कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ६२ / २०५ № 62 of 205 रचना ६२ / २०५
२८ नवम्बर २०१४ 28 November 2014 २८ नवम्बर २०१४

फूलों से खुशबू लेकर phoolon se khushaboo lekar फूलों से खुशबू लेकर

फूलों

से खुशबू लेकर खिलने का वादा।

॥

खुद से कर लो जीवन भर हँसने का वादा।

॥

बन आँसू बोझिल हों पलकें अगर तुम्हारी

॥

बुझे पलों से करो पुलक बनने का वादा।

॥

करना

होगा अगम जलधि की जलधारा से

॥

मझधारा में कभी नहीं फँसने का वादा।

॥

चलते-चलते

पाँव फिसलने लगते हों यदि

॥

करो उस जगह कभी न पग धरने का वादा।

॥

आँख

दिखाती जीवन-पथ की चट्टानों को

॥

चूर चूर कर हो आगे बढ़ने का वादा।

॥

टूटे

यह अनुबंध तुम्हारा कभी न खुद से

॥

वादों पर हो सदा अडिग चलने का वादा।

॥

फिर-फिर

मिलता नहीं “कल्पना” मानव-जीवन

॥

मन से हो इंसान बने रहने का वादा।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

phoolon

se khushaboo lekar khilane kaa waadaa

·

khud se kar lo jeewan bhar hansane kaa waadaa

·

ban aansoo bojhil hon palaken agar tumhaaree

·

bujhe palon se karo pulak banane kaa waadaa

·

karanaa

hogaa agam jaladhi kee jaladhaaraa se

·

majhadhaaraa men kabhee naheen phansane kaa waadaa

·

chalate-chalate

paanv phisalane lagate hon yadi

·

karo us jagah kabhee n pag dharane kaa waadaa

·

aankh

dikhaatee jeewan-path kee chattaanon ko

·

choor choor kar ho aage bढ़ne kaa waadaa

·

toote

yah anubandh tumhaaraa kabhee n khud se

·

waadon par ho sadaa adig chalane kaa waadaa

·

phir-phir

milataa naheen “kalpanaa” maanaw-jeewan

·

man se ho insaan bane rahane kaa waadaa

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

फूलों

से खुशबू लेकर खिलने का वादा।

॥

खुद से कर लो जीवन भर हँसने का वादा।

॥

बन आँसू बोझिल हों पलकें अगर तुम्हारी

॥

बुझे पलों से करो पुलक बनने का वादा।

॥

करना

होगा अगम जलधि की जलधारा से

॥

मझधारा में कभी नहीं फँसने का वादा।

॥

चलते-चलते

पाँव फिसलने लगते हों यदि

॥

करो उस जगह कभी न पग धरने का वादा।

॥

आँख

दिखाती जीवन-पथ की चट्टानों को

॥

चूर चूर कर हो आगे बढ़ने का वादा।

॥

टूटे

यह अनुबंध तुम्हारा कभी न खुद से

॥

वादों पर हो सदा अडिग चलने का वादा।

॥

फिर-फिर

मिलता नहीं “कल्पना” मानव-जीवन

॥

मन से हो इंसान बने रहने का वादा।

॥

-कल्पना रामानी

॥

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗