कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ४९ / २०४ № 49 of 204 रचना ४९ / २०४
४ जुलाई २०१४ 4 July 2014 ४ जुलाई २०१४

हाथ तेरा थामना अच्छा लगा haath teraa thaamanaa achchaa lagaa हाथ तेरा थामना अच्छा लगा

कल हुआ जो वाक़या, अच्छा लगा।

हाथ तेरा थामना

अच्छा लगा।

जिस्म तो काँपा जो

तूने प्यार से

कुछ हथेली पर लिखा, अच्छा लगा।

देख कर मशगूल हमको इस कदर

चाँद का मुँह फेरना अच्छा लगा।

घाट रेतीले जलधि के

नम हुए

मछलियों का तैरना

अच्छा लगा।

आसमाँ में बिजलियों

की कौंध में

बादलों का काफिला, अच्छा लगा।

नाम ले तूने पुकारा

जब मुझे

वादियों में गूँज उठा, अच्छा लगा।

बर्फ में लिपटे

पहाड़ों का बहुत

दूर तक वो सिलसिला, अच्छा लगा।

“कल्पना” फिर वो

तेरा वादा प्रियम!

उम्र भर के साथ का, अच्छा लगा।

- कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

kal huaa jo waaqayaa, achchaa lagaa

·

haath teraa thaamanaa

achchaa lagaa

·

jism to kaanpaa jo

toone pyaar se

·

kuch hathelee par likhaa, achchaa lagaa

·

dekh kar mashagool hamako is kadar

·

chaand kaa munh pheranaa achchaa lagaa

·

ghaat reteele jaladhi ke

nam hue

·

machaliyon kaa tairanaa

achchaa lagaa

·

aasamaan men bijaliyon

kee kaundh men

·

baadalon kaa kaaphilaa, achchaa lagaa

·

naam le toone pukaaraa

jab mujhe

·

waadiyon men goonj uthaa, achchaa lagaa

·

barph men lipate

pahaadon kaa bahut

·

door tak wo silasilaa, achchaa lagaa

·

“kalpanaa” phir wo

teraa waadaa priyam!

·

umr bhar ke saath kaa, achchaa lagaa

·

- kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

कल हुआ जो वाक़या, अच्छा लगा।

हाथ तेरा थामना

अच्छा लगा।

जिस्म तो काँपा जो

तूने प्यार से

कुछ हथेली पर लिखा, अच्छा लगा।

देख कर मशगूल हमको इस कदर

चाँद का मुँह फेरना अच्छा लगा।

घाट रेतीले जलधि के

नम हुए

मछलियों का तैरना

अच्छा लगा।

आसमाँ में बिजलियों

की कौंध में

बादलों का काफिला, अच्छा लगा।

नाम ले तूने पुकारा

जब मुझे

वादियों में गूँज उठा, अच्छा लगा।

बर्फ में लिपटे

पहाड़ों का बहुत

दूर तक वो सिलसिला, अच्छा लगा।

“कल्पना” फिर वो

तेरा वादा प्रियम!

उम्र भर के साथ का, अच्छा लगा।

- कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗