कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ४ / २०५ № 4 of 205 रचना ४ / २०५
४ जुलाई २०१३ 4 July 2013 ४ जुलाई २०१३

नीम की शीतल हवा//गज़ल// neem kee sheetal hawaa//gazal// नीम की शीतल हवा//गज़ल//

ग्रीष्म ऋतु में संगिनी सी, नीम की शीतल हवा

दोपहर में यामिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

झौंसते वैसाख में, आती अचानक झूमकर

सब्ज़-वसना कामिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

ख़ुशबुएँ बिखरा बनाती, खुशनुमाँ पर्यावरण

शांत कोमल योगिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

खिड़कियों के रास्ते से, रात में आती सखी

मंत्र-मुग्धा मोहिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

तप्त सूरज रश्मियों को,ढाल बनकर रोकती

भोर में इक रागिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

बाँटती जीवन, बिठाती गोद में हर जीव को

प्यार करती भामिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

रोग दोषों को मिटाती, फैलकर इसकी महक

बाग वन में शोभिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

- कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

greeshm riitu men sanginee see, neem kee sheetal hawaa

dopahar men yaaminee see, neem kee sheetal hawaa

·

jhaunsate waisaakh men, aatee achaanak jhoomakar

sabz-wasanaa kaaminee see, neem kee sheetal hawaa

·

kushabuen bikharaa banaatee, khushanumaan paryaawaran

shaant komal yoginee see, neem kee sheetal hawaa

·

khidakiyon ke raaste se, raat men aatee sakhee

mantr-mugdhaa mohinee see, neem kee sheetal hawaa

·

tapt sooraj rashmiyon ko,dhaal banakar rokatee

bhor men ik raaginee see, neem kee sheetal hawaa

·

baantatee jeewan, bithaatee god men har jeew ko

pyaar karatee bhaaminee see, neem kee sheetal hawaa

·

rog doshon ko mitaatee, phailakar isakee mahak

baag wan men shobhinee see, neem kee sheetal hawaa

·

- kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

ग्रीष्म ऋतु में संगिनी सी, नीम की शीतल हवा

दोपहर में यामिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

झौंसते वैसाख में, आती अचानक झूमकर

सब्ज़-वसना कामिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

ख़ुशबुएँ बिखरा बनाती, खुशनुमाँ पर्यावरण

शांत कोमल योगिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

खिड़कियों के रास्ते से, रात में आती सखी

मंत्र-मुग्धा मोहिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

तप्त सूरज रश्मियों को,ढाल बनकर रोकती

भोर में इक रागिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

बाँटती जीवन, बिठाती गोद में हर जीव को

प्यार करती भामिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

रोग दोषों को मिटाती, फैलकर इसकी महक

बाग वन में शोभिनी सी, नीम की शीतल हवा

॥

- कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗