कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १६ / ६५ № 16 of 65 रचना १६ / ६५
१२ दिसम्बर २०१२ 12 December 2012 १२ दिसम्बर २०१२

शीतल ऋतु आई सखी sheetal riitu aaee sakhee शीतल ऋतु आई सखी

शीतल

ऋतु आई सखी,

पहन

नए परिधान।

चलो

दुशाला ओढ़कर, करें

धूप का स्नान।

एक

चटाई धूप की, डलिया

भरकर बेर।

जन-मन

को हर्षा गया, मौसम

का यह फेर।

फटी

बिवाई पाँव में, करे

हवा हैरान।

नए

रंग दिखला रहा, शीत

नया मेहमान।

शीत

प्रसाधन चल पड़े, भरने

लगे बजार।

ढेरों

लोशन क्रीम की, आई

ब्रांड बहार।

सर्दी

को भाने लगे, सूखे

sheetal

riitu aaee sakhee,

pahan

nae paridhaan

·

chalo

dushaalaa oढ़kar, karen

dhoop kaa snaan

·

ek

chataaee dhoop kee, daliyaa

bharakar ber

·

jan-man

ko harshaa gayaa, mausam

kaa yah pher

·

phatee

biwaaee paanv men, kare

hawaa hairaan

·

nae

rang dikhalaa rahaa, sheet

nayaa mehamaan

·

sheet

prasaadhan chal pade, bharane

lage bajaar

·

dheron

loshan kreem kee, aaee

braand bahaar

·

sardee

ko bhaane lage, sookhe

शीतल

ऋतु आई सखी,

पहन

नए परिधान।

चलो

दुशाला ओढ़कर, करें

धूप का स्नान।

एक

चटाई धूप की, डलिया

भरकर बेर।

जन-मन

को हर्षा गया, मौसम

का यह फेर।

फटी

बिवाई पाँव में, करे

हवा हैरान।

नए

रंग दिखला रहा, शीत

नया मेहमान।

शीत

प्रसाधन चल पड़े, भरने

लगे बजार।

ढेरों

लोशन क्रीम की, आई

ब्रांड बहार।

सर्दी

को भाने लगे, सूखे

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗