कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १२५ / २०४ № 125 of 204 रचना १२५ / २०४
२१ अप्रैल २०१६ 21 April 2016 २१ अप्रैल २०१६

अगर कर्म पर जन का विश्वास होगा agar karm par jan kaa wishvaas hogaa अगर कर्म पर जन का विश्वास होगा

अगर

कर्म पर जन का विश्वास होगा

हर

आँगन में खुशियों भरा हास होगा।

बदल

दें बसंती बयारों का रुख तो

चमन

का हरिक मास,

मधुमास

होगा।

उमीदों

के दीपक जलें जो हमेशा

तो

रातों में भी दिन का आभास होगा।

बजे

मातमी धुन,

अभावों

की जिस दर

वहाँ

कैसे लक्ष्मी का आवास होगा?

अगर

देश में ही,

उगें

रोटियाँ तो

किसी

भी पिता को क्या वनवास होगा?

मिले

जो सज़ा,

आरियों

को किए की

तो

वन-वन विहँसता अमलतास होगा।

गज़ल-गीत

कैसे,

गाएगा जन-मन

अगर

“कल्पना” स्वाद-रस खास

होगा।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

agar

karm par jan kaa wishvaas hogaa

·

har

aangan men khushiyon bharaa haas hogaa

·

badal

den basantee bayaaron kaa rukh to

·

chaman

kaa harik maas,

madhumaas

hogaa

·

umeedon

ke deepak jalen jo hameshaa

·

to

raaton men bhee din kaa aabhaas hogaa

·

baje

maatamee dhun,

abhaawon

kee jis dar

·

wahaan

kaise lakshmee kaa aawaas hogaa?

·

agar

desh men hee,

ugen

rotiyaan to

·

kisee

bhee pitaa ko kyaa wanawaas hogaa?

·

mile

jo sazaa,

aariyon

ko kie kee

·

to

wan-wan wihansataa amalataas hogaa

·

gazal-geet

kaise,

n

gaaegaa jan-man

·

agar

“kalpanaa” svaad-ras khaas

hogaa

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

अगर

कर्म पर जन का विश्वास होगा

हर

आँगन में खुशियों भरा हास होगा।

बदल

दें बसंती बयारों का रुख तो

चमन

का हरिक मास,

मधुमास

होगा।

उमीदों

के दीपक जलें जो हमेशा

तो

रातों में भी दिन का आभास होगा।

बजे

मातमी धुन,

अभावों

की जिस दर

वहाँ

कैसे लक्ष्मी का आवास होगा?

अगर

देश में ही,

उगें

रोटियाँ तो

किसी

भी पिता को क्या वनवास होगा?

मिले

जो सज़ा,

आरियों

को किए की

तो

वन-वन विहँसता अमलतास होगा।

गज़ल-गीत

कैसे,

गाएगा जन-मन

अगर

“कल्पना” स्वाद-रस खास

होगा।

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗