सभी चाहते ताज sabhee chaahate taaj सभी चाहते ताज
अंतर्ज्वाला देश को, जला रही है आज।
अपने ही सिर देखना, सभी चाहते ताज।
सभी चाहते ताज, देश के लिए न क
सिर्फ स्वार्थ के
गीत, गा रहा देखें वो
ही।
कहे 'कल्पना' मीत, सभी को मिले निवाला
स्वर्ग बनाएँ देश, बुझाकर अंतर्ज्वाला।
भूल न जाएँ आज हम, वीरों के बलिदान।
आज़ादी के वास्ते, किए निछावर प्राण।
किए निछावर प्राण, क्रांति के अंकुर रोपे
माँ की गोद उजाड़, तत्व निज, माँ
antarjvaalaa desh ko, jalaa rahee hai aaj
apane hee sir dekhanaa, sabhee chaahate taaj
sabhee chaahate taaj, desh ke lie n k
sirph svaarth ke
geet, gaa rahaa dekhen wo
hee
kahe 'kalpanaa' meet, sabhee ko mile niwaalaa
svarg banaaen desh, bujhaakar antarjvaalaa
bhool n jaaen aaj ham, weeron ke balidaan
aazaadee ke waaste, kie nichaawar praan
kie nichaawar praan, kraanti ke ankur rope
maan kee god ujaad, tatv nij, maan
अंतर्ज्वाला देश को, जला रही है आज।
अपने ही सिर देखना, सभी चाहते ताज।
सभी चाहते ताज, देश के लिए न क
सिर्फ स्वार्थ के
गीत, गा रहा देखें वो
ही।
कहे 'कल्पना' मीत, सभी को मिले निवाला
स्वर्ग बनाएँ देश, बुझाकर अंतर्ज्वाला।
भूल न जाएँ आज हम, वीरों के बलिदान।
आज़ादी के वास्ते, किए निछावर प्राण।
किए निछावर प्राण, क्रांति के अंकुर रोपे
माँ की गोद उजाड़, तत्व निज, माँ