कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १२ / ६५ № 12 of 65 रचना १२ / ६५
२८ अक्तूबर २०१२ 28 October 2012 २८ अक्तूबर २०१२

जंगल में अतिक्रमण की... jangal men atikraman kee जंगल में अतिक्रमण की...

जंगल में अतिक्रमण की, जब से सुलगी आग।

वन जीवों में मच गई, सहसा भागमभाग।

पेड़ सभी कटने लगे, देख न कोई आस।

हिरण चौकड़ी भूलकर, कोने खड़ा उदास।

कल तक जो रानी बनी, देती थी आदेश।

सुपर सयानी लोमड़ी, भूल गई उपदेश।

आसमान पर छा रही, खूब घटा घनघोर।

मगर मोर चुपचाप है, नहीं मचाता शोर।

चिंतित है खरगोश भी, सोच रहा खामोश।

jangal men atikraman kee, jab se sulagee aag

·

wan jeewon men mach gaee, sahasaa bhaagamabhaag

·

ped sabhee katane lage, dekh n koee aas

·

hiran chaukadee bhoolakar, kone khadaa udaas

·

kal tak jo raanee banee, detee thee aadesh

·

supar sayaanee lomadee, bhool gaee upadesh

·

aasamaan par chaa rahee, khoob ghataa ghanaghor

·

magar mor chupachaap hai, naheen machaataa shor

·

chintit hai kharagosh bhee, soch rahaa khaamosh

जंगल में अतिक्रमण की, जब से सुलगी आग।

वन जीवों में मच गई, सहसा भागमभाग।

पेड़ सभी कटने लगे, देख न कोई आस।

हिरण चौकड़ी भूलकर, कोने खड़ा उदास।

कल तक जो रानी बनी, देती थी आदेश।

सुपर सयानी लोमड़ी, भूल गई उपदेश।

आसमान पर छा रही, खूब घटा घनघोर।

मगर मोर चुपचाप है, नहीं मचाता शोर।

चिंतित है खरगोश भी, सोच रहा खामोश।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗