कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ५४ / ६३ № 54 of 63 रचना ५४ / ६३
२५ अक्तूबर २०१९ 25 October 2019 २५ अक्तूबर २०१९

उत्सव खूब मनाइये utsaw khoob manaaiye उत्सव खूब मनाइये

कुंडलिया छंद

उत्सव खूब मनाइए, साथ सकल परिवार।

दीप प्रेम के बालिए, जगमग हो संसार।

जगमग हो संसार, उजाला सोहर गाए।

अपनों के उपहार, संग दीवाली लाए।

तम की होगी हार, जयी होगा फिर वैभव

साथ सकल परिवार, मने दीपों का उत्सव।

kundaliyaa chand

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utsaw khoob manaaie, saath sakal pariwaar

deep prem ke baalie, jagamag ho sansaar

jagamag ho sansaar, ujaalaa sohar gaae

apanon ke upahaar, sang deewaalee laae

tam kee hogee haar, jayee hogaa phir waibhaw

saath sakal pariwaar, mane deepon kaa utsaw

कुंडलिया छंद

उत्सव खूब मनाइए, साथ सकल परिवार।

दीप प्रेम के बालिए, जगमग हो संसार।

जगमग हो संसार, उजाला सोहर गाए।

अपनों के उपहार, संग दीवाली लाए।

तम की होगी हार, जयी होगा फिर वैभव

साथ सकल परिवार, मने दीपों का उत्सव।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗