सखी री दीप जला sakhee ree deep jalaa सखी री दीप जला
कर
सोलह शृंगार, सखी री दीप जला।
पावन
है त्यौहार, सखी री दीप जला।
तम-विभावरी, झिलमिला रही, पूनम सी।
ज्योतित
है संसार, सखी री दीप जला।
भाव
भावना, पूर्ण अल्पना, शोभित हो।
बाँधो
वंदनवार, सखी री दीप जला।
रिद्धि-सिद्धि
के सुख-समृद्धि के,
द्वार खुलें।
घर-घर
पनपे प्यार, सखी री दीप जला।
पद्मवासिनी, वरदा लक्ष्मी, द्वार खड़ी।
कर
स्वागत सत्कार, सखी री दीप जला।
धैर्य-ध्यान
से, विधि विधान से, कर-पूजन।
मंगल
मंत्र उचार, सखी री दीप जला।
सतत
साल भर, हों प्रकाशमय, जन-जन के।
आँगन, देहरी,
द्वार, सखी री दीप जला।
कर्म-ज्ञान
के, धर्म-दान के, रोशन हों।
हर
मन में सुविचार, सखी री दीप जला।
चिर
उजियाली, शुभ दीवाली, फिर लाए।
अपनों
के उपहार, सखी री दीप जला।
- कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
kar
solah shriingaar, sakhee ree deep jalaa
paawan
hai tyauhaar, sakhee ree deep jalaa
tam-wibhaawaree, jhilamilaa rahee, poonam see
jyotit
hai sansaar, sakhee ree deep jalaa
bhaaw
bhaawanaa, poorn alpanaa, shobhit ho
baandho
wandanawaar, sakhee ree deep jalaa
riddhi-siddhi
ke sukh-samriiddhi ke,
dvaar khulen
ghar-ghar
panape pyaar, sakhee ree deep jalaa
padmawaasinee, waradaa lakshmee, dvaar khadee
kar
svaagat satkaar, sakhee ree deep jalaa
dhairy-dhyaan
se, widhi widhaan se, kar-poojan
mangal
mantr uchaar, sakhee ree deep jalaa
satat
saal bhar, hon prakaashamay, jan-jan ke
aangan, deharee,
dvaar, sakhee ree deep jalaa
karm-jnaan
ke, dharm-daan ke, roshan hon
har
man men suwichaar, sakhee ree deep jalaa
chir
ujiyaalee, shubh deewaalee, phir laae
apanon
ke upahaar, sakhee ree deep jalaa
- kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
कर
सोलह शृंगार, सखी री दीप जला।
पावन
है त्यौहार, सखी री दीप जला।
तम-विभावरी, झिलमिला रही, पूनम सी।
ज्योतित
है संसार, सखी री दीप जला।
भाव
भावना, पूर्ण अल्पना, शोभित हो।
बाँधो
वंदनवार, सखी री दीप जला।
रिद्धि-सिद्धि
के सुख-समृद्धि के,
द्वार खुलें।
घर-घर
पनपे प्यार, सखी री दीप जला।
पद्मवासिनी, वरदा लक्ष्मी, द्वार खड़ी।
कर
स्वागत सत्कार, सखी री दीप जला।
धैर्य-ध्यान
से, विधि विधान से, कर-पूजन।
मंगल
मंत्र उचार, सखी री दीप जला।
सतत
साल भर, हों प्रकाशमय, जन-जन के।
आँगन, देहरी,
द्वार, सखी री दीप जला।
कर्म-ज्ञान
के, धर्म-दान के, रोशन हों।
हर
मन में सुविचार, सखी री दीप जला।
चिर
उजियाली, शुभ दीवाली, फिर लाए।
अपनों
के उपहार, सखी री दीप जला।
- कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी