कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १७ / ६७ № 17 of 67 रचना १७ / ६७
१२ दिसम्बर २०१२ 12 December 2012 १२ दिसम्बर २०१२

शीतल ऋतु आई सखी sheetal riitu aaee sakhee शीतल ऋतु आई सखी

शीतल

ऋतु आई सखी,

पहन

नए परिधान।

॥

चलो

दुशाला ओढ़कर, करें

धूप का स्नान।

॥

एक

चटाई धूप की, डलिया

भरकर बेर।

॥

जन-मन

को हर्षा गया, मौसम

का यह फेर।

॥

फटी

बिवाई पाँव में, करे

हवा हैरान।

॥

नए

रंग दिखला रहा, शीत

नया मेहमान।

॥

शीत

प्रसाधन चल पड़े, भरने

लगे बजार।

॥

ढेरों

लोशन क्रीम की, आई

ब्रांड बहार।

॥

सर्दी

को भाने लगे, सूखे

sheetal

riitu aaee sakhee,

pahan

nae paridhaan

·

chalo

dushaalaa oढ़kar, karen

dhoop kaa snaan

·

ek

chataaee dhoop kee, daliyaa

bharakar ber

·

jan-man

ko harshaa gayaa, mausam

kaa yah pher

·

phatee

biwaaee paanv men, kare

hawaa hairaan

·

nae

rang dikhalaa rahaa, sheet

nayaa mehamaan

·

sheet

prasaadhan chal pade, bharane

lage bajaar

·

dheron

loshan kreem kee, aaee

braand bahaar

·

sardee

ko bhaane lage, sookhe

शीतल

ऋतु आई सखी,

पहन

नए परिधान।

॥

चलो

दुशाला ओढ़कर, करें

धूप का स्नान।

॥

एक

चटाई धूप की, डलिया

भरकर बेर।

॥

जन-मन

को हर्षा गया, मौसम

का यह फेर।

॥

फटी

बिवाई पाँव में, करे

हवा हैरान।

॥

नए

रंग दिखला रहा, शीत

नया मेहमान।

॥

शीत

प्रसाधन चल पड़े, भरने

लगे बजार।

॥

ढेरों

लोशन क्रीम की, आई

ब्रांड बहार।

॥

सर्दी

को भाने लगे, सूखे

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗