कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ५० / २०५ № 50 of 205 रचना ५० / २०५
४ जुलाई २०१४ 4 July 2014 ४ जुलाई २०१४

हाथ तेरा थामना अच्छा लगा haath teraa thaamanaa achchaa lagaa हाथ तेरा थामना अच्छा लगा

कल हुआ जो वाक़या, अच्छा लगा।

॥

हाथ तेरा थामना

अच्छा लगा।

॥

जिस्म तो काँपा जो

तूने प्यार से

॥

कुछ हथेली पर लिखा, अच्छा लगा।

॥

देख कर मशगूल हमको इस कदर

॥

चाँद का मुँह फेरना अच्छा लगा।

॥

घाट रेतीले जलधि के

नम हुए

॥

मछलियों का तैरना

अच्छा लगा।

॥

आसमाँ में बिजलियों

की कौंध में

॥

बादलों का काफिला, अच्छा लगा।

॥

नाम ले तूने पुकारा

जब मुझे

॥

वादियों में गूँज उठा, अच्छा लगा।

॥

बर्फ में लिपटे

पहाड़ों का बहुत

॥

दूर तक वो सिलसिला, अच्छा लगा।

॥

“कल्पना” फिर वो

तेरा वादा प्रियम!

॥

उम्र भर के साथ का, अच्छा लगा।

॥

- कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

kal huaa jo waaqayaa, achchaa lagaa

·

haath teraa thaamanaa

achchaa lagaa

·

jism to kaanpaa jo

toone pyaar se

·

kuch hathelee par likhaa, achchaa lagaa

·

dekh kar mashagool hamako is kadar

·

chaand kaa munh pheranaa achchaa lagaa

·

ghaat reteele jaladhi ke

nam hue

·

machaliyon kaa tairanaa

achchaa lagaa

·

aasamaan men bijaliyon

kee kaundh men

·

baadalon kaa kaaphilaa, achchaa lagaa

·

naam le toone pukaaraa

jab mujhe

·

waadiyon men goonj uthaa, achchaa lagaa

·

barph men lipate

pahaadon kaa bahut

·

door tak wo silasilaa, achchaa lagaa

·

“kalpanaa” phir wo

teraa waadaa priyam!

·

umr bhar ke saath kaa, achchaa lagaa

·

- kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

कल हुआ जो वाक़या, अच्छा लगा।

॥

हाथ तेरा थामना

अच्छा लगा।

॥

जिस्म तो काँपा जो

तूने प्यार से

॥

कुछ हथेली पर लिखा, अच्छा लगा।

॥

देख कर मशगूल हमको इस कदर

॥

चाँद का मुँह फेरना अच्छा लगा।

॥

घाट रेतीले जलधि के

नम हुए

॥

मछलियों का तैरना

अच्छा लगा।

॥

आसमाँ में बिजलियों

की कौंध में

॥

बादलों का काफिला, अच्छा लगा।

॥

नाम ले तूने पुकारा

जब मुझे

॥

वादियों में गूँज उठा, अच्छा लगा।

॥

बर्फ में लिपटे

पहाड़ों का बहुत

॥

दूर तक वो सिलसिला, अच्छा लगा।

॥

“कल्पना” फिर वो

तेरा वादा प्रियम!

॥

उम्र भर के साथ का, अच्छा लगा।

॥

- कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗