कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ७५ / २०५ № 75 of 205 रचना ७५ / २०५
१० मार्च २०१५ 10 March 2015 १० मार्च २०१५

खुशबू से महकाओ मन khushaboo se mahakaao man खुशबू से महकाओ मन

खुशबू

से महकाओ मन, फूलों की तरहा

॥

रंगों

से भर दो जीवन, बागों की तरहा

॥

कभी

न बनकर बाँध, रोकना बहती धारा

॥

सतत

प्रवाहित रहो धार-नदियों की तरहा

॥

कितना

प्यार जगत में, देखो थोड़ा नमकर

॥

अकड़न, ऐंठन छोड़, फलित डालों की तरहा

॥

ऋतुएँ

रूठें, करो न ऐसी खल करतूतें

॥

रौंद

रहे क्यों भू को, यमदूतों की तरहा

॥

किया

प्रदूषण अब तक अर्पित नीर-पवन को

॥

बनो

चमन मन! हरो दोष, पेड़ों की तरहा

॥

अँधियारों

को राह दिखाओ जुगनू बनकर

॥

उजियारों

से तम काटो तारों की तरहा

॥

बोल

लबों से कभी न फूटें अंगारे बन

॥

मित्र!

चहकते रहो सदा चिड़ियों की तरहा

॥

बात

पुरानी कहने का अंदाज़ नया हो

॥

ज्यों

महफिल तुमको गाए, गज़लों की तरहा

॥

मनुष

बनाकर तुम्हें ईश ने भू पर भेजा

॥

कर्म

“कल्पना” फिर क्यों हों पशुओं की तरहा

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

khushaboo

se mahakaao man, phoolon kee tarahaa

·

rangon

se bhar do jeewan, baagon kee tarahaa

·

kabhee

n banakar baandh, rokanaa bahatee dhaaraa

·

satat

prawaahit raho dhaar-nadiyon kee tarahaa

·

kitanaa

pyaar jagat men, dekho thodaa namakar

·

akadan, ainthan chod, phalit daalon kee tarahaa

·

riituen

roothen, karo n aisee khal karatooten

·

raund

rahe kyon bhoo ko, yamadooton kee tarahaa

·

kiyaa

pradooshan ab tak arpit neer-pawan ko

·

bano

chaman man! haro dosh, pedon kee tarahaa

·

andhiyaaron

ko raah dikhaao juganoo banakar

·

ujiyaaron

se tam kaato taaron kee tarahaa

·

bol

labon se kabhee n phooten angaare ban

·

mitr!

chahakate raho sadaa chidiyon kee tarahaa

·

baat

puraanee kahane kaa andaaz nayaa ho

·

jyon

mahaphil tumako gaae, gazalon kee tarahaa

·

manush

banaakar tumhen eesh ne bhoo par bhejaa

·

karm

“kalpanaa” phir kyon hon pashuon kee tarahaa

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

खुशबू

से महकाओ मन, फूलों की तरहा

॥

रंगों

से भर दो जीवन, बागों की तरहा

॥

कभी

न बनकर बाँध, रोकना बहती धारा

॥

सतत

प्रवाहित रहो धार-नदियों की तरहा

॥

कितना

प्यार जगत में, देखो थोड़ा नमकर

॥

अकड़न, ऐंठन छोड़, फलित डालों की तरहा

॥

ऋतुएँ

रूठें, करो न ऐसी खल करतूतें

॥

रौंद

रहे क्यों भू को, यमदूतों की तरहा

॥

किया

प्रदूषण अब तक अर्पित नीर-पवन को

॥

बनो

चमन मन! हरो दोष, पेड़ों की तरहा

॥

अँधियारों

को राह दिखाओ जुगनू बनकर

॥

उजियारों

से तम काटो तारों की तरहा

॥

बोल

लबों से कभी न फूटें अंगारे बन

॥

मित्र!

चहकते रहो सदा चिड़ियों की तरहा

॥

बात

पुरानी कहने का अंदाज़ नया हो

॥

ज्यों

महफिल तुमको गाए, गज़लों की तरहा

॥

मनुष

बनाकर तुम्हें ईश ने भू पर भेजा

॥

कर्म

“कल्पना” फिर क्यों हों पशुओं की तरहा

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗