कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ७५ / १६३ № 75 of 163 रचना ७५ / १६३
१७ अगस्त २०१४ 17 August 2014 १७ अगस्त २०१४

भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर bhakti-bhaaw kaa soory ugaa phir भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर

भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर

धर्मों की लाली छाई।

कृष्ण-जन्म का

पर्व मनाने

पुनः नई पुरवा आई।

जप अखंड, सुमिरन मोहन का

धरा मुक्ति का धाम हुई।

श्रद्धा में

डूबी दिनचर्या

आज कृष्ण के नाम हुई।

मंदिर देव लदे पुष्पों से

और आरती मन भाई।

दान-पुण्य के संग श्याम की

महिमा जन-जन ने गाई।

दधि-माखन की

टाँग मटकियाँ

हर चौराहे पहुँचा जाम।

सजे धजे

गोविंदाओं ने

जीते हँडिया फोड़ इनाम।

bhakti-bhaaw kaa soory ugaa phir

dharmon kee laalee chaaee

kriishn-janm kaa

parv manaane

punah naee purawaa aaee

·

jap akhand, sumiran mohan kaa

dharaa mukti kaa dhaam huee

shraddhaa men

doobee dinacharyaa

aaj kriishn ke naam huee

·

mandir dew lade pushpon se

aur aaratee man bhaaee

daan-puny ke sang shyaam kee

mahimaa jan-jan ne gaaee

·

dadhi-maakhan kee

taang matakiyaan

har chauraahe pahunchaa jaam

saje dhaje

gowindaaon ne

jeete handiyaa phod inaam

भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर

धर्मों की लाली छाई।

कृष्ण-जन्म का

पर्व मनाने

पुनः नई पुरवा आई।

जप अखंड, सुमिरन मोहन का

धरा मुक्ति का धाम हुई।

श्रद्धा में

डूबी दिनचर्या

आज कृष्ण के नाम हुई।

मंदिर देव लदे पुष्पों से

और आरती मन भाई।

दान-पुण्य के संग श्याम की

महिमा जन-जन ने गाई।

दधि-माखन की

टाँग मटकियाँ

हर चौराहे पहुँचा जाम।

सजे धजे

गोविंदाओं ने

जीते हँडिया फोड़ इनाम।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗