कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ६१ / २०५ № 61 of 205 रचना ६१ / २०५
६ नवम्बर २०१४ 6 November 2014 ६ नवम्बर २०१४

मंज़िलें आगे खड़ी हैं manzilen aage khadee hain मंज़िलें आगे खड़ी हैं

मंज़िलें आगे खड़ी हैं, चल पड़ें, रुकना नहीं।

॥

मुश्किलों के खौफ से, पीछे हटें अच्छा नहीं।

॥

राह जो बाधा बने, उस पर विजय पुल बाँध लें

॥

जो इरादों पर अटल है, वो कभी हारा नहीं।

॥

धन गया, साथी गए, सब दूर अपने भी हुए

॥

दृढ़ इरादे साथ हैं तो, जान कुछ खोया नहीं।

॥

कोसते हैं भाग्य को जो, कर्म से मुँह मोड़कर

॥

फल की चाहत किसलिए, जब बीज ही बोया नहीं।

॥

व्यर्थ पिंजर में पड़े जो, पर कटे पंछी बने

॥

क्यों मिले आकाश जब, उड़ना कभी चाहा नहीं।

॥

ज़िक्र उसका अंजुमन में, किस तरह होगा भला

॥

जब गजल का व्याकरण ही, आज तक सीखा नहीं।

॥

ज़िंदगी का राज़ क्या है, क्या करेंगे जानकर

॥

क्यों मिला मानुष जनम जब, “कल्पना” जाना नहीं।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

manzilen aage khadee hain, chal paden, rukanaa naheen

·

mushkilon ke khauph se, peeche haten achchaa naheen

·

raah jo baadhaa bane, us par wijay pul baandh len

·

jo iraadon par atal hai, wo kabhee haaraa naheen

·

dhan gayaa, saathee gae, sab door apane bhee hue

·

driiढ़ iraade saath hain to, jaan kuch khoyaa naheen

·

kosate hain bhaagy ko jo, karm se munh modakar

·

phal kee chaahat kisalie, jab beej hee boyaa naheen

·

wyarth pinjar men pade jo, par kate panchee bane

·

kyon mile aakaash jab, udanaa kabhee chaahaa naheen

·

zikr usakaa anjuman men, kis tarah hogaa bhalaa

·

jab gajal kaa wyaakaran hee, aaj tak seekhaa naheen

·

zindagee kaa raaz kyaa hai, kyaa karenge jaanakar

·

kyon milaa maanush janam jab, “kalpanaa” jaanaa naheen

·

-kalpanaa raamaanee

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protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

मंज़िलें आगे खड़ी हैं, चल पड़ें, रुकना नहीं।

॥

मुश्किलों के खौफ से, पीछे हटें अच्छा नहीं।

॥

राह जो बाधा बने, उस पर विजय पुल बाँध लें

॥

जो इरादों पर अटल है, वो कभी हारा नहीं।

॥

धन गया, साथी गए, सब दूर अपने भी हुए

॥

दृढ़ इरादे साथ हैं तो, जान कुछ खोया नहीं।

॥

कोसते हैं भाग्य को जो, कर्म से मुँह मोड़कर

॥

फल की चाहत किसलिए, जब बीज ही बोया नहीं।

॥

व्यर्थ पिंजर में पड़े जो, पर कटे पंछी बने

॥

क्यों मिले आकाश जब, उड़ना कभी चाहा नहीं।

॥

ज़िक्र उसका अंजुमन में, किस तरह होगा भला

॥

जब गजल का व्याकरण ही, आज तक सीखा नहीं।

॥

ज़िंदगी का राज़ क्या है, क्या करेंगे जानकर

॥

क्यों मिला मानुष जनम जब, “कल्पना” जाना नहीं।

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-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗