भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर bhakti-bhaaw kaa soory ugaa phir भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर
भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर
धर्मों की लाली छाई।
कृष्ण-जन्म का
पर्व मनाने
पुनः नई पुरवा आई।
जप अखंड, सुमिरन मोहन का
धरा मुक्ति का धाम हुई।
श्रद्धा में
डूबी दिनचर्या
आज कृष्ण के नाम हुई।
मंदिर देव लदे पुष्पों से
और आरती मन भाई।
दान-पुण्य के संग श्याम की
महिमा जन-जन ने गाई।
दधि-माखन की
टाँग मटकियाँ
हर चौराहे पहुँचा जाम।
सजे धजे
गोविंदाओं ने
जीते हँडिया फोड़ इनाम।
bhakti-bhaaw kaa soory ugaa phir
dharmon kee laalee chaaee
kriishn-janm kaa
parv manaane
punah naee purawaa aaee
jap akhand, sumiran mohan kaa
dharaa mukti kaa dhaam huee
shraddhaa men
doobee dinacharyaa
aaj kriishn ke naam huee
mandir dew lade pushpon se
aur aaratee man bhaaee
daan-puny ke sang shyaam kee
mahimaa jan-jan ne gaaee
dadhi-maakhan kee
taang matakiyaan
har chauraahe pahunchaa jaam
saje dhaje
gowindaaon ne
jeete handiyaa phod inaam
भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर
धर्मों की लाली छाई।
कृष्ण-जन्म का
पर्व मनाने
पुनः नई पुरवा आई।
जप अखंड, सुमिरन मोहन का
धरा मुक्ति का धाम हुई।
श्रद्धा में
डूबी दिनचर्या
आज कृष्ण के नाम हुई।
मंदिर देव लदे पुष्पों से
और आरती मन भाई।
दान-पुण्य के संग श्याम की
महिमा जन-जन ने गाई।
दधि-माखन की
टाँग मटकियाँ
हर चौराहे पहुँचा जाम।
सजे धजे
गोविंदाओं ने
जीते हँडिया फोड़ इनाम।