कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १३ / ६७ № 13 of 67 रचना १३ / ६७
२८ अक्तूबर २०१२ 28 October 2012 २८ अक्तूबर २०१२

जंगल में अतिक्रमण की... jangal men atikraman kee जंगल में अतिक्रमण की...

जंगल में अतिक्रमण की, जब से सुलगी आग।

॥

वन जीवों में मच गई, सहसा भागमभाग।

॥

पेड़ सभी कटने लगे, देख न कोई आस।

॥

हिरण चौकड़ी भूलकर, कोने खड़ा उदास।

॥

कल तक जो रानी बनी, देती थी आदेश।

॥

सुपर सयानी लोमड़ी, भूल गई उपदेश।

॥

आसमान पर छा रही, खूब घटा घनघोर।

॥

मगर मोर चुपचाप है, नहीं मचाता शोर।

॥

चिंतित है खरगोश भी, सोच रहा खामोश।

jangal men atikraman kee, jab se sulagee aag

·

wan jeewon men mach gaee, sahasaa bhaagamabhaag

·

ped sabhee katane lage, dekh n koee aas

·

hiran chaukadee bhoolakar, kone khadaa udaas

·

kal tak jo raanee banee, detee thee aadesh

·

supar sayaanee lomadee, bhool gaee upadesh

·

aasamaan par chaa rahee, khoob ghataa ghanaghor

·

magar mor chupachaap hai, naheen machaataa shor

·

chintit hai kharagosh bhee, soch rahaa khaamosh

जंगल में अतिक्रमण की, जब से सुलगी आग।

॥

वन जीवों में मच गई, सहसा भागमभाग।

॥

पेड़ सभी कटने लगे, देख न कोई आस।

॥

हिरण चौकड़ी भूलकर, कोने खड़ा उदास।

॥

कल तक जो रानी बनी, देती थी आदेश।

॥

सुपर सयानी लोमड़ी, भूल गई उपदेश।

॥

आसमान पर छा रही, खूब घटा घनघोर।

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मगर मोर चुपचाप है, नहीं मचाता शोर।

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चिंतित है खरगोश भी, सोच रहा खामोश।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗