग

लाए व्योम से भीगा हुआ फागुन सखी।

भूमि

पर हर जीव से हँसकर मिला फागुन सखी।

ऋतु

रँगीली,

मन

नशीला,

भंग

का प्याला लिए

पाँव

घुँघरू बाँधकर,

बहका

रहा फागुन सखी।

वन-पलाशों

में रचाईं धूप ने रंगोलियाँ

विहग

वृंदों,

चौपदों

का मन हुआ फागुन सखी।

उर

उमंगें हैं उमंगित, जी जनों का झूम उठा

छप्परों-छानों-छतों

पर,

छा

गया फागुन सखी।

आम

रस चखने चली अमराइयों में कोकिला

कूक

की उसकी अदा पर,

है

फिदा फागुन सखी

हो

रही घर घर में पूजा होलिका की रीत से

“कल्पना” संदेश देता जीत का फागुन सखी

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

rang

laae wyom se bheegaa huaa phaagun sakhee

·

bhoomi

par har jeew se hansakar milaa phaagun sakhee

·

riitu

rangeelee,

man

nasheelaa,

bhang

kaa pyaalaa lie

·

paanv

ghungharoo baandhakar,

bahakaa

rahaa phaagun sakhee

·

wan-palaashon

men rachaaeen dhoop ne rangoliyaan

·

wihag

wriindon,

chaupadon

kaa man huaa phaagun sakhee

·

ur

umangen hain umangit, jee janon kaa jhoom uthaa

·

chapparon-chaanon-chaton

par,

chaa

gayaa phaagun sakhee

·

aam

ras chakhane chalee amaraaiyon men kokilaa

·

kook

kee usakee adaa par,

hai

phidaa phaagun sakhee

·

ho

rahee ghar ghar men poojaa holikaa kee reet se

·

“kalpanaa” sandesh detaa jeet kaa phaagun sakhee

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

रंग

लाए व्योम से भीगा हुआ फागुन सखी।

भूमि

पर हर जीव से हँसकर मिला फागुन सखी।

ऋतु

रँगीली,

मन

नशीला,

भंग

का प्याला लिए

पाँव

घुँघरू बाँधकर,

बहका

रहा फागुन सखी।

वन-पलाशों

में रचाईं धूप ने रंगोलियाँ

विहग

वृंदों,

चौपदों

का मन हुआ फागुन सखी।

उर

उमंगें हैं उमंगित, जी जनों का झूम उठा

छप्परों-छानों-छतों

पर,

छा

गया फागुन सखी।

आम

रस चखने चली अमराइयों में कोकिला

कूक

की उसकी अदा पर,

है

फिदा फागुन सखी

हो

रही घर घर में पूजा होलिका की रीत से

“कल्पना” संदेश देता जीत का फागुन सखी

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗