कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना २ / ११४ № 2 of 114 रचना २ / ११४
१६ अक्तूबर २०१४ 16 October 2014 १६ अक्तूबर २०१४

तुलसी का चौंरा tulasee kaa chaunraa तुलसी का चौंरा

वो लगातार पाँच दिनों से शोभना के व्यवहार

पर गौर कर रहा था। उससे हर पल बतियाने वाली, आते

जाते निहारने, नज़रों से दुलराने वाली, उससे बात किए बिना बेचैनी से दिन

बिताने वाली शोभना कैसे इतनी बदल गई है, यह

उसकी समझ से परे था। प्रतिदिन सोचता शायद अधिक व्यस्त होगी, पर नहीं, व्यस्त होती तो अपनी सहेलियों से घंटों बातें न करती। शायद कहीं जाने

की जल्दी रहती होगी, यह भी नहीं हो सकता! उसे उसने एक बार

भी घर से

wo lagaataar paanch dinon se shobhanaa ke wyawahaar

par gaur kar rahaa thaa usase har pal batiyaane waalee, aate

jaate nihaarane, nazaron se dularaane waalee, usase baat kie binaa bechainee se din

bitaane waalee shobhanaa kaise itanee badal gaee hai, yah

usakee samajh se pare thaa pratidin sochataa shaayad adhik wyast hogee, par naheen, wyast hotee to apanee saheliyon se ghanton baaten n karatee shaayad kaheen jaane

kee jaldee rahatee hogee, yah bhee naheen ho sakataa! use usane ek baar

bhee ghar se

वो लगातार पाँच दिनों से शोभना के व्यवहार

पर गौर कर रहा था। उससे हर पल बतियाने वाली, आते

जाते निहारने, नज़रों से दुलराने वाली, उससे बात किए बिना बेचैनी से दिन

बिताने वाली शोभना कैसे इतनी बदल गई है, यह

उसकी समझ से परे था। प्रतिदिन सोचता शायद अधिक व्यस्त होगी, पर नहीं, व्यस्त होती तो अपनी सहेलियों से घंटों बातें न करती। शायद कहीं जाने

की जल्दी रहती होगी, यह भी नहीं हो सकता! उसे उसने एक बार

भी घर से

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗