कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ८१ / १६३ № 81 of 163 रचना ८१ / १६३
२२ सितम्बर २०१४ 22 September 2014 २२ सितम्बर २०१४

स्नेह सुधा बरसाओ मेघा sneh sudhaa barasaao meghaa स्नेह सुधा बरसाओ मेघा

स्नेह सुधा बरसाओ मेघा

व्याकुल हुआ तरसता मन।

रिश्तों की जो बेलें सूखीं

कर दो फिर से हरी भरी।

मन आँगन में पड़ी दरारें

घन बरसो, हो जाय तरी।

सिंचित हो जीवन की धरती।

ले आओ ऐसा सावन।

दूर दिलों से बसी बस्तियाँ

भाव शून्यता गहराई।

सरस सुमन निष्प्राण हो गए

नागफनी ऐसी छाई।

बूँद-बूँद में हो बहार सी

बरसाओ वो अपनापन।

उपजाऊ हो मन की

sneh sudhaa barasaao meghaa

·

wyaakul huaa tarasataa man

·

rishton kee jo belen sookheen

·

kar do phir se haree bharee

·

man aangan men padee daraaren

·

ghan baraso, ho jaay taree

·

sinchit ho jeewan kee dharatee

·

le aao aisaa saawan

·

door dilon se basee bastiyaan

·

bhaaw shoonyataa gaharaaee

·

saras suman nishpraan ho gae

·

naagaphanee aisee chaaee

·

boond-boond men ho bahaar see

·

barasaao wo apanaapan

·

upajaaoo ho man kee

स्नेह सुधा बरसाओ मेघा

व्याकुल हुआ तरसता मन।

रिश्तों की जो बेलें सूखीं

कर दो फिर से हरी भरी।

मन आँगन में पड़ी दरारें

घन बरसो, हो जाय तरी।

सिंचित हो जीवन की धरती।

ले आओ ऐसा सावन।

दूर दिलों से बसी बस्तियाँ

भाव शून्यता गहराई।

सरस सुमन निष्प्राण हो गए

नागफनी ऐसी छाई।

बूँद-बूँद में हो बहार सी

बरसाओ वो अपनापन।

उपजाऊ हो मन की

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗