कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १९० / २०५ № 190 of 205 रचना १९० / २०५
३ फ़रवरी २०२० 3 February 2020 ३ फ़रवरी २०२०

सुमन सलोने गुलाब के suman salone gulaab ke सुमन सलोने गुलाब के

डाल-डाल पर जब लद जाते

सुमन सलोने गुलाब के

स्वप्न गुलाबी हमें दिखाते

सुमन सलोने गुलाब के

॥

रस-सुगंध, सौन्दर्य-स्वामी ये

हर लेते हर जन का मन

जब डालों पर खिल लहराते

सुमन सलोने गुलाब के

॥

ऋतु बसंत में हरिक बाग तब

बन जाता है रंगमहल

जब बागों में रास रचाते

सुमन सलोने गुलाब के

॥

देख धूप के तेवर इनका

रूप निखर जाता है और

सुर्ख-सूर्य से आँख मिलाते

सुमन सलोने गुलाब के

॥

हर मुश्किल को मीत बना लो

देते हमको सीख यही

काँटों से भी प्रीत निभाते

सुमन सलोने गुलाब के

॥

अलग-अलग ऋतु में आ मिलते

इनसे जब बिछड़े साथी

हँसकर उनको गले लगाते

सुमन सलोने गुलाब के

॥

थोड़ा सा दें स्थान 'कल्पना'

इनको अपने आँगन में

रंग-सुरभि से घर महकाते

सुमन सलोने गुलाब के

daal-daal par jab lad jaate

suman salone gulaab ke

svapn gulaabee hamen dikhaate

suman salone gulaab ke

·

ras-sugandh, saundary-svaamee ye

har lete har jan kaa man

jab daalon par khil laharaate

suman salone gulaab ke

·

riitu basant men harik baag tab

ban jaataa hai rangamahal

jab baagon men raas rachaate

suman salone gulaab ke

·

dekh dhoop ke tewar inakaa

roop nikhar jaataa hai aur

surkh-soory se aankh milaate

suman salone gulaab ke

·

har mushkil ko meet banaa lo

dete hamako seekh yahee

kaanton se bhee preet nibhaate

suman salone gulaab ke

·

alag-alag riitu men aa milate

inase jab bichade saathee

hansakar unako gale lagaate

suman salone gulaab ke

·

thodaa saa den sthaan 'kalpanaa'

inako apane aangan men

rang-surabhi se ghar mahakaate

suman salone gulaab ke

डाल-डाल पर जब लद जाते

सुमन सलोने गुलाब के

स्वप्न गुलाबी हमें दिखाते

सुमन सलोने गुलाब के

॥

रस-सुगंध, सौन्दर्य-स्वामी ये

हर लेते हर जन का मन

जब डालों पर खिल लहराते

सुमन सलोने गुलाब के

॥

ऋतु बसंत में हरिक बाग तब

बन जाता है रंगमहल

जब बागों में रास रचाते

सुमन सलोने गुलाब के

॥

देख धूप के तेवर इनका

रूप निखर जाता है और

सुर्ख-सूर्य से आँख मिलाते

सुमन सलोने गुलाब के

॥

हर मुश्किल को मीत बना लो

देते हमको सीख यही

काँटों से भी प्रीत निभाते

सुमन सलोने गुलाब के

॥

अलग-अलग ऋतु में आ मिलते

इनसे जब बिछड़े साथी

हँसकर उनको गले लगाते

सुमन सलोने गुलाब के

॥

थोड़ा सा दें स्थान 'कल्पना'

इनको अपने आँगन में

रंग-सुरभि से घर महकाते

सुमन सलोने गुलाब के

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗