बसंत आया है basant aayaa hai बसंत आया है
डाल-डाल पर गुल खिले, बसंत आया है।
पात-पात हँसकर कहे, बसंत आया है।
चारु चंद्र की चाँदनी, विहार को उतरी।
स्वर्ग लोक भू पर दिखे, बसंत आया है।
सुर के साथ ठंडी हवा, फिज़ाओं में बिखरी
तार-तार मन का गुने, बसंत आया है।
बाग-बीच कलिकाओं से, किलोल भँवरोंकी
फूल-फूल तितली उड़े, बसंत आया है।
कुंज कुंज में कोकिला, खुमार से कुहकी।
आम्र बौर तरु पर लदे, बसंत आया है।
खूब दृष्टि को भा रहा, उफान नदियों का।
धार-धार को सुर मिले, बसंत आया है।
स्वर्ण वर्ण सरसों खिली, विशाल खेतों में।
लख किसान पुलकित हुए, बसंत आया है।
नम हवाओं के स्पर्श से, प्रसन्न है वसुधा।
बीज-बीज अंकुर उगे, बसंत आया है।
सृष्टि रूप नव से जगी, उमंग जीवन में।
पर्व काश! घर घर मने, बसंत आया है।
daal-daal par gul khile, basant aayaa hai
paat-paat hansakar kahe, basant aayaa hai
chaaru chandr kee chaandanee, wihaar ko utaree
svarg lok bhoo par dikhe, basant aayaa hai
sur ke saath thandee hawaa, phizaaon men bikharee
taar-taar man kaa gune, basant aayaa hai
baag-beech kalikaaon se, kilol bhanvaronkee
phool-phool titalee ude, basant aayaa hai
kunj kunj men kokilaa, khumaar se kuhakee
aamr baur taru par lade, basant aayaa hai
khoob driishti ko bhaa rahaa, uphaan nadiyon kaa
dhaar-dhaar ko sur mile, basant aayaa hai
svarn warn sarason khilee, wishaal kheton men
lakh kisaan pulakit hue, basant aayaa hai
nam hawaaon ke sparsh se, prasann hai wasudhaa
beej-beej ankur uge, basant aayaa hai
sriishti roop naw se jagee, umang jeewan men
parv kaash! ghar ghar mane, basant aayaa hai
डाल-डाल पर गुल खिले, बसंत आया है।
पात-पात हँसकर कहे, बसंत आया है।
चारु चंद्र की चाँदनी, विहार को उतरी।
स्वर्ग लोक भू पर दिखे, बसंत आया है।
सुर के साथ ठंडी हवा, फिज़ाओं में बिखरी
तार-तार मन का गुने, बसंत आया है।
बाग-बीच कलिकाओं से, किलोल भँवरोंकी
फूल-फूल तितली उड़े, बसंत आया है।
कुंज कुंज में कोकिला, खुमार से कुहकी।
आम्र बौर तरु पर लदे, बसंत आया है।
खूब दृष्टि को भा रहा, उफान नदियों का।
धार-धार को सुर मिले, बसंत आया है।
स्वर्ण वर्ण सरसों खिली, विशाल खेतों में।
लख किसान पुलकित हुए, बसंत आया है।
नम हवाओं के स्पर्श से, प्रसन्न है वसुधा।
बीज-बीज अंकुर उगे, बसंत आया है।
सृष्टि रूप नव से जगी, उमंग जीवन में।
पर्व काश! घर घर मने, बसंत आया है।