कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १८९ / २०४ № 189 of 204 रचना १८९ / २०४
३ फ़रवरी २०२० 3 February 2020 ३ फ़रवरी २०२०

सुमन सलोने गुलाब के suman salone gulaab ke सुमन सलोने गुलाब के

डाल-डाल पर जब लद जाते

सुमन सलोने गुलाब के

स्वप्न गुलाबी हमें दिखाते

सुमन सलोने गुलाब के

रस-सुगंध, सौन्दर्य-स्वामी ये

हर लेते हर जन का मन

जब डालों पर खिल लहराते

सुमन सलोने गुलाब के

ऋतु बसंत में हरिक बाग तब

बन जाता है रंगमहल

जब बागों में रास रचाते

सुमन सलोने गुलाब के

देख धूप के तेवर इनका

रूप निखर जाता है और

सुर्ख-सूर्य से आँख मिलाते

सुमन सलोने गुलाब के

हर मुश्किल को मीत बना लो

देते हमको सीख यही

काँटों से भी प्रीत निभाते

सुमन सलोने गुलाब के

अलग-अलग ऋतु में आ मिलते

इनसे जब बिछड़े साथी

हँसकर उनको गले लगाते

सुमन सलोने गुलाब के

थोड़ा सा दें स्थान 'कल्पना'

इनको अपने आँगन में

रंग-सुरभि से घर महकाते

सुमन सलोने गुलाब के

daal-daal par jab lad jaate

suman salone gulaab ke

svapn gulaabee hamen dikhaate

suman salone gulaab ke

·

ras-sugandh, saundary-svaamee ye

har lete har jan kaa man

jab daalon par khil laharaate

suman salone gulaab ke

·

riitu basant men harik baag tab

ban jaataa hai rangamahal

jab baagon men raas rachaate

suman salone gulaab ke

·

dekh dhoop ke tewar inakaa

roop nikhar jaataa hai aur

surkh-soory se aankh milaate

suman salone gulaab ke

·

har mushkil ko meet banaa lo

dete hamako seekh yahee

kaanton se bhee preet nibhaate

suman salone gulaab ke

·

alag-alag riitu men aa milate

inase jab bichade saathee

hansakar unako gale lagaate

suman salone gulaab ke

·

thodaa saa den sthaan 'kalpanaa'

inako apane aangan men

rang-surabhi se ghar mahakaate

suman salone gulaab ke

डाल-डाल पर जब लद जाते

सुमन सलोने गुलाब के

स्वप्न गुलाबी हमें दिखाते

सुमन सलोने गुलाब के

रस-सुगंध, सौन्दर्य-स्वामी ये

हर लेते हर जन का मन

जब डालों पर खिल लहराते

सुमन सलोने गुलाब के

ऋतु बसंत में हरिक बाग तब

बन जाता है रंगमहल

जब बागों में रास रचाते

सुमन सलोने गुलाब के

देख धूप के तेवर इनका

रूप निखर जाता है और

सुर्ख-सूर्य से आँख मिलाते

सुमन सलोने गुलाब के

हर मुश्किल को मीत बना लो

देते हमको सीख यही

काँटों से भी प्रीत निभाते

सुमन सलोने गुलाब के

अलग-अलग ऋतु में आ मिलते

इनसे जब बिछड़े साथी

हँसकर उनको गले लगाते

सुमन सलोने गुलाब के

थोड़ा सा दें स्थान 'कल्पना'

इनको अपने आँगन में

रंग-सुरभि से घर महकाते

सुमन सलोने गुलाब के

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗