कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ६१ / २०४ № 61 of 204 रचना ६१ / २०४
२८ नवम्बर २०१४ 28 November 2014 २८ नवम्बर २०१४

फूलों से खुशबू लेकर phoolon se khushaboo lekar फूलों से खुशबू लेकर

फूलों

से खुशबू लेकर खिलने का वादा।

खुद से कर लो जीवन भर हँसने का वादा।

बन आँसू बोझिल हों पलकें अगर तुम्हारी

बुझे पलों से करो पुलक बनने का वादा।

करना

होगा अगम जलधि की जलधारा से

मझधारा में कभी नहीं फँसने का वादा।

चलते-चलते

पाँव फिसलने लगते हों यदि

करो उस जगह कभी न पग धरने का वादा।

आँख

दिखाती जीवन-पथ की चट्टानों को

चूर चूर कर हो आगे बढ़ने का वादा।

टूटे

यह अनुबंध तुम्हारा कभी न खुद से

वादों पर हो सदा अडिग चलने का वादा।

फिर-फिर

मिलता नहीं “कल्पना” मानव-जीवन

मन से हो इंसान बने रहने का वादा।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

phoolon

se khushaboo lekar khilane kaa waadaa

·

khud se kar lo jeewan bhar hansane kaa waadaa

·

ban aansoo bojhil hon palaken agar tumhaaree

·

bujhe palon se karo pulak banane kaa waadaa

·

karanaa

hogaa agam jaladhi kee jaladhaaraa se

·

majhadhaaraa men kabhee naheen phansane kaa waadaa

·

chalate-chalate

paanv phisalane lagate hon yadi

·

karo us jagah kabhee n pag dharane kaa waadaa

·

aankh

dikhaatee jeewan-path kee chattaanon ko

·

choor choor kar ho aage bढ़ne kaa waadaa

·

toote

yah anubandh tumhaaraa kabhee n khud se

·

waadon par ho sadaa adig chalane kaa waadaa

·

phir-phir

milataa naheen “kalpanaa” maanaw-jeewan

·

man se ho insaan bane rahane kaa waadaa

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

फूलों

से खुशबू लेकर खिलने का वादा।

खुद से कर लो जीवन भर हँसने का वादा।

बन आँसू बोझिल हों पलकें अगर तुम्हारी

बुझे पलों से करो पुलक बनने का वादा।

करना

होगा अगम जलधि की जलधारा से

मझधारा में कभी नहीं फँसने का वादा।

चलते-चलते

पाँव फिसलने लगते हों यदि

करो उस जगह कभी न पग धरने का वादा।

आँख

दिखाती जीवन-पथ की चट्टानों को

चूर चूर कर हो आगे बढ़ने का वादा।

टूटे

यह अनुबंध तुम्हारा कभी न खुद से

वादों पर हो सदा अडिग चलने का वादा।

फिर-फिर

मिलता नहीं “कल्पना” मानव-जीवन

मन से हो इंसान बने रहने का वादा।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗