कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १ / ५२ № 1 of 52 रचना १ / ५२
११ मई २०१६ 11 May 2016 ११ मई २०१६

कुदरत वारा kudarat waaraa कुदरत वारा

दिल

जो दुखु जिएँ वञे गरी ओ कुदरत वारा।

अहिड़ो

मींहु वसाइ वरी ओ कुदरत वारा।

पारि करिणु चाहे थो हरको, भव-सागर खे

खणी

लोभ जी साणु भरी, ओ कुदरत वारा।

दिसु कींय महल अटारिनि ड्राहे, घर गुरबत जा

धन-दौलत

साँ देगि भरी, ओ कुदरत वारा।

उजला

कपड़ा, बगुला-भगत, करे

तनि-धारणु

जापु

जपिनि था हरी! हरी! ओ कदिरत वारा।

आबु सुकी व्यो आ अजु जन-जन जे नेणनि

dil

jo dukhu jien wane garee o kudarat waaraa

·

ahido

meenhu wasaai waree o kudarat waaraa

·

paari karinu chaahe tho harako, bhaw-saagar khe

·

khanee

lobh jee saanu bharee, o kudarat waaraa

·

disu keeny mahal ataarini draahe, ghar gurabat jaa

·

dhan-daulat

saan degi bharee, o kudarat waaraa

·

ujalaa

kapadaa, bagulaa-bhagat, kare

tani-dhaaranu

·

jaapu

japini thaa haree! haree! o kadirat waaraa

·

aabu sukee wyo aa aju jan-jan je nenani

दिल

जो दुखु जिएँ वञे गरी ओ कुदरत वारा।

अहिड़ो

मींहु वसाइ वरी ओ कुदरत वारा।

पारि करिणु चाहे थो हरको, भव-सागर खे

खणी

लोभ जी साणु भरी, ओ कुदरत वारा।

दिसु कींय महल अटारिनि ड्राहे, घर गुरबत जा

धन-दौलत

साँ देगि भरी, ओ कुदरत वारा।

उजला

कपड़ा, बगुला-भगत, करे

तनि-धारणु

जापु

जपिनि था हरी! हरी! ओ कदिरत वारा।

आबु सुकी व्यो आ अजु जन-जन जे नेणनि

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗