तुलसी का चौंरा tulasee kaa chaunraa तुलसी का चौंरा
वो लगातार पाँच दिनों से शोभना के व्यवहार
पर गौर कर रहा था। उससे हर पल बतियाने वाली, आते
जाते निहारने, नज़रों से दुलराने वाली, उससे बात किए बिना बेचैनी से दिन
बिताने वाली शोभना कैसे इतनी बदल गई है, यह
उसकी समझ से परे था। प्रतिदिन सोचता शायद अधिक व्यस्त होगी, पर नहीं, व्यस्त होती तो अपनी सहेलियों से घंटों बातें न करती। शायद कहीं जाने
की जल्दी रहती होगी, यह भी नहीं हो सकता! उसे उसने एक बार
भी घर से
wo lagaataar paanch dinon se shobhanaa ke wyawahaar
par gaur kar rahaa thaa usase har pal batiyaane waalee, aate
jaate nihaarane, nazaron se dularaane waalee, usase baat kie binaa bechainee se din
bitaane waalee shobhanaa kaise itanee badal gaee hai, yah
usakee samajh se pare thaa pratidin sochataa shaayad adhik wyast hogee, par naheen, wyast hotee to apanee saheliyon se ghanton baaten n karatee shaayad kaheen jaane
kee jaldee rahatee hogee, yah bhee naheen ho sakataa! use usane ek baar
bhee ghar se
वो लगातार पाँच दिनों से शोभना के व्यवहार
पर गौर कर रहा था। उससे हर पल बतियाने वाली, आते
जाते निहारने, नज़रों से दुलराने वाली, उससे बात किए बिना बेचैनी से दिन
बिताने वाली शोभना कैसे इतनी बदल गई है, यह
उसकी समझ से परे था। प्रतिदिन सोचता शायद अधिक व्यस्त होगी, पर नहीं, व्यस्त होती तो अपनी सहेलियों से घंटों बातें न करती। शायद कहीं जाने
की जल्दी रहती होगी, यह भी नहीं हो सकता! उसे उसने एक बार
भी घर से