कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १७२ / २०४ № 172 of 204 रचना १७२ / २०४
१७ नवम्बर २०१९ 17 November 2019 १७ नवम्बर २०१९

नीम की शीतल हवा neem kee sheetal hawaa नीम की शीतल हवा

ग्रीष्म ऋतु में संगिनी सी

नीम की शीतल हवा।

दोपहर में यामिनी सी

नीम की शीतल हवा।

झौंसता वैसाख जब

आती अचानक झूमकर

सब्ज़ वसना कामिनी सी

नीम की शीतल हवा।

ख़ुशबुएँ बिखरा बनाती

खुशनुमाँ पर्यावरण

शांत कोमल योगिनी सी

नीम की शीतल हवा।

खिड़कियों के रास्ते से

रात में आती सखी

मंत्र-मुग्धा मोहिनी सी

नीम की शीतल हवा।

तप्त सूरज रश्मियों को

ढाल बनकर रोकती

भोर में मृदु-रागिनी सी

नीम की शीतल हवा।

बाँटती जीवन बिठाती

गोद में हर जीव को

प्यार करती भामिनी सी

नीम की शीतल हवा।

रोग दोषों को मिटाती

फैलकर इसकी महक

बाग वन में शोभिनी सी

नीम की शीतल हवा।

greeshm riitu men sanginee see

neem kee sheetal hawaa

dopahar men yaaminee see

neem kee sheetal hawaa

·

jhaunsataa waisaakh jab

aatee achaanak jhoomakar

sabz wasanaa kaaminee see

neem kee sheetal hawaa

·

kushabuen bikharaa banaatee

khushanumaan paryaawaran

shaant komal yoginee see

neem kee sheetal hawaa

·

khidakiyon ke raaste se

raat men aatee sakhee

mantr-mugdhaa mohinee see

neem kee sheetal hawaa

·

tapt sooraj rashmiyon ko

dhaal banakar rokatee

bhor men mriidu-raaginee see

neem kee sheetal hawaa

·

baantatee jeewan bithaatee

god men har jeew ko

pyaar karatee bhaaminee see

neem kee sheetal hawaa

·

rog doshon ko mitaatee

phailakar isakee mahak

baag wan men shobhinee see

neem kee sheetal hawaa

ग्रीष्म ऋतु में संगिनी सी

नीम की शीतल हवा।

दोपहर में यामिनी सी

नीम की शीतल हवा।

झौंसता वैसाख जब

आती अचानक झूमकर

सब्ज़ वसना कामिनी सी

नीम की शीतल हवा।

ख़ुशबुएँ बिखरा बनाती

खुशनुमाँ पर्यावरण

शांत कोमल योगिनी सी

नीम की शीतल हवा।

खिड़कियों के रास्ते से

रात में आती सखी

मंत्र-मुग्धा मोहिनी सी

नीम की शीतल हवा।

तप्त सूरज रश्मियों को

ढाल बनकर रोकती

भोर में मृदु-रागिनी सी

नीम की शीतल हवा।

बाँटती जीवन बिठाती

गोद में हर जीव को

प्यार करती भामिनी सी

नीम की शीतल हवा।

रोग दोषों को मिटाती

फैलकर इसकी महक

बाग वन में शोभिनी सी

नीम की शीतल हवा।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗