कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १५३ / २०४ № 153 of 204 रचना १५३ / २०४
२५ अक्तूबर २०१९ 25 October 2019 २५ अक्तूबर २०१९

द्वार पर दस्तक हुई dvaar par dastak huee द्वार पर दस्तक हुई

गजल

द्वार पर दस्तक हुई, आई दिवाली।

ज्योत पर्वों की जली, आई दिवाली।

भू-भुवन में रंग बिखरे, रोशनी के

रात अमा पूनम हुई, आई दिवाली।

नव उमंगों के पहनकर पंख नूतन

डाल पर चहकी चिड़ी, आई दिवाली।

देख झिलमिल दूर तक हर नयन-जल में

फिर कमलिनी खिल उठी, आई दिवाली।

वस्त्र नूतन, ओढ़ बचपन, है मगन मन

ले पटाखों की लड़ी, आई दिवाली।

प्रेम-पुरवा, जब चली पायल पहनकर

बाग में चटकी कली, आई दिवाली।

सुन सखी री! गाओ स्वागत-गान मंगल

ले दिया लक्ष्मी खड़ी, आई दिवाली।

लोक सारे में दुआ, देखो अलौकिक

देवताओं की घुली, आई दिवाली।

जो बसे परदेस उनको ‘कल्पना’ फिर

लेके अपनों की गली, आई दिवाली।

gajal

·

dvaar par dastak huee, aaee diwaalee

jyot parvon kee jalee, aaee diwaalee

·

bhoo-bhuwan men rang bikhare, roshanee ke

raat amaa poonam huee, aaee diwaalee

·

naw umangon ke pahanakar pankh nootan

daal par chahakee chidee, aaee diwaalee

·

dekh jhilamil door tak har nayan-jal men

phir kamalinee khil uthee, aaee diwaalee

·

wastr nootan, oढ़ bachapan, hai magan man

le pataakhon kee ladee, aaee diwaalee

·

prem-purawaa, jab chalee paayal pahanakar

baag men chatakee kalee, aaee diwaalee

·

sun sakhee ree! gaao svaagat-gaan mangal

le diyaa lakshmee khadee, aaee diwaalee

·

lok saare men duaa, dekho alaukik

dewataaon kee ghulee, aaee diwaalee

·

jo base parades unako ‘kalpanaa’ phir

leke apanon kee galee, aaee diwaalee

गजल

द्वार पर दस्तक हुई, आई दिवाली।

ज्योत पर्वों की जली, आई दिवाली।

भू-भुवन में रंग बिखरे, रोशनी के

रात अमा पूनम हुई, आई दिवाली।

नव उमंगों के पहनकर पंख नूतन

डाल पर चहकी चिड़ी, आई दिवाली।

देख झिलमिल दूर तक हर नयन-जल में

फिर कमलिनी खिल उठी, आई दिवाली।

वस्त्र नूतन, ओढ़ बचपन, है मगन मन

ले पटाखों की लड़ी, आई दिवाली।

प्रेम-पुरवा, जब चली पायल पहनकर

बाग में चटकी कली, आई दिवाली।

सुन सखी री! गाओ स्वागत-गान मंगल

ले दिया लक्ष्मी खड़ी, आई दिवाली।

लोक सारे में दुआ, देखो अलौकिक

देवताओं की घुली, आई दिवाली।

जो बसे परदेस उनको ‘कल्पना’ फिर

लेके अपनों की गली, आई दिवाली।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗