कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ३ / ११४ № 3 of 114 रचना ३ / ११४
१३ नवम्बर २०१४ 13 November 2014 १३ नवम्बर २०१४

घड़ों पानी ghadon paanee घड़ों पानी

अपने

रोते हुए शिशु को अचानक चुप होते देख द्वार पर काफी देर से पड़ोसन से बातें करती

हुई रमा ने सोचा शायद उसे भूखे ही नींद आ गई और वह घबराहट में अंदर की तरफ भागी, देखा कि उसकी सास शीला शिशु को चम्मच

से दूध पिला रही है। रमा गुस्से में भरकर बोल उठी “यह आप क्या कर रही हैं माँजी, दो

माह के शिशु को ऊपर का दूध! कहते हुए शिशु को शीला के हाथों से खींचकर कमरे में

चली गई। सास अवाक रह गई। शाम को रमा की

apane

rote hue shishu ko achaanak chup hote dekh dvaar par kaaphee der se padosan se baaten karatee

huee ramaa ne sochaa shaayad use bhookhe hee neend aa gaee aur wah ghabaraahat men andar kee taraph bhaagee, dekhaa ki usakee saas sheelaa shishu ko chammach

se doodh pilaa rahee hai ramaa gusse men bharakar bol uthee “yah aap kyaa kar rahee hain maanjee, do

maah ke shishu ko oopar kaa doodh! kahate hue shishu ko sheelaa ke haathon se kheenchakar kamare men

chalee gaee saas awaak rah gaee shaam ko ramaa kee

अपने

रोते हुए शिशु को अचानक चुप होते देख द्वार पर काफी देर से पड़ोसन से बातें करती

हुई रमा ने सोचा शायद उसे भूखे ही नींद आ गई और वह घबराहट में अंदर की तरफ भागी, देखा कि उसकी सास शीला शिशु को चम्मच

से दूध पिला रही है। रमा गुस्से में भरकर बोल उठी “यह आप क्या कर रही हैं माँजी, दो

माह के शिशु को ऊपर का दूध! कहते हुए शिशु को शीला के हाथों से खींचकर कमरे में

चली गई। सास अवाक रह गई। शाम को रमा की

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗