हम सेवा मुक्त होते ही क्या-क्या न बन गए ham sewaa mukt hote hee kyaa-kyaa n ban gae हम सेवा मुक्त होते ही क्या-क्या न बन गए
हम
सेवा-मुक्त होते ही क्या-क्या न बन गए।
अपने
ही घर के द्वार के दरबान बन गए।
पूँजी
लुटा दी प्यार में,
कल तक जुटाई जो,
कोने
में अब पड़े हुए सामान बन गए।
बरगद
थे छाँव वाले कि वे आँधियाँ चलीं
छोड़ा
जड़ों ने साथ यों,
बेजान बन गए।
सोचा
तो था कि दोस्त सभी होंगे आस-पास
पर
जानते थे जो, वे भी अंजान बन गए।
होके
पराया चल दिया, अपना ही साया भी,
तन्हाइयों
में घुल चुकी, पहचान बन गए।
मझधार
से तो जूझके आए थे हम मगर,
सीने
को तान, तीर पे तूफान बन गए।
मन
में तो है सवाल ये भी ‘कल्पना’ अहम
हम
जानते हुए भी क्यों, नादान बन गए।
--कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
ham
sewaa-mukt hote hee kyaa-kyaa n ban gae
apane
hee ghar ke dvaar ke darabaan ban gae
poonjee
lutaa dee pyaar men,
kal tak jutaaee jo,
kone
men ab pade hue saamaan ban gae
baragad
the chaanv waale ki we aandhiyaan chaleen
chodaa
jadon ne saath yon,
bejaan ban gae
sochaa
to thaa ki dost sabhee honge aas-paas
par
jaanate the jo, we bhee anjaan ban gae
hoke
paraayaa chal diyaa, apanaa hee saayaa bhee,
tanhaaiyon
men ghul chukee, pahachaan ban gae
majhadhaar
se to joojhake aae the ham magar,
seene
ko taan, teer pe toophaan ban gae
man
men to hai sawaal ye bhee ‘kalpanaa’ aham
ham
jaanate hue bhee kyon, naadaan ban gae
--kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
हम
सेवा-मुक्त होते ही क्या-क्या न बन गए।
अपने
ही घर के द्वार के दरबान बन गए।
पूँजी
लुटा दी प्यार में,
कल तक जुटाई जो,
कोने
में अब पड़े हुए सामान बन गए।
बरगद
थे छाँव वाले कि वे आँधियाँ चलीं
छोड़ा
जड़ों ने साथ यों,
बेजान बन गए।
सोचा
तो था कि दोस्त सभी होंगे आस-पास
पर
जानते थे जो, वे भी अंजान बन गए।
होके
पराया चल दिया, अपना ही साया भी,
तन्हाइयों
में घुल चुकी, पहचान बन गए।
मझधार
से तो जूझके आए थे हम मगर,
सीने
को तान, तीर पे तूफान बन गए।
मन
में तो है सवाल ये भी ‘कल्पना’ अहम
हम
जानते हुए भी क्यों, नादान बन गए।
--कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी