दिनकर तेरी ज्योत बढ़े dinakar teree jyot bढ़e दिनकर तेरी ज्योत बढ़े
दिन तिल तिल ज्यों बढ़ते जाते,
दिनकर तेरी ज्योत बढ़े।
जाओ रानी गठरी बाँधो,
शीतल ऋतु को किया इशारा।
नियम पुरातन तेरा निस दिन,
सदियाँ गईं, नहीं तू हारा।
शाम ढले छिप जाता है तू,
आ जाता फिर भोर पड़े।
मौसम बदला सजीं पतंगें,
मुक्त गगन में लहराईं।
तिल गुड़ की सौंधी मिठास,
रिश्तों में अपनापन लाई।
युवा उमंगें बढ़ीं सौगुनी,
ज्यों ज्यों ऊपर डोर चढ़े।
मकर प्रवेश दिवाकर तेरा,
din til til jyon bढ़te jaate,
dinakar teree jyot bढ़e
jaao raanee gatharee baandho,
sheetal riitu ko kiyaa ishaaraa
niyam puraatan teraa nis din,
sadiyaan gaeen, naheen too haaraa
shaam dhale chip jaataa hai too,
aa jaataa phir bhor pade
mausam badalaa sajeen patangen,
mukt gagan men laharaaeen
til gud kee saundhee mithaas,
rishton men apanaapan laaee
yuwaa umangen bढ़een saugunee,
jyon jyon oopar dor chढ़e
makar prawesh diwaakar teraa,
दिन तिल तिल ज्यों बढ़ते जाते,
दिनकर तेरी ज्योत बढ़े।
जाओ रानी गठरी बाँधो,
शीतल ऋतु को किया इशारा।
नियम पुरातन तेरा निस दिन,
सदियाँ गईं, नहीं तू हारा।
शाम ढले छिप जाता है तू,
आ जाता फिर भोर पड़े।
मौसम बदला सजीं पतंगें,
मुक्त गगन में लहराईं।
तिल गुड़ की सौंधी मिठास,
रिश्तों में अपनापन लाई।
युवा उमंगें बढ़ीं सौगुनी,
ज्यों ज्यों ऊपर डोर चढ़े।
मकर प्रवेश दिवाकर तेरा,