कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ७५ / १६४ № 75 of 164 रचना ७५ / १६४
१७ अगस्त २०१४ 17 August 2014 १७ अगस्त २०१४

भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर bhakti-bhaaw kaa soory ugaa phir भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर

भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर

धर्मों की लाली छाई।

कृष्ण-जन्म का

पर्व मनाने

पुनः नई पुरवा आई।

॥

जप अखंड, सुमिरन मोहन का

धरा मुक्ति का धाम हुई।

श्रद्धा में

डूबी दिनचर्या

आज कृष्ण के नाम हुई।

॥

मंदिर देव लदे पुष्पों से

और आरती मन भाई।

दान-पुण्य के संग श्याम की

महिमा जन-जन ने गाई।

॥

दधि-माखन की

टाँग मटकियाँ

हर चौराहे पहुँचा जाम।

सजे धजे

गोविंदाओं ने

जीते हँडिया फोड़ इनाम।

bhakti-bhaaw kaa soory ugaa phir

dharmon kee laalee chaaee

kriishn-janm kaa

parv manaane

punah naee purawaa aaee

·

jap akhand, sumiran mohan kaa

dharaa mukti kaa dhaam huee

shraddhaa men

doobee dinacharyaa

aaj kriishn ke naam huee

·

mandir dew lade pushpon se

aur aaratee man bhaaee

daan-puny ke sang shyaam kee

mahimaa jan-jan ne gaaee

·

dadhi-maakhan kee

taang matakiyaan

har chauraahe pahunchaa jaam

saje dhaje

gowindaaon ne

jeete handiyaa phod inaam

भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर

धर्मों की लाली छाई।

कृष्ण-जन्म का

पर्व मनाने

पुनः नई पुरवा आई।

॥

जप अखंड, सुमिरन मोहन का

धरा मुक्ति का धाम हुई।

श्रद्धा में

डूबी दिनचर्या

आज कृष्ण के नाम हुई।

॥

मंदिर देव लदे पुष्पों से

और आरती मन भाई।

दान-पुण्य के संग श्याम की

महिमा जन-जन ने गाई।

॥

दधि-माखन की

टाँग मटकियाँ

हर चौराहे पहुँचा जाम।

सजे धजे

गोविंदाओं ने

जीते हँडिया फोड़ इनाम।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗