द्वार पर दस्तक हुई dvaar par dastak huee द्वार पर दस्तक हुई
गजल
द्वार पर दस्तक हुई, आई दिवाली।
ज्योत पर्वों की जली, आई दिवाली।
भू-भुवन में रंग बिखरे, रोशनी के
रात अमा पूनम हुई, आई दिवाली।
नव उमंगों के पहनकर पंख नूतन
डाल पर चहकी चिड़ी, आई दिवाली।
देख झिलमिल दूर तक हर नयन-जल में
फिर कमलिनी खिल उठी, आई दिवाली।
वस्त्र नूतन, ओढ़ बचपन, है मगन मन
ले पटाखों की लड़ी, आई दिवाली।
प्रेम-पुरवा, जब चली पायल पहनकर
बाग में चटकी कली, आई दिवाली।
सुन सखी री! गाओ स्वागत-गान मंगल
ले दिया लक्ष्मी खड़ी, आई दिवाली।
लोक सारे में दुआ, देखो अलौकिक
देवताओं की घुली, आई दिवाली।
जो बसे परदेस उनको ‘कल्पना’ फिर
लेके अपनों की गली, आई दिवाली।
gajal
dvaar par dastak huee, aaee diwaalee
jyot parvon kee jalee, aaee diwaalee
bhoo-bhuwan men rang bikhare, roshanee ke
raat amaa poonam huee, aaee diwaalee
naw umangon ke pahanakar pankh nootan
daal par chahakee chidee, aaee diwaalee
dekh jhilamil door tak har nayan-jal men
phir kamalinee khil uthee, aaee diwaalee
wastr nootan, oढ़ bachapan, hai magan man
le pataakhon kee ladee, aaee diwaalee
prem-purawaa, jab chalee paayal pahanakar
baag men chatakee kalee, aaee diwaalee
sun sakhee ree! gaao svaagat-gaan mangal
le diyaa lakshmee khadee, aaee diwaalee
lok saare men duaa, dekho alaukik
dewataaon kee ghulee, aaee diwaalee
jo base parades unako ‘kalpanaa’ phir
leke apanon kee galee, aaee diwaalee
गजल
द्वार पर दस्तक हुई, आई दिवाली।
ज्योत पर्वों की जली, आई दिवाली।
भू-भुवन में रंग बिखरे, रोशनी के
रात अमा पूनम हुई, आई दिवाली।
नव उमंगों के पहनकर पंख नूतन
डाल पर चहकी चिड़ी, आई दिवाली।
देख झिलमिल दूर तक हर नयन-जल में
फिर कमलिनी खिल उठी, आई दिवाली।
वस्त्र नूतन, ओढ़ बचपन, है मगन मन
ले पटाखों की लड़ी, आई दिवाली।
प्रेम-पुरवा, जब चली पायल पहनकर
बाग में चटकी कली, आई दिवाली।
सुन सखी री! गाओ स्वागत-गान मंगल
ले दिया लक्ष्मी खड़ी, आई दिवाली।
लोक सारे में दुआ, देखो अलौकिक
देवताओं की घुली, आई दिवाली।
जो बसे परदेस उनको ‘कल्पना’ फिर
लेके अपनों की गली, आई दिवाली।