कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ८४ / १६४ № 84 of 164 रचना ८४ / १६४
१९ नवम्बर २०१४ 19 November 2014 १९ नवम्बर २०१४

बेटी तुम betee tum बेटी तुम

नव

प्रभात की सूर्य किरण से

आलोकित

घर का निखार हो।

॥

आँगन

की मृदु महक माधुरी

बेटी

तुम, सबका दुलार हो।

॥

ब्रह्मा

का उत्कृष्ट सृजन तुम

॥

निर्मल,कोमल,सुंदर तन तुम

॥

कर्म

योगिनी,स्वत्व स्वामिनी

स्वजनों

की स्नेहिल पुकार हो

बेटी

तुम, सबका दुलार हो!

॥

खिली

खिली खुशरंग हिना तुम

॥

चंचल, चतुर,

चारु-वदना तुम

॥

मृगनयनी, मृदु बयन

भाषिणी

मातृ-पितृ

मन का मल्हार हो

naw

prabhaat kee soory kiran se

aalokit

ghar kaa nikhaar ho

·

aangan

kee mriidu mahak maadhuree

betee

tum, sabakaa dulaar ho

·

brahmaa

kaa utkriisht sriijan tum

·

nirmal,komal,sundar tan tum

·

karm

yoginee,svatv svaaminee

svajanon

kee snehil pukaar ho

betee

tum, sabakaa dulaar ho!

·

khilee

khilee khusharang hinaa tum

·

chanchal, chatur,

chaaru-wadanaa tum

·

mriiganayanee, mriidu bayan

bhaashinee

maatrii-pitrii

man kaa malhaar ho

नव

प्रभात की सूर्य किरण से

आलोकित

घर का निखार हो।

॥

आँगन

की मृदु महक माधुरी

बेटी

तुम, सबका दुलार हो।

॥

ब्रह्मा

का उत्कृष्ट सृजन तुम

॥

निर्मल,कोमल,सुंदर तन तुम

॥

कर्म

योगिनी,स्वत्व स्वामिनी

स्वजनों

की स्नेहिल पुकार हो

बेटी

तुम, सबका दुलार हो!

॥

खिली

खिली खुशरंग हिना तुम

॥

चंचल, चतुर,

चारु-वदना तुम

॥

मृगनयनी, मृदु बयन

भाषिणी

मातृ-पितृ

मन का मल्हार हो

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗