कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना २३ / ६३ № 23 of 63 रचना २३ / ६३
२५ जनवरी २०१३ 25 January 2013 २५ जनवरी २०१३

सभी चाहते ताज sabhee chaahate taaj सभी चाहते ताज

अंतर्ज्वाला देश को, जला रही है आज।

अपने ही सिर देखना, सभी चाहते ताज।

सभी चाहते ताज, देश के लिए न क

सिर्फ स्वार्थ के

गीत, गा रहा देखें वो

ही।

कहे 'कल्पना' मीत, सभी को मिले निवाला

स्वर्ग बनाएँ देश, बुझाकर अंतर्ज्वाला।

भूल न जाएँ आज हम, वीरों के बलिदान।

आज़ादी के वास्ते, किए निछावर प्राण।

किए निछावर प्राण, क्रांति के अंकुर रोपे

माँ की गोद उजाड़, तत्व निज, माँ

antarjvaalaa desh ko, jalaa rahee hai aaj

·

apane hee sir dekhanaa, sabhee chaahate taaj

·

sabhee chaahate taaj, desh ke lie n k

·

sirph svaarth ke

geet, gaa rahaa dekhen wo

hee

·

kahe 'kalpanaa' meet, sabhee ko mile niwaalaa

·

svarg banaaen desh, bujhaakar antarjvaalaa

·

bhool n jaaen aaj ham, weeron ke balidaan

·

aazaadee ke waaste, kie nichaawar praan

·

kie nichaawar praan, kraanti ke ankur rope

·

maan kee god ujaad, tatv nij, maan

अंतर्ज्वाला देश को, जला रही है आज।

अपने ही सिर देखना, सभी चाहते ताज।

सभी चाहते ताज, देश के लिए न क

सिर्फ स्वार्थ के

गीत, गा रहा देखें वो

ही।

कहे 'कल्पना' मीत, सभी को मिले निवाला

स्वर्ग बनाएँ देश, बुझाकर अंतर्ज्वाला।

भूल न जाएँ आज हम, वीरों के बलिदान।

आज़ादी के वास्ते, किए निछावर प्राण।

किए निछावर प्राण, क्रांति के अंकुर रोपे

माँ की गोद उजाड़, तत्व निज, माँ

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗