कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १७० / २०४ № 170 of 204 रचना १७० / २०४
१६ नवम्बर २०१९ 16 November 2019 १६ नवम्बर २०१९

ठंडी हवा हर पेड़ की thandee hawaa har ped kee ठंडी हवा हर पेड़ की

गर्मियों की शान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

धूप में वरदान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

हर पथिक हारा थका, विश्राम है पाता यहाँ

भेद से अंजान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

नीम पीपल हों या वट, रखते हरा संसार को

गूढ यह विज्ञान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

हाँफते विहगों का प्यारा, नीड़ इनकी डालियाँ

और इनकी जान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

रुख बदलती है मगर, रूठे नहीं मुख मोड़कर

मोहिनी मृदु गान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

जो न साधन जोड़ पाते, वे शरण लेते यहाँ

दीन का भगवान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

‘कल्पना’ मिटने न दें, जीवन के अनुपम स्रोत को

सृष्टि का अनुदान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

garmiyon kee shaan hai, thandee hawaa har ped kee

dhoop men waradaan hai, thandee hawaa har ped kee

·

har pathik haaraa thakaa, wishraam hai paataa yahaan

bhed se anjaan hai, thandee hawaa har ped kee

·

neem peepal hon yaa wat, rakhate haraa sansaar ko

goodh yah wijnaan hai, thandee hawaa har ped kee

·

haanphate wihagon kaa pyaaraa, need inakee daaliyaan

aur inakee jaan hai, thandee hawaa har ped kee

·

rukh badalatee hai magar, roothe naheen mukh modakar

mohinee mriidu gaan hai, thandee hawaa har ped kee

·

jo n saadhan jod paate, we sharan lete yahaan

deen kaa bhagawaan hai, thandee hawaa har ped kee

·

‘kalpanaa’ mitane n den, jeewan ke anupam srot ko

sriishti kaa anudaan hai, thandee hawaa har ped kee

गर्मियों की शान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

धूप में वरदान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

हर पथिक हारा थका, विश्राम है पाता यहाँ

भेद से अंजान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

नीम पीपल हों या वट, रखते हरा संसार को

गूढ यह विज्ञान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

हाँफते विहगों का प्यारा, नीड़ इनकी डालियाँ

और इनकी जान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

रुख बदलती है मगर, रूठे नहीं मुख मोड़कर

मोहिनी मृदु गान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

जो न साधन जोड़ पाते, वे शरण लेते यहाँ

दीन का भगवान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

‘कल्पना’ मिटने न दें, जीवन के अनुपम स्रोत को

सृष्टि का अनुदान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗