कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ५८ / २०४ № 58 of 204 रचना ५८ / २०४
१८ अक्तूबर २०१४ 18 October 2014 १८ अक्तूबर २०१४

सखी री दीप जला sakhee ree deep jalaa सखी री दीप जला

कर

सोलह शृंगार, सखी री दीप जला।

पावन

है त्यौहार, सखी री दीप जला।

तम-विभावरी, झिलमिला रही, पूनम सी।

ज्योतित

है संसार, सखी री दीप जला।

भाव

भावना, पूर्ण अल्पना, शोभित हो।

बाँधो

वंदनवार, सखी री दीप जला।

रिद्धि-सिद्धि

के सुख-समृद्धि के,

द्वार खुलें।

घर-घर

पनपे प्यार, सखी री दीप जला।

पद्मवासिनी, वरदा लक्ष्मी, द्वार खड़ी।

कर

स्वागत सत्कार, सखी री दीप जला।

धैर्य-ध्यान

से, विधि विधान से, कर-पूजन।

मंगल

मंत्र उचार, सखी री दीप जला।

सतत

साल भर, हों प्रकाशमय, जन-जन के।

आँगन, देहरी,

द्वार, सखी री दीप जला।

कर्म-ज्ञान

के, धर्म-दान के, रोशन हों।

हर

मन में सुविचार, सखी री दीप जला।

चिर

उजियाली, शुभ दीवाली, फिर लाए।

अपनों

के उपहार, सखी री दीप जला।

- कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

kar

solah shriingaar, sakhee ree deep jalaa

·

paawan

hai tyauhaar, sakhee ree deep jalaa

·

tam-wibhaawaree, jhilamilaa rahee, poonam see

·

jyotit

hai sansaar, sakhee ree deep jalaa

·

bhaaw

bhaawanaa, poorn alpanaa, shobhit ho

·

baandho

wandanawaar, sakhee ree deep jalaa

·

riddhi-siddhi

ke sukh-samriiddhi ke,

dvaar khulen

·

ghar-ghar

panape pyaar, sakhee ree deep jalaa

·

padmawaasinee, waradaa lakshmee, dvaar khadee

·

kar

svaagat satkaar, sakhee ree deep jalaa

·

dhairy-dhyaan

se, widhi widhaan se, kar-poojan

·

mangal

mantr uchaar, sakhee ree deep jalaa

·

satat

saal bhar, hon prakaashamay, jan-jan ke

·

aangan, deharee,

dvaar, sakhee ree deep jalaa

·

karm-jnaan

ke, dharm-daan ke, roshan hon

·

har

man men suwichaar, sakhee ree deep jalaa

·

chir

ujiyaalee, shubh deewaalee, phir laae

·

apanon

ke upahaar, sakhee ree deep jalaa

·

- kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

कर

सोलह शृंगार, सखी री दीप जला।

पावन

है त्यौहार, सखी री दीप जला।

तम-विभावरी, झिलमिला रही, पूनम सी।

ज्योतित

है संसार, सखी री दीप जला।

भाव

भावना, पूर्ण अल्पना, शोभित हो।

बाँधो

वंदनवार, सखी री दीप जला।

रिद्धि-सिद्धि

के सुख-समृद्धि के,

द्वार खुलें।

घर-घर

पनपे प्यार, सखी री दीप जला।

पद्मवासिनी, वरदा लक्ष्मी, द्वार खड़ी।

कर

स्वागत सत्कार, सखी री दीप जला।

धैर्य-ध्यान

से, विधि विधान से, कर-पूजन।

मंगल

मंत्र उचार, सखी री दीप जला।

सतत

साल भर, हों प्रकाशमय, जन-जन के।

आँगन, देहरी,

द्वार, सखी री दीप जला।

कर्म-ज्ञान

के, धर्म-दान के, रोशन हों।

हर

मन में सुविचार, सखी री दीप जला।

चिर

उजियाली, शुभ दीवाली, फिर लाए।

अपनों

के उपहार, सखी री दीप जला।

- कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗