कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १ / ६७ № 1 of 67 रचना १ / ६७
३१ अक्तूबर २०११ 31 October 2011 ३१ अक्तूबर २०११

इक अनजाने शहर में ik anajaane shahar men इक अनजाने शहर में

इक अनजाने शहर में, मन ही केवल मीत।

मन को अपना मानकर, एकाकीपन जीत।

कल जो छीना वक्त ने, उसे न रखिए याद

याद उसे ही कीजिये, जो पाया है आज।

कर्म है जीवन जानिए, कर्म अगर है साथ

भाग्य प्रबल कर जायंगे, सत्कर्मों के हाथ

उत्सव के दिन चार हैं, जश्न मनाएँ साथ

खुशियां होंगी दो गुणी, अगर हाथ में हाथ।

रंग रंग के फूल हैं, एक मगर उद्यान

मिलकर खुशियाँ बाँटते, यही जीव विज्ञान।

लिखने की आदत भली, कलम सदा हो साथ

जहां रहें जिस हाल में, लिख डालें जज़्बात।

ik anajaane shahar men, man hee kewal meet

man ko apanaa maanakar, ekaakeepan jeet

·

kal jo chheenaa wakt ne, use n rakhie yaad

yaad use hee keejiye, jo paayaa hai aaj

·

karm hai jeewan jaanie, karm agar hai saath

bhaagy prabal kar jaayange, satkarmon ke haath

·

utsav ke din chaar hain, jashn manaaen saath

khushiyaan hongee do gunee, agar haath men haath

·

rang rang ke phool hain, ek magar udyaan

milakar khushiyaan baantate, yahee jeev wijnaan

·

likhane kee aadat bhalee, kalam sadaa ho saath

jahaan rahen jis haal men, likh daalen jazbaat

इक अनजाने शहर में, मन ही केवल मीत।

मन को अपना मानकर, एकाकीपन जीत।

कल जो छीना वक्त ने, उसे न रखिए याद

याद उसे ही कीजिये, जो पाया है आज।

कर्म है जीवन जानिए, कर्म अगर है साथ

भाग्य प्रबल कर जायंगे, सत्कर्मों के हाथ

उत्सव के दिन चार हैं, जश्न मनाएँ साथ

खुशियां होंगी दो गुणी, अगर हाथ में हाथ।

रंग रंग के फूल हैं, एक मगर उद्यान

मिलकर खुशियाँ बाँटते, यही जीव विज्ञान।

लिखने की आदत भली, कलम सदा हो साथ

जहां रहें जिस हाल में, लिख डालें जज़्बात।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗