कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ७४ / २०४ № 74 of 204 रचना ७४ / २०४
१० मार्च २०१५ 10 March 2015 १० मार्च २०१५

खुशबू से महकाओ मन khushaboo se mahakaao man खुशबू से महकाओ मन

खुशबू

से महकाओ मन, फूलों की तरहा

रंगों

से भर दो जीवन, बागों की तरहा

कभी

न बनकर बाँध, रोकना बहती धारा

सतत

प्रवाहित रहो धार-नदियों की तरहा

कितना

प्यार जगत में, देखो थोड़ा नमकर

अकड़न, ऐंठन छोड़, फलित डालों की तरहा

ऋतुएँ

रूठें, करो न ऐसी खल करतूतें

रौंद

रहे क्यों भू को, यमदूतों की तरहा

किया

प्रदूषण अब तक अर्पित नीर-पवन को

बनो

चमन मन! हरो दोष, पेड़ों की तरहा

अँधियारों

को राह दिखाओ जुगनू बनकर

उजियारों

से तम काटो तारों की तरहा

बोल

लबों से कभी न फूटें अंगारे बन

मित्र!

चहकते रहो सदा चिड़ियों की तरहा

बात

पुरानी कहने का अंदाज़ नया हो

ज्यों

महफिल तुमको गाए, गज़लों की तरहा

मनुष

बनाकर तुम्हें ईश ने भू पर भेजा

कर्म

“कल्पना” फिर क्यों हों पशुओं की तरहा

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

khushaboo

se mahakaao man, phoolon kee tarahaa

·

rangon

se bhar do jeewan, baagon kee tarahaa

·

kabhee

n banakar baandh, rokanaa bahatee dhaaraa

·

satat

prawaahit raho dhaar-nadiyon kee tarahaa

·

kitanaa

pyaar jagat men, dekho thodaa namakar

·

akadan, ainthan chod, phalit daalon kee tarahaa

·

riituen

roothen, karo n aisee khal karatooten

·

raund

rahe kyon bhoo ko, yamadooton kee tarahaa

·

kiyaa

pradooshan ab tak arpit neer-pawan ko

·

bano

chaman man! haro dosh, pedon kee tarahaa

·

andhiyaaron

ko raah dikhaao juganoo banakar

·

ujiyaaron

se tam kaato taaron kee tarahaa

·

bol

labon se kabhee n phooten angaare ban

·

mitr!

chahakate raho sadaa chidiyon kee tarahaa

·

baat

puraanee kahane kaa andaaz nayaa ho

·

jyon

mahaphil tumako gaae, gazalon kee tarahaa

·

manush

banaakar tumhen eesh ne bhoo par bhejaa

·

karm

“kalpanaa” phir kyon hon pashuon kee tarahaa

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

खुशबू

से महकाओ मन, फूलों की तरहा

रंगों

से भर दो जीवन, बागों की तरहा

कभी

न बनकर बाँध, रोकना बहती धारा

सतत

प्रवाहित रहो धार-नदियों की तरहा

कितना

प्यार जगत में, देखो थोड़ा नमकर

अकड़न, ऐंठन छोड़, फलित डालों की तरहा

ऋतुएँ

रूठें, करो न ऐसी खल करतूतें

रौंद

रहे क्यों भू को, यमदूतों की तरहा

किया

प्रदूषण अब तक अर्पित नीर-पवन को

बनो

चमन मन! हरो दोष, पेड़ों की तरहा

अँधियारों

को राह दिखाओ जुगनू बनकर

उजियारों

से तम काटो तारों की तरहा

बोल

लबों से कभी न फूटें अंगारे बन

मित्र!

चहकते रहो सदा चिड़ियों की तरहा

बात

पुरानी कहने का अंदाज़ नया हो

ज्यों

महफिल तुमको गाए, गज़लों की तरहा

मनुष

बनाकर तुम्हें ईश ने भू पर भेजा

कर्म

“कल्पना” फिर क्यों हों पशुओं की तरहा

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗