कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९८ / १६३ № 98 of 163 रचना ९८ / १६३
१३ जनवरी २०१५ 13 January 2015 १३ जनवरी २०१५

दिनकर तेरी ज्योत बढ़े dinakar teree jyot bढ़e दिनकर तेरी ज्योत बढ़े

दिन तिल तिल ज्यों बढ़ते जाते,

दिनकर तेरी ज्योत बढ़े।

जाओ रानी गठरी बाँधो,

शीतल ऋतु को किया इशारा।

नियम पुरातन तेरा निस दिन,

सदियाँ गईं, नहीं तू हारा।

शाम ढले छिप जाता है तू,

आ जाता फिर भोर पड़े।

मौसम बदला सजीं पतंगें,

मुक्त गगन में लहराईं।

तिल गुड़ की सौंधी मिठास,

रिश्तों में अपनापन लाई।

युवा उमंगें बढ़ीं सौगुनी,

ज्यों ज्यों ऊपर डोर चढ़े।

मकर प्रवेश दिवाकर तेरा,

din til til jyon bढ़te jaate,

·

dinakar teree jyot bढ़e

·

jaao raanee gatharee baandho,

·

sheetal riitu ko kiyaa ishaaraa

·

niyam puraatan teraa nis din,

·

sadiyaan gaeen, naheen too haaraa

·

shaam dhale chip jaataa hai too,

·

aa jaataa phir bhor pade

·

mausam badalaa sajeen patangen,

·

mukt gagan men laharaaeen

·

til gud kee saundhee mithaas,

·

rishton men apanaapan laaee

·

yuwaa umangen bढ़een saugunee,

·

jyon jyon oopar dor chढ़e

·

makar prawesh diwaakar teraa,

दिन तिल तिल ज्यों बढ़ते जाते,

दिनकर तेरी ज्योत बढ़े।

जाओ रानी गठरी बाँधो,

शीतल ऋतु को किया इशारा।

नियम पुरातन तेरा निस दिन,

सदियाँ गईं, नहीं तू हारा।

शाम ढले छिप जाता है तू,

आ जाता फिर भोर पड़े।

मौसम बदला सजीं पतंगें,

मुक्त गगन में लहराईं।

तिल गुड़ की सौंधी मिठास,

रिश्तों में अपनापन लाई।

युवा उमंगें बढ़ीं सौगुनी,

ज्यों ज्यों ऊपर डोर चढ़े।

मकर प्रवेश दिवाकर तेरा,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗