कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ३ / २०४ № 3 of 204 रचना ३ / २०४
४ जुलाई २०१३ 4 July 2013 ४ जुलाई २०१३

नीम की शीतल हवा//गज़ल// neem kee sheetal hawaa//gazal// नीम की शीतल हवा//गज़ल//

ग्रीष्म ऋतु में संगिनी सी, नीम की शीतल हवा

दोपहर में यामिनी सी, नीम की शीतल हवा

झौंसते वैसाख में, आती अचानक झूमकर

सब्ज़-वसना कामिनी सी, नीम की शीतल हवा

ख़ुशबुएँ बिखरा बनाती, खुशनुमाँ पर्यावरण

शांत कोमल योगिनी सी, नीम की शीतल हवा

खिड़कियों के रास्ते से, रात में आती सखी

मंत्र-मुग्धा मोहिनी सी, नीम की शीतल हवा

तप्त सूरज रश्मियों को,ढाल बनकर रोकती

भोर में इक रागिनी सी, नीम की शीतल हवा

बाँटती जीवन, बिठाती गोद में हर जीव को

प्यार करती भामिनी सी, नीम की शीतल हवा

रोग दोषों को मिटाती, फैलकर इसकी महक

बाग वन में शोभिनी सी, नीम की शीतल हवा

- कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

greeshm riitu men sanginee see, neem kee sheetal hawaa

dopahar men yaaminee see, neem kee sheetal hawaa

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jhaunsate waisaakh men, aatee achaanak jhoomakar

sabz-wasanaa kaaminee see, neem kee sheetal hawaa

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kushabuen bikharaa banaatee, khushanumaan paryaawaran

shaant komal yoginee see, neem kee sheetal hawaa

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khidakiyon ke raaste se, raat men aatee sakhee

mantr-mugdhaa mohinee see, neem kee sheetal hawaa

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tapt sooraj rashmiyon ko,dhaal banakar rokatee

bhor men ik raaginee see, neem kee sheetal hawaa

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baantatee jeewan, bithaatee god men har jeew ko

pyaar karatee bhaaminee see, neem kee sheetal hawaa

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rog doshon ko mitaatee, phailakar isakee mahak

baag wan men shobhinee see, neem kee sheetal hawaa

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- kalpanaa raamaanee

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protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

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-kalpanaa raamaanee

ग्रीष्म ऋतु में संगिनी सी, नीम की शीतल हवा

दोपहर में यामिनी सी, नीम की शीतल हवा

झौंसते वैसाख में, आती अचानक झूमकर

सब्ज़-वसना कामिनी सी, नीम की शीतल हवा

ख़ुशबुएँ बिखरा बनाती, खुशनुमाँ पर्यावरण

शांत कोमल योगिनी सी, नीम की शीतल हवा

खिड़कियों के रास्ते से, रात में आती सखी

मंत्र-मुग्धा मोहिनी सी, नीम की शीतल हवा

तप्त सूरज रश्मियों को,ढाल बनकर रोकती

भोर में इक रागिनी सी, नीम की शीतल हवा

बाँटती जीवन, बिठाती गोद में हर जीव को

प्यार करती भामिनी सी, नीम की शीतल हवा

रोग दोषों को मिटाती, फैलकर इसकी महक

बाग वन में शोभिनी सी, नीम की शीतल हवा

- कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗