कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ८१ / १६४ № 81 of 164 रचना ८१ / १६४
२२ सितम्बर २०१४ 22 September 2014 २२ सितम्बर २०१४

स्नेह सुधा बरसाओ मेघा sneh sudhaa barasaao meghaa स्नेह सुधा बरसाओ मेघा

स्नेह सुधा बरसाओ मेघा

॥

व्याकुल हुआ तरसता मन।

॥

रिश्तों की जो बेलें सूखीं

॥

कर दो फिर से हरी भरी।

॥

मन आँगन में पड़ी दरारें

॥

घन बरसो, हो जाय तरी।

॥

सिंचित हो जीवन की धरती।

॥

ले आओ ऐसा सावन।

॥

दूर दिलों से बसी बस्तियाँ

॥

भाव शून्यता गहराई।

॥

सरस सुमन निष्प्राण हो गए

॥

नागफनी ऐसी छाई।

॥

बूँद-बूँद में हो बहार सी

॥

बरसाओ वो अपनापन।

॥

उपजाऊ हो मन की

sneh sudhaa barasaao meghaa

·

wyaakul huaa tarasataa man

·

rishton kee jo belen sookheen

·

kar do phir se haree bharee

·

man aangan men padee daraaren

·

ghan baraso, ho jaay taree

·

sinchit ho jeewan kee dharatee

·

le aao aisaa saawan

·

door dilon se basee bastiyaan

·

bhaaw shoonyataa gaharaaee

·

saras suman nishpraan ho gae

·

naagaphanee aisee chaaee

·

boond-boond men ho bahaar see

·

barasaao wo apanaapan

·

upajaaoo ho man kee

स्नेह सुधा बरसाओ मेघा

॥

व्याकुल हुआ तरसता मन।

॥

रिश्तों की जो बेलें सूखीं

॥

कर दो फिर से हरी भरी।

॥

मन आँगन में पड़ी दरारें

॥

घन बरसो, हो जाय तरी।

॥

सिंचित हो जीवन की धरती।

॥

ले आओ ऐसा सावन।

॥

दूर दिलों से बसी बस्तियाँ

॥

भाव शून्यता गहराई।

॥

सरस सुमन निष्प्राण हो गए

॥

नागफनी ऐसी छाई।

॥

बूँद-बूँद में हो बहार सी

॥

बरसाओ वो अपनापन।

॥

उपजाऊ हो मन की

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗