अगर कर्म पर जन का विश्वास होगा agar karm par jan kaa wishvaas hogaa अगर कर्म पर जन का विश्वास होगा
अगर
कर्म पर जन का विश्वास होगा
हर
आँगन में खुशियों भरा हास होगा।
बदल
दें बसंती बयारों का रुख तो
चमन
का हरिक मास,
मधुमास
होगा।
उमीदों
के दीपक जलें जो हमेशा
तो
रातों में भी दिन का आभास होगा।
बजे
मातमी धुन,
अभावों
की जिस दर
वहाँ
कैसे लक्ष्मी का आवास होगा?
अगर
देश में ही,
उगें
रोटियाँ तो
किसी
भी पिता को क्या वनवास होगा?
मिले
जो सज़ा,
आरियों
को किए की
तो
वन-वन विहँसता अमलतास होगा।
गज़ल-गीत
कैसे,
न
गाएगा जन-मन
अगर
“कल्पना” स्वाद-रस खास
होगा।
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
agar
karm par jan kaa wishvaas hogaa
har
aangan men khushiyon bharaa haas hogaa
badal
den basantee bayaaron kaa rukh to
chaman
kaa harik maas,
madhumaas
hogaa
umeedon
ke deepak jalen jo hameshaa
to
raaton men bhee din kaa aabhaas hogaa
baje
maatamee dhun,
abhaawon
kee jis dar
wahaan
kaise lakshmee kaa aawaas hogaa?
agar
desh men hee,
ugen
rotiyaan to
kisee
bhee pitaa ko kyaa wanawaas hogaa?
mile
jo sazaa,
aariyon
ko kie kee
to
wan-wan wihansataa amalataas hogaa
gazal-geet
kaise,
n
gaaegaa jan-man
agar
“kalpanaa” svaad-ras khaas
hogaa
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
अगर
कर्म पर जन का विश्वास होगा
हर
आँगन में खुशियों भरा हास होगा।
बदल
दें बसंती बयारों का रुख तो
चमन
का हरिक मास,
मधुमास
होगा।
उमीदों
के दीपक जलें जो हमेशा
तो
रातों में भी दिन का आभास होगा।
बजे
मातमी धुन,
अभावों
की जिस दर
वहाँ
कैसे लक्ष्मी का आवास होगा?
अगर
देश में ही,
उगें
रोटियाँ तो
किसी
भी पिता को क्या वनवास होगा?
मिले
जो सज़ा,
आरियों
को किए की
तो
वन-वन विहँसता अमलतास होगा।
गज़ल-गीत
कैसे,
न
गाएगा जन-मन
अगर
“कल्पना” स्वाद-रस खास
होगा।
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी