कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना २५ / ६३ № 25 of 63 रचना २५ / ६३
२ फ़रवरी २०१३ 2 February 2013 २ फ़रवरी २०१३

हरियाली में घुल गए hariyaalee men ghul gae हरियाली में घुल गए

हरियाली में घुल गए, पीले पीले रंग।

ऋतु परिवर्तन देखकर, डाली-डाली दंग।

डाली-डाली दंग, शीत ऋतु हुई

पुरानी

आया पतझड़ पास, सुनाने नई कहानी।

बिन पत्तों के पेड़, दिख रहे

खाली-खाली

ओढ़ पीत परिधान, छिप गई है

हरियाली।

पेड़ों पर अब पीतिमा, कर बैठी अधिकार।

पतझड़ ने आकर किया, हरीतिमा पर वार।

हरीतिमा पर वार, रंग कुदरत ने

बदला

देख सृष्टि सौंदर्य, आज मन फिर से मचला।

hariyaalee men ghul gae, peele peele rang

·

riitu pariwartan dekhakar, daalee-daalee dang

·

daalee-daalee dang, sheet riitu huee

puraanee

·

aayaa patajhad paas, sunaane naee kahaanee

·

bin patton ke ped, dikh rahe

khaalee-khaalee

·

oढ़ peet paridhaan, chip gaee hai

hariyaalee

·

pedon par ab peetimaa, kar baithee adhikaar

·

patajhad ne aakar kiyaa, hareetimaa par waar

·

hareetimaa par waar, rang kudarat ne

badalaa

·

dekh sriishti saundary, aaj man phir se machalaa

हरियाली में घुल गए, पीले पीले रंग।

ऋतु परिवर्तन देखकर, डाली-डाली दंग।

डाली-डाली दंग, शीत ऋतु हुई

पुरानी

आया पतझड़ पास, सुनाने नई कहानी।

बिन पत्तों के पेड़, दिख रहे

खाली-खाली

ओढ़ पीत परिधान, छिप गई है

हरियाली।

पेड़ों पर अब पीतिमा, कर बैठी अधिकार।

पतझड़ ने आकर किया, हरीतिमा पर वार।

हरीतिमा पर वार, रंग कुदरत ने

बदला

देख सृष्टि सौंदर्य, आज मन फिर से मचला।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗