बेटी तुम betee tum बेटी तुम
नव
प्रभात की सूर्य किरण से
आलोकित
घर का निखार हो।
आँगन
की मृदु महक माधुरी
बेटी
तुम, सबका दुलार हो।
ब्रह्मा
का उत्कृष्ट सृजन तुम
निर्मल,कोमल,सुंदर तन तुम
कर्म
योगिनी,स्वत्व स्वामिनी
स्वजनों
की स्नेहिल पुकार हो
बेटी
तुम, सबका दुलार हो!
खिली
खिली खुशरंग हिना तुम
चंचल, चतुर,
चारु-वदना तुम
मृगनयनी, मृदु बयन
भाषिणी
मातृ-पितृ
मन का मल्हार हो
naw
prabhaat kee soory kiran se
aalokit
ghar kaa nikhaar ho
aangan
kee mriidu mahak maadhuree
betee
tum, sabakaa dulaar ho
brahmaa
kaa utkriisht sriijan tum
nirmal,komal,sundar tan tum
karm
yoginee,svatv svaaminee
svajanon
kee snehil pukaar ho
betee
tum, sabakaa dulaar ho!
khilee
khilee khusharang hinaa tum
chanchal, chatur,
chaaru-wadanaa tum
mriiganayanee, mriidu bayan
bhaashinee
maatrii-pitrii
man kaa malhaar ho
नव
प्रभात की सूर्य किरण से
आलोकित
घर का निखार हो।
आँगन
की मृदु महक माधुरी
बेटी
तुम, सबका दुलार हो।
ब्रह्मा
का उत्कृष्ट सृजन तुम
निर्मल,कोमल,सुंदर तन तुम
कर्म
योगिनी,स्वत्व स्वामिनी
स्वजनों
की स्नेहिल पुकार हो
बेटी
तुम, सबका दुलार हो!
खिली
खिली खुशरंग हिना तुम
चंचल, चतुर,
चारु-वदना तुम
मृगनयनी, मृदु बयन
भाषिणी
मातृ-पितृ
मन का मल्हार हो