कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना १० / ६३ № 10 of 63 रचना १० / ६३
२८ अक्तूबर २०१२ 28 October 2012 २८ अक्तूबर २०१२

शीतल किरणें चंद्र की sheetal kiranen chandr kee शीतल किरणें चंद्र की

शीतल किरणें चंद्र की, बिखरीं चारों ओर।

शरद पूर्णिमा रात का, उत्सव है पुरजोर।

उत्सव है पुरजोर, लोग सब छत पर धाए

मिल अपनों के साथ,दूध के पात्र सजाए।

रसमय रजनी रूप, कर रहा तन मन बेकल

बिखरी चारों ओर, चंद्र की किरणें

शीतल।

दूध नहाई पूर्णिमा, शरद परी की रात।

जन जन पर्व मना रहा, छत पर रखकर भात।

छत पर रखकर भात, मधुर रस घोले रैना।

सजी चाँदनी आज, लिए कजरारे नैना

sheetal kiranen chandr kee, bikhareen chaaron or

·

sharad poornimaa raat kaa, utsaw hai purajor

·

utsaw hai purajor, log sab chat par dhaae

·

mil apanon ke saath,doodh ke paatr sajaae

·

rasamay rajanee roop, kar rahaa tan man bekal

·

bikharee chaaron or, chandr kee kiranen

sheetal

·

doodh nahaaee poornimaa, sharad paree kee raat

jan jan parv manaa rahaa, chat par rakhakar bhaat

chat par rakhakar bhaat, madhur ras ghole rainaa

sajee chaandanee aaj, lie kajaraare nainaa

शीतल किरणें चंद्र की, बिखरीं चारों ओर।

शरद पूर्णिमा रात का, उत्सव है पुरजोर।

उत्सव है पुरजोर, लोग सब छत पर धाए

मिल अपनों के साथ,दूध के पात्र सजाए।

रसमय रजनी रूप, कर रहा तन मन बेकल

बिखरी चारों ओर, चंद्र की किरणें

शीतल।

दूध नहाई पूर्णिमा, शरद परी की रात।

जन जन पर्व मना रहा, छत पर रखकर भात।

छत पर रखकर भात, मधुर रस घोले रैना।

सजी चाँदनी आज, लिए कजरारे नैना

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗