कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ५९ / २०५ № 59 of 205 रचना ५९ / २०५
१८ अक्तूबर २०१४ 18 October 2014 १८ अक्तूबर २०१४

सखी री दीप जला sakhee ree deep jalaa सखी री दीप जला

कर

सोलह शृंगार, सखी री दीप जला।

॥

पावन

है त्यौहार, सखी री दीप जला।

॥

तम-विभावरी, झिलमिला रही, पूनम सी।

॥

ज्योतित

है संसार, सखी री दीप जला।

॥

भाव

भावना, पूर्ण अल्पना, शोभित हो।

॥

बाँधो

वंदनवार, सखी री दीप जला।

॥

रिद्धि-सिद्धि

के सुख-समृद्धि के,

द्वार खुलें।

॥

घर-घर

पनपे प्यार, सखी री दीप जला।

॥

पद्मवासिनी, वरदा लक्ष्मी, द्वार खड़ी।

॥

कर

स्वागत सत्कार, सखी री दीप जला।

॥

धैर्य-ध्यान

से, विधि विधान से, कर-पूजन।

॥

मंगल

मंत्र उचार, सखी री दीप जला।

॥

सतत

साल भर, हों प्रकाशमय, जन-जन के।

॥

आँगन, देहरी,

द्वार, सखी री दीप जला।

॥

कर्म-ज्ञान

के, धर्म-दान के, रोशन हों।

॥

हर

मन में सुविचार, सखी री दीप जला।

॥

चिर

उजियाली, शुभ दीवाली, फिर लाए।

॥

अपनों

के उपहार, सखी री दीप जला।

॥

- कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

kar

solah shriingaar, sakhee ree deep jalaa

·

paawan

hai tyauhaar, sakhee ree deep jalaa

·

tam-wibhaawaree, jhilamilaa rahee, poonam see

·

jyotit

hai sansaar, sakhee ree deep jalaa

·

bhaaw

bhaawanaa, poorn alpanaa, shobhit ho

·

baandho

wandanawaar, sakhee ree deep jalaa

·

riddhi-siddhi

ke sukh-samriiddhi ke,

dvaar khulen

·

ghar-ghar

panape pyaar, sakhee ree deep jalaa

·

padmawaasinee, waradaa lakshmee, dvaar khadee

·

kar

svaagat satkaar, sakhee ree deep jalaa

·

dhairy-dhyaan

se, widhi widhaan se, kar-poojan

·

mangal

mantr uchaar, sakhee ree deep jalaa

·

satat

saal bhar, hon prakaashamay, jan-jan ke

·

aangan, deharee,

dvaar, sakhee ree deep jalaa

·

karm-jnaan

ke, dharm-daan ke, roshan hon

·

har

man men suwichaar, sakhee ree deep jalaa

·

chir

ujiyaalee, shubh deewaalee, phir laae

·

apanon

ke upahaar, sakhee ree deep jalaa

·

- kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

कर

सोलह शृंगार, सखी री दीप जला।

॥

पावन

है त्यौहार, सखी री दीप जला।

॥

तम-विभावरी, झिलमिला रही, पूनम सी।

॥

ज्योतित

है संसार, सखी री दीप जला।

॥

भाव

भावना, पूर्ण अल्पना, शोभित हो।

॥

बाँधो

वंदनवार, सखी री दीप जला।

॥

रिद्धि-सिद्धि

के सुख-समृद्धि के,

द्वार खुलें।

॥

घर-घर

पनपे प्यार, सखी री दीप जला।

॥

पद्मवासिनी, वरदा लक्ष्मी, द्वार खड़ी।

॥

कर

स्वागत सत्कार, सखी री दीप जला।

॥

धैर्य-ध्यान

से, विधि विधान से, कर-पूजन।

॥

मंगल

मंत्र उचार, सखी री दीप जला।

॥

सतत

साल भर, हों प्रकाशमय, जन-जन के।

॥

आँगन, देहरी,

द्वार, सखी री दीप जला।

॥

कर्म-ज्ञान

के, धर्म-दान के, रोशन हों।

॥

हर

मन में सुविचार, सखी री दीप जला।

॥

चिर

उजियाली, शुभ दीवाली, फिर लाए।

॥

अपनों

के उपहार, सखी री दीप जला।

॥

- कल्पना रामानी

॥

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗