कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९८ / १६४ № 98 of 164 रचना ९८ / १६४
१३ जनवरी २०१५ 13 January 2015 १३ जनवरी २०१५

दिनकर तेरी ज्योत बढ़े dinakar teree jyot bढ़e दिनकर तेरी ज्योत बढ़े

दिन तिल तिल ज्यों बढ़ते जाते,

॥

दिनकर तेरी ज्योत बढ़े।

॥

जाओ रानी गठरी बाँधो,

॥

शीतल ऋतु को किया इशारा।

॥

नियम पुरातन तेरा निस दिन,

॥

सदियाँ गईं, नहीं तू हारा।

॥

शाम ढले छिप जाता है तू,

॥

आ जाता फिर भोर पड़े।

॥

मौसम बदला सजीं पतंगें,

॥

मुक्त गगन में लहराईं।

॥

तिल गुड़ की सौंधी मिठास,

॥

रिश्तों में अपनापन लाई।

॥

युवा उमंगें बढ़ीं सौगुनी,

॥

ज्यों ज्यों ऊपर डोर चढ़े।

॥

मकर प्रवेश दिवाकर तेरा,

din til til jyon bढ़te jaate,

·

dinakar teree jyot bढ़e

·

jaao raanee gatharee baandho,

·

sheetal riitu ko kiyaa ishaaraa

·

niyam puraatan teraa nis din,

·

sadiyaan gaeen, naheen too haaraa

·

shaam dhale chip jaataa hai too,

·

aa jaataa phir bhor pade

·

mausam badalaa sajeen patangen,

·

mukt gagan men laharaaeen

·

til gud kee saundhee mithaas,

·

rishton men apanaapan laaee

·

yuwaa umangen bढ़een saugunee,

·

jyon jyon oopar dor chढ़e

·

makar prawesh diwaakar teraa,

दिन तिल तिल ज्यों बढ़ते जाते,

॥

दिनकर तेरी ज्योत बढ़े।

॥

जाओ रानी गठरी बाँधो,

॥

शीतल ऋतु को किया इशारा।

॥

नियम पुरातन तेरा निस दिन,

॥

सदियाँ गईं, नहीं तू हारा।

॥

शाम ढले छिप जाता है तू,

॥

आ जाता फिर भोर पड़े।

॥

मौसम बदला सजीं पतंगें,

॥

मुक्त गगन में लहराईं।

॥

तिल गुड़ की सौंधी मिठास,

॥

रिश्तों में अपनापन लाई।

॥

युवा उमंगें बढ़ीं सौगुनी,

॥

ज्यों ज्यों ऊपर डोर चढ़े।

॥

मकर प्रवेश दिवाकर तेरा,

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗